सिसिली के म्यूजियम से एंटोनोलो दा मेसिना की 4 अनमोल पेंटिंग्स चोरी, बिना अलार्म बजे वारदात को दिया अंजामछत्तीसगढ़ की बास्केटबॉल खिलाड़ी इलिसीबा ने नेशनल टूर्नामेंट्स में जीते दो मेडल, जशपुर से निकलकर बनाई पहचानअजमेर में दरगाह के सामने से गुजरी कावड़ यात्रा, पुष्कर सरोवर के जल संग श्रद्धालुओं ने दिए सद्भाव के संदेशश्रीलंका की सरजमीं पर चमके देवदत्त पडिक्कल, 167 रनों की मैराथन पारी खेलकर भारत के लिए बनाए 5 ऐतिहासिक रिकॉर्डतेजस्वी प्रकाश संग पुरानी अनबन पर सुरभि चंदना ने तोड़ी चुप्पी, रिश्ते और पेशेवर एकता पर कही बड़ी बातसदैव अटल पर प्रोटोकॉल से ऊपर दिखा सम्मान, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेंकैया नायडू को आगे बढ़ायापाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विधानसभा चुनाव का बहिष्कार, बाग और पुंछ के कई बूथों पर दर्ज हुआ शून्य मतदानघर पर मिनटों में बनाएं रेस्टोरेंट जैसा स्पाइसी गार्लिक स्वीट कॉर्न सूप, जानें आसान रेसिपीअमृतसर में 15 अगस्त पर बड़ी आतंकी साजिश नाकाम, पंजाब पुलिस ने निष्क्रिय किया आरडीएक्स भरा आईईडीस्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के कथित अनादर पर सोनिया गांधी के विरुद्ध कर्नाटक पुलिस में शिकायत, विकास पुत्तूर ने दी हाईकोर्ट की चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव थमने से वैश्विक कच्चे तेल के दामों में 5 प्रतिशत की बड़ी गिरावटबाज़ार
27 जुल॰ 2026, 12:57 pm (20 दिन पहले)· 0

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव थमने से वैश्विक कच्चे तेल के दामों में 5 प्रतिशत की बड़ी गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों पर अस्थाई विराम लगने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर और डब्ल्यूटीआई 85 डॉलर के करीब पहुंच गया है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। मध्य पूर्व में तत्काल सैन्य संघर्ष और आपूर्ति में बाधा की आशंकाएं कम होने के बाद निवेशकों ने कच्चे तेल की पोजीशन में व्यापक बदलाव किया। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों पर एक अस्थाई विराम की खबर आते ही वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल के भाव 5 प्रतिशत से अधिक टूट गए। इससे पहले बीते तीन हफ़्तों में मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक तनाव और रणनीतिक समुद्री मार्गों के बंद होने के डर से कच्चे तेल के दामों में लगातार भारी उछाल देखा जा रहा था।

ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड में एक ही दिन में भारी गिरावट

सोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड का भाव 5 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। ठीक इसी तरह, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड के दाम में भी 5 प्रतिशत से अधिक का गोता देखा गया और यह फिसलकर 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चला गया। हाल के सप्ताहों में किसी एक कारोबारी सत्र के भीतर यह कच्चे तेल की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। जब कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गए थे, तब ट्रेडर्स ने मुनाफ़ा वसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार में तेज बिकवाली का माहौल बन गया।

ये भी पढ़ें

पश्चिम एशिया में तनाव घटने से कम हुआ जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम

कच्चे तेल में आई इस ताजा बिकवाली की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में सीधे सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका का कम होना है। इससे पहले वित्तीय बाजारों ने होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के जरिए कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही में संभावित रुकावटों को देखते हुए भारी रिस्क प्रीमियम शामिल कर लिया था। हालांकि, वीकेंड पर वाशिंगटन और तेहरान दोनों ओर से आगे की सैन्य कार्रवाई रोकने के संकेत मिलने के बाद निवेशकों ने अपनी खरीदारी की पोजीशन को हल्का करना शुरू कर दिया। बाजार में अब यह धारणा बन रही है कि तात्कालिक सप्लाई शॉक का खतरा टल गया है, जिसके चलते फ्यूचर्स मार्केट में यह बड़ा सुधार देखा गया है।

समुद्री जलमार्गों पर चुनौतियां और सप्लाई चेन का जोखिम

ऊर्जा बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि तेल की कीमतों में आई गिरावट का मतलब यह नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार पूरी तरह सामान्य स्थिति में लौट आया है। रणनीतिक समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही में अब भी पूरी तरह सुधार नहीं हुआ है और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारा है, जिसके माध्यम से वैश्विक समुद्री कच्चे तेल और एलएनजी निर्यात का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस पतले जलमार्ग में किसी भी तरह की बाधा पूरी दुनिया के कमोडिटी बाजारों में भारी उथल-पुथल मचा सकती है।

शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या अब भी सामान्य स्तर से नीचे है। इसके साथ ही, यमन के हूती आंदोलन से जुड़े हमलों के कारण लाल सागर के पास स्थित बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में भी व्यापारिक जहाजों का आवागमन प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि वित्तीय बाजार किसी भी खबर पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन शिपिंग कंपनियों, बीमा प्रदाताओं और तेल व्यापारियों को जमीनी स्तर पर परिचालन सामान्य करने में समय लगता है। इसलिए, कीमतों में नरमी के बावजूद वैश्विक सप्लाई चेन का जोखिम बना हुआ है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू बाजारों पर असर

भारत अपनी कच्चा तेल आवश्यकताओं का अधिकांश हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दामों की हलचल पर भारतीय नीति निर्माताओं की सीधी नजर रहती है। जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत का आयात बिल बढ़ जाता है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव पड़ता है और देश में महंगाई बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा, कच्चे तेल में तेजी आने से विमानन, लॉजिस्टिक्स, केमिकल्स, पेंट्स और तेल विपणन कंपनियों की इनपुट लागत बढ़ जाती है।

ऐसे में ब्रेंट क्रूड के दामों में आई यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, खासकर तब जब देश में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को गति देने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। कच्चे तेल के सस्ता होने से भारतीय शेयर बाजार में भी निवेशकों की भावना मजबूत होती है, जो हाल के दिनों में विदेशी कोषों की निकासी और महंगे तेल की चिंताओं के कारण दबाव में था।

जेपीमॉर्गन का अनुमान और भविष्य का आउटलुक

वैश्विक निवेश बैंक जेपीमॉर्गन के आकलन के अनुसार, यदि मध्य पूर्व से ऊर्जा आपूर्ति में लंबी अवधि तक रुकावट बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें दोबारा उछल सकती हैं। बैंक के विश्लेषकों का कहना है कि आपूर्ति में रुकावट का हर एक अतिरिक्त महीना कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 7 डॉलर से 8 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, मौजूदा समय में सैन्य झड़पों पर विराम लगने से बाजार को अस्थाई रूप से संभलने का मौका मिला है।

सवाल-जवाब

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 5% से अधिक की गिरावट क्यों आई?
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों पर अस्थाई विराम लगने से मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति बाधित होने की तात्कालिक चिंताएं कम हो गईं, जिससे निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी।
गिरावट के बाद ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड के क्या दाम हैं?
गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया।
मध्य पूर्व के कौन से समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं?
होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के पास स्थित बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं।
कच्चे तेल के दाम गिरने से भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है। तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल घटता है, रुपये पर दबाव कम होता है और महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
जेपीमॉर्गन ने भविष्य में तेल की कीमतों को लेकर क्या अनुमान जताया है?
जेपीमॉर्गन के अनुसार, यदि आपूर्ति में रुकावट लंबी खींचती है तो हर अतिरिक्त महीने से कच्चे तेल के दाम में लगभग 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हो सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR