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कच्चे तेल में जोरदार तेजी से वैश्विक बाजारों में हलचल, ब्रेंट 103 डॉलर के पार पहुंचाबाज़ार
1 अक्तू॰ 2026, 4:08 pm (26 दिन पहले)· 4

कच्चे तेल में जोरदार तेजी से वैश्विक बाजारों में हलचल, ब्रेंट 103 डॉलर के पार पहुंचा

मध्य पूर्व में सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतें कई साल के उच्च स्तर पर टिकी हुई हैं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को चढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक मुद्राओं और शेयर बाजारों पर भारी दबाव देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया मजबूती ने पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों में नया दबाव पैदा कर दिया है। बुधवार के कारोबारी सत्र में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड 1.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 90.42 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर बंद हुआ, जबकि ब्रेंट क्रूड 0.9 प्रतिशत की मजबूती के साथ 103.53 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। दोनों ही प्रमुख बेंचमार्क इस साल अब तक के अपने मजबूत लाभ को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर तेल की यह दृढ़ता मुख्य रूप से मध्य पूर्व में आपूर्ति को लेकर लगातार बने तनाव और अनिश्चितता की वजह से देखने को मिल रही है। हालांकि मध्य पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति अब युद्ध पूर्व स्तरों के करीब लौटती दिखाई दे रही है, लेकिन ईंधन आपूर्ति, विशेषकर गैसोलीन की भरपाई, कच्चे तेल की इस बहाली से काफी पीछे छूट गई है।

अमेरिकी शेयर बाजारों में तिमाही का निराशाजनक अंत

बुधवार यानी 30 सितंबर को वित्तीय बाजारों में एक बेहद उथल-पुथल भरी तीसरी तिमाही समाप्त हो गई। तेल की ऊंची कीमतों और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंकाओं के बीच अमेरिकी शेयर बाजारों में बिकवाली का माहौल हावी रहा। प्रमुख सूचकांक S&P 500 में 0.25 प्रतिशत की गिरावट आई और यह फिसलकर 7,651.54 के स्तर पर बंद हुआ। इसके साथ ही S&P 500 ने जून के बाद का अपना सबसे खराब मासिक प्रदर्शन दर्ज किया। इसी तरह डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.86 प्रतिशत टूटकर 50,906.05 पर बंद हुआ। तिमाही के अंतिम दिन इक्विटी बेंचमार्क पर बना यह दबाव यह दर्शाता है कि निवेशक ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी और उससे पैदा होने वाले महंगाई के जोखिमों को लेकर कितने सतर्क हैं।

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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती का मुद्राओं पर असर

अमेरिकी मुद्रास्फीति से जुड़े व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी PCE के आंकड़ों में नरमी देखने को मिली थी, जिसने अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंकाओं को कुछ हद तक शांत किया। इसके बावजूद कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई दोबारा भड़कने का डर बना हुआ है, जिसने अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड को कई साल के उच्च स्तर के करीब बनाए रखा है। बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी ने अमेरिकी डॉलर को व्यापक मजबूती प्रदान की है, जिससे अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भारी असर पड़ा है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित किया है।

एशियाई सत्र में डॉलर के मुकाबले येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति

गुरुवार को एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी USD/JPY अपनी साप्ताहिक सीमा के ऊपरी छोर पर 158.00 से ऊपर टिका रहा। अमेरिकी डॉलर की चौतरफा मजबूती ने बैंक ऑफ जापान यानी BoJ की ओर से नीतिगत सख्ती की उम्मीदों और जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित करेंसी हस्तक्षेप के जोखिम को पूरी तरह पीछे धकेल दिया है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी AUD/USD दो महीने के निचले स्तर के करीब स्थिर होता दिखा और गुरुवार को एशियाई सत्र में 0.6900 के मध्य स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष अगस्त में तेजी से घटकर 49.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD495M) रह गया, जिसका ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और इस करेंसी युग्म पर सीमित असर पड़ा क्योंकि पूरी दिशा अमेरिकी डॉलर की तेजी से तय हो रही थी।

सोने की चमक फीकी और यूरोप की मुद्रा में कमजोरी

कीमती धातुओं के बाजार में सोना गुरुवार को यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में 4,200 डॉलर के आसपास के मामूली इंट्राडे उछाल का लाभ उठाने में संघर्ष करता दिखा और लगभग सपाट दायरे में कारोबार करता रहा। हालांकि बुधवार को जारी अमेरिकी महंगाई के आंकड़े अनुमान से कमजोर रहे थे, लेकिन अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के नए बहु-वर्षीय उच्च स्तर छूने के कारण डॉलर की लिवाली लगातार जारी रही। बॉन्ड यील्ड में यह तेजी बिना ब्याज देने वाले सोने की मांग को कमजोर करने वाला प्रमुख कारक साबित हुई है। इस बीच, यूरो और डॉलर यानी EUR/USD मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक गिर गया है। बुधवार को यह जोड़ी लुढ़ककर 1.1312 के स्तर पर आ गई थी, जो इसके जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। यूरो में यह भारी गिरावट अमेरिकी डॉलर की जबर्दस्त ताकत, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और यूरोप के ऊंचे ऊर्जा मूल्यों के प्रति संवेदनशील होने की चिंताओं का मिलाजुला परिणाम है। हालांकि यूरोज़ोन में महंगाई का नया झटका यूरो को एक अप्रत्याशित सहारा भी दे सकता है।

क्रिप्टो बाजार में संस्थागत पूंजी निकासी का दबाव

डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में हाइपरलिक्विड यानी HYPE गुरुवार को 2 प्रतिशत टूट गया, जिससे पिछले दिन की 5 प्रतिशत की बढ़त का एक बड़ा हिस्सा घट गया। संस्थागत निवेशकों की मांग में कमी आने के संकेत मिले हैं, जहां बुधवार को 50 लाख डॉलर यानी 5 मिलियन डॉलर का पूंजी बहिर्गमन दर्ज किया गया। इस फंड निकासी ने निकट अवधि में निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। तकनीकी दृष्टिकोण से HYPE का निकट अवधि का परिदृश्य मिलाजुला बना हुआ है, क्योंकि इसकी कीमत 90 डॉलर के स्तर के नीचे ही सीमित बनी हुई है। पूरी दुनिया के विभिन्न वित्तीय साधन इस समय तेल की कीमतों में आई तेजी और अमेरिकी बॉन्ड बाजार में आई चाल के अनुसार अपनी दिशा तय कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

बुधवार को कच्चे तेल की कीमतें किस स्तर पर बंद हुईं?
बुधवार को WTI क्रूड 1.2 प्रतिशत बढ़कर 90.42 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 0.9 प्रतिशत बढ़कर 103.53 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
तीसरी तिमाही के अंत में अमेरिकी शेयर बाजारों का क्या प्रदर्शन रहा?
30 सितंबर को समाप्त हुई तीसरी तिमाही में S&P 500 सूचकांक 0.25 प्रतिशत गिरकर 7,651.54 पर और डाउ जोन्स 0.86 प्रतिशत गिरकर 50,906.05 पर बंद हुआ।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी का सोने के भाव पर क्या असर हुआ?
बॉन्ड यील्ड के कई साल के उच्च स्तर पर पहुंचने के कारण सोने की मांग कमजोर हुई और यह 4,200 डॉलर के स्तर के आसपास लगभग सपाट कारोबार करता दिखा।
यूरो में डॉलर के मुकाबले कितनी गिरावट दर्ज की गई?
यूरो गिरकर मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और बुधवार को यह 1.1312 पर आ गया, जो जनवरी के 1.2082 के स्तर से काफी नीचे है।
क्रिप्टोकरेंसी हाइपरलिक्विड (HYPE) में गिरावट का क्या कारण रहा?
हाइपरलिक्विड में बुधवार को 50 लाख डॉलर यानी 5 मिलियन डॉलर का संस्थागत बहिर्गमन हुआ, जिसके चलते गुरुवार को इसकी कीमत 2 प्रतिशत गिर गई।
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