एमवी इलेक्ट्रोसिस्टम्स का पब्लिक इश्यू सब्सक्रिप्शन के अपने तीसरे और अंतिम चरण में निवेशकों का भारी ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। खुदरा निवेशकों के साथ-साथ गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणियों में भी इस सार्वजनिक निर्गम को मजबूत भागीदारी मिल रही है। इसके साथ ही अनौपचारिक ग्रे मार्केट में भी इस शेयर की मांग काफी ऊंची बनी हुई है, जहां यह प्रीमियम पर कारोबार करते हुए एक बेहतरीन शुरुआत के संकेत दे रहा है।
ग्रे मार्केट प्रीमियम और संभावित लिस्टिंग लाभ
बाजार के जानकारों और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एमवी इलेक्ट्रोसिस्टम्स आईपीओ का जीएमपी वर्तमान में 115 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। यदि निर्गम के ऊपरी मूल्य दायरे यानी 425 रुपये प्रति शेयर को आधार बनाया जाए, तो जीएमपी और इश्यू प्राइस को जोड़कर अनुमानित लिस्टिंग कीमत लगभग 540 रुपये प्रति शेयर बैठती है। यदि लिस्टिंग तक यही रुझान बरकरार रहता है, तो निवेशकों को निर्गम मूल्य के मुकाबले लगभग 27.06 प्रतिशत तक का तगड़ा मुनाफा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम कोई आधिकारिक बाजार पैमाना नहीं है और यह वास्तविक लिस्टिंग प्रदर्शन की शत-प्रतिशत गारंटी नहीं देता है।
आईपीओ का आकार, मूल्य दायरा और महत्वपूर्ण तिथियां
कुल 290 करोड़ रुपये मूल्य वाला यह आईपीओ पूरी तरह से नए इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू है, जिसके तहत लगभग 0.68 करोड़ शेयरों की पेशकश की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस का कोई भी हिस्सा शामिल नहीं है। यह निवेश के लिए 30 जुलाई को खुला था और आज यानी 3 अगस्त को बंद होने जा रहा है। शेयरों का अलॉटमेंट 4 अगस्त को तय माना जा रहा है, जबकि यह स्टॉक 6 अगस्त को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज दोनों प्रमुख मंचों पर लिस्ट होकर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो जाएगा।
कंपनी प्रबंधन ने इसके लिए प्रति इक्विटी शेयर 400 से 425 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। खुदरा निवेशक इस आईपीओ के तहत कम से कम एक लॉट के लिए बोली लगा सकते हैं, जिसमें 34 शेयर शामिल हैं। प्राइस बैंड के ऊपरी छोर के हिसाब से एक आम निवेशक को न्यूनतम 14,450 रुपये का निवेश करना होगा।
कारोबार का दायरा और भविष्य की योजनाएं
एक ब्रोकरेज फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे के बदलाव में एमवी इलेक्ट्रोसिस्टम्स एक अहम भूमिका निभाती है। कंपनी इन-हाउस डिजाइन और तकनीक के जरिए थ्री-फेस प्रोपल्शन इक्विपमेंट का निर्माण करती है। जैसे-जैसे भारतीय रेलवे तेजी से उन्नत तकनीकों की ओर बढ़ रहा है, पावर कन्वर्जन सिस्टम और प्रोपल्शन उपकरणों की मांग लगातार बनी रहेगी। आईपीओ से मिलने वाली पूंजी का इस्तेमाल कंपनी की कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। इससे वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही से वित्तीय प्रदर्शन में सुधार दिखने की उम्मीद है, क्योंकि कंपनी का लक्ष्य अपनी प्रोपल्शन प्रणाली के उत्पादन को मौजूदा 20 सेट प्रति महीने से बढ़ाकर लगभग 50 सेट प्रति महीने तक ले जाना है।



















