अंतरराष्ट्रीय बाजार में 22/10/2026 को कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखी गई, जहां हाजिर सोने की कीमत में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और चांदी 2 प्रतिशत तक टूट गई। वैश्विक स्तर पर आई इस कमजोरी का सीधा असर घरेलू एमसीएक्स बुलियन बाजार पर भी दिखने के आसार बन गए हैं। दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के चलते ऊर्जा बाजार में जोरदार उछाल देखने को मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में आई इस ताजा तेजी ने दुनिया भर में महंगाई और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति को लेकर नए सिरे से चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सऊदी अरामको पर ड्रोन हमला और कच्चे तेल में उछाल
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेज बढ़त के पीछे सऊदी अरब में हुआ बड़ा हमला मुख्य कारण रहा। सऊदी अरामको के शेयबा तेल क्षेत्र पर एक घातक ड्रोन हमला हुआ, जिसमें दो लोगों की जान चली गई। इस हिंसक घटनाक्रम के तुरंत बाद सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए अमेरिका ने सऊदी अरब स्थित अपने दूतावासों से कुछ राजनयिक कर्मियों और उनके परिवार के सदस्यों को देश छोड़ने का आदेश जारी कर दिया। इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा कर दी हैं।
इस तनाव का असर ऊर्जा की कीमतों पर तुरंत दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 1.7 प्रतिशत चढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत 1.4 प्रतिशत की छलांग लगाकर 98.5 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई। कच्चे तेल के साथ-साथ गैसोलीन की कीमतों में भी 1 प्रतिशत की उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है, जिससे ईंधन के और महंगे होने का जोखिम गहरा गया है।
फेडरल रिजर्व और प्रमुख केंद्रीय बैंकों का रुख
ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के बीच वित्तीय बाजारों की नजरें दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसलों पर टिकी हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अगले हफ्ते अपनी नीतिगत ब्याज दरों को यथावत रखने की पूरी संभावना जताई जा रही है। फेड चेयर केविन वारश द्वारा बीते शुक्रवार को दिए गए बयानों से भी दरों में बदलाव न किए जाने के संकेतों को बल मिला है। हालांकि, ऊर्जा के बढ़ते दामों से पैदा हुई लगातार महंगाई के कारण निवेशक इस बात की आशंका जता रहे हैं कि फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।
केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप और एशिया के प्रमुख संस्थान भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। अगले हफ्ते होने वाली बैठकों में यूरोपियन सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान द्वारा भी अपनी मौजूदा ब्याज दरों में कोई फेरबदल न करने और उन्हें स्थिर बनाए रखने की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावनाओं ने परिसंपत्ति बाजारों में हलचल तेज कर दी है।
बुलियन बाजार पर क्यों बना भारी दबाव
ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के विश्लेषण के अनुसार, पारंपरिक रूप से सोने को महंगाई के खिलाफ एक मजबूत बचाव यानी हेज माना जाता है। इसके बावजूद, सोने पर कोई नियमित ब्याज या यील्ड नहीं मिलती है, जिसके कारण ब्याज दरों के उच्च स्तर पर बने रहने या उनके बढ़ने की स्थिति में निवेशकों के लिए सोने का आकर्षण घटने लगता है। दिसंबर में अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ने के जोखिम ने सर्राफा बाजार के निवेशकों को मुनाफावसूली करने पर मजबूर कर दिया है, जिसके चलते सोने और चांदी दोनों में यह तेज गिरावट दर्ज की गई है।

















