वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय अनिश्चितता और घबराहट का माहौल बना हुआ है। मध्य पूर्व में लगातार बढ़ती सैन्य झड़पों और अमेरिका द्वारा अपने प्रमुख व्यापारिक भागीदारों पर नए आयातों शुल्कों की घोषणा ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस दोहरे वैश्विक संकट के कारण एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव ने दुनिया भर में मुद्रास्फीति के खतरों को फिर से जीवित कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा नीतिगत दरों को लंबे समय तक सख्त रखने की आशंकाएं मजबूत हो रही हैं, जिससे वैश्विक इक्विटी और जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव बढ़ गया है।
मध्य पूर्व में गहराता सैन्य संकट और ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा
अमेरिकी सेना ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ हवाई हमलों का एक और दौर पूरा किया है। यह लगातार तेरहवीं रात थी जब अमेरिकी सैन्य बलों ने इस क्षेत्र में सक्रिय अभियानों को अंजाम दिया है। यह कार्रवाई उस व्यापक क्षेत्रीय टकराव का हिस्सा है जिसमें ईरान और उसके सहयोगी गुटों ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी हमले शुरू किए हैं। इस सैन्य तनाव के बढ़ने से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
इसी बीच, ईरान समर्थक हूती विद्रोहियों ने मध्य पूर्व के युद्ध को एक और बड़े समुद्री मार्ग तक फैला दिया है। हूतियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमले किए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंकाओं के बीच इस नए घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रणालियों को गंभीर रूप से बाधित करने का काम किया है। इस बाधा ने तेल की कीमतों को बढ़ाने का काम किया है, जिससे वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति का डर सताने लगा है। ईंधन की बढ़ती कीमतें दुनिया भर में उत्पादन और परिवहन लागत को बढ़ाकर आर्थिक सुधार की गति को धीमा कर सकती हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ प्रस्ताव और वैश्विक व्यापार युद्ध की आहट
दूसरी तरफ, अमेरिकी प्रशासन वैश्विक स्तर पर व्यापारिक नियमों को बदलने की तैयारी में है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन दुनिया के 60 सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों पर 10% से लेकर 12.5% तक के नए व्यापक टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है। इस आयात शुल्क के दायरे में अमेरिका द्वारा किए जाने वाले लगभग सभी आयात शामिल होंगे। इस बड़े कदम से एक बार फिर वैश्विक व्यापार युद्ध छिड़ने की आशंकाएं पैदा हो गई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इन शुल्कों के लागू होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी और वैश्विक व्यापार की मात्रा में बड़ी कमी आ सकती है। इस व्यापारिक गतिरोध के कारण दुनिया भर के वित्तीय बाजारों का रुख कमजोर बना हुआ है, क्योंकि निवेशकों को डर है कि इससे वैश्विक आर्थिक विकास दर में गिरावट आएगी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा।
एशियाई शेयर बाजारों की संरचना और उनके प्रमुख सूचकांक
वैश्विक आर्थिक विकास में एशिया महाद्वीप का योगदान लगभग 70% है, और यह क्षेत्र दुनिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों की मेजबानी करता है। क्षेत्र की विकसित अर्थव्यवस्थाओं में, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, जो टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध प्रमुख कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है, और दक्षिण कोरिया का कोस्पी प्रमुख स्थान रखते हैं। चीनी बाजार में तीन महत्वपूर्ण सूचकांक हैं जिनमें हांगकांग का हैंग सेंग, शंघाई कंपोजिट और शेनझेन कंपोजिट शामिल हैं। एक बड़ी उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में, भारतीय शेयर बाजार भी विदेशी निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, जो सेंसेक्स और निफ्टी सूचकांकों में शामिल भारतीय कंपनियों में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं।
एशिया की मुख्य अर्थव्यवस्थाओं की प्रकृति एक-दूसरे से काफी भिन्न है और प्रत्येक बाजार में कुछ विशिष्ट क्षेत्रों का वर्चस्व है। जापान, दक्षिण कोरिया और तेजी से विकसित हो रहे चीनी बाजारों में मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों का दबदबा है। इसके विपरीत, हांगकांग और सिंगापुर जैसे वित्तीय केंद्रों के सूचकांकों में वित्तीय सेवाएं और बैंकिंग क्षेत्र की बड़ी भागीदारी है। चीन और जापान में विनिर्माण क्षेत्र भी बहुत मजबूत है, जिसका मुख्य ध्यान ऑटोमोबाइल उत्पादन और इलेक्ट्रॉनिक्स पर रहता है। इसके अतिरिक्त, भारत और चीन जैसे देशों में मध्यम वर्ग की आबादी के तेजी से बढ़ने के कारण खुदरा व्यापार और ई-कॉमर्स कंपनियों की हिस्सेदारी बाजारों में लगातार बढ़ रही है।
एशियाई इक्विटी बाजारों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक और जोखिम
एशियाई शेयर बाजारों के प्रदर्शन के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम करते हैं। इनमें सबसे मुख्य कारण संबंधित सूचकांकों में शामिल कंपनियों के तिमाही और वार्षिक वित्तीय परिणाम होते हैं। इसके साथ ही, प्रत्येक देश की आर्थिक स्थिति, उनके केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसले और सरकारों की राजकोषीय नीतियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। व्यापक स्तर पर देखा जाए तो राजनीतिक स्थिरता, तकनीकी प्रगति और कानून का शासन भी इक्विटी बाजारों को गहरे से प्रभावित करते हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी शेयर सूचकांकों का प्रदर्शन भी एशियाई बाजारों को प्रभावित करता है, क्योंकि अधिकांश समय एशियाई बाजार रात भर के वॉल स्ट्रीट के रुझानों का अनुसरण करते हैं। जोखिम के प्रति निवेशकों का समग्र नजरिया भी यहां महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि इक्विटी को निश्चित आय वाली प्रतिभूतियों की तुलना में अधिक जोखिम भरा निवेश माना जाता है।
इक्विटी निवेश में अपने आप में जोखिम होता है, लेकिन एशियाई बाजारों में निवेश करने वाले निवेशकों को कुछ विशिष्ट क्षेत्रीय जोखिमों का भी सामना करना पड़ता है। एशिया के देशों में पूर्ण लोकतंत्र से लेकर तानाशाही तक विभिन्न राजनीतिक प्रणालियां मौजूद हैं, जिसके कारण उनकी राजनीतिक स्थिरता, पारदर्शिता, शासन व्यवस्था और कॉर्पोरेट प्रशासन के नियमों में बड़ा अंतर देखा जाता है। इसके अलावा, सीमा विवाद, व्यापारिक तनाव और प्राकृतिक आपदाएं भी बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव ला सकती हैं। निर्यात-उन्मुख अर्थव्यवस्थाओं में घरेलू मुद्रा के उतार-चढ़ाव का सीधा असर कंपनियों के मूल्यांकन पर पड़ता है; आमतौर पर मजबूत मुद्रा निर्यातकों के मुनाफे को नुकसान पहुंचाती है जबकि कमजोर मुद्रा उनके उत्पादों को विदेशों में प्रतिस्पर्धी बनाती है।
विदेशी मुद्रा बाजार की हलचल: GBP/USD और EUR/USD का विश्लेषण
तनावपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान GBP/USD जोड़ी ने अपने पांच दिनों की गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए कुछ रिकवरी दर्ज की और यह 1.3325 के करीब कारोबार करती दिखी। हालांकि, मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इसकी बढ़त सीमित रहने की आशंका बनी हुई है। मुद्रा कारोबारी अब यूके के रिटेल सेल्स के आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो बाजार को नई दिशा दे सकते हैं।
वहीं, EUR/USD जोड़ी ने पिछले दिन के मामूली नुकसान की भरपाई करते हुए एशियाई व्यापार के दौरान 1.1380 के आसपास अपनी स्थिति मजबूत की है। इसके बावजूद, इस जोड़ी की आगे की बढ़त सीमित रह सकती है क्योंकि भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन मिल रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें भी प्रभावित हो रही हैं।
कमोडिटी बाजार का हाल: गोल्ड पर दबाव और क्रूड ऑयल का तकनीकी विश्लेषण
सुरक्षित निवेश माने जाने वाले गोल्ड में लगातार दूसरे दिन बिकवाली का दबाव देखा गया और एशियाई सत्र के दौरान यह $4,050 के स्तर से नीचे खिसक गया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने तेल की कीमतों को ऊंचा रखा है, जिससे महंगाई का डर बढ़ा है और अमेरिकी ब्याज दरों के लंबे समय तक उच्च रहने की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। इसके कारण अमेरिकी डॉलर अपनी हालिया बढ़त को एक महीने के उच्च स्तर के करीब बनाए रखने में सफल रहा है, जिससे ब्याज न देने वाले सोने की मांग कमजोर पड़ी है।
कच्चे तेल (CL=F) के लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, इस समय तेल की कीमत $89.80 पर चल रही है, जो पिछले बंद $92.19 की तुलना में 2.59% की गिरावट दर्शाती है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान कच्चे तेल की कीमत $54.98 से $119.48 की सीमा के भीतर रही है। वर्तमान में बाजार का वॉल्यूम इसके 20 दिनों के औसत का 0.26 गुना है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो RSI(14) इस समय 65 के स्तर पर है जो तटस्थ से बुलिश क्षेत्र की ओर इशारा कर रहा है। MACD लाइन 2.03 पर है जबकि सिग्नल लाइन -0.46 पर है, जो कि 2.50 के हिस्टोग्राम के साथ एक मजबूत बुलिश ट्रेंड का संकेत दे रही है।
मूविंग एवरेज के विश्लेषण से पता चलता है कि कच्चे तेल में दीर्घकालिक तेजी का रुझान (लॉन्ग-टर्म अपट्रेंड) बना हुआ है क्योंकि यहां एक गोल्डन क्रॉस (EMA50 > EMA200) की स्थिति बनी हुई है। इस समय EMA20 $81.18 पर, EMA50 $82.83 पर और EMA200 $75.50 पर है। वहीं, साधारण मूविंग एवरेज के स्तरों को देखें तो SMA50 $84.41 पर और SMA200 $75.24 पर मौजूद हैं। बोलिंगर बैंड्स (20,2) की सीमा $61.96 से $91.86 के बीच है और तेल की मौजूदा कीमत इस बैंड के भीतर ही बनी हुई है। ट्रेंड की ताकत को दर्शाने वाला ADX(14) इस समय 30 पर है, जो एक मजबूत और सक्रिय ट्रेंड की पुष्टि करता है। स्टोकेस्टिक संकेतक में फास्ट लाइन 85 और सिग्नल लाइन 91 पर है। दैनिक अस्थिरता को मापने वाला ATR(14) वर्तमान में 4.09 पर है, जिसका उपयोग स्टॉप-लॉस बफर के रूप में किया जा सकता है। वर्तमान में तेल के लिए 20 दिनों का सपोर्ट स्तर लगभग $67.04 और रेसिस्टेंस स्तर $93.50 पर बना हुआ है। इसके मुख्य व्यापारिक स्तरों पर नजर डालें तो इसका पाइवट पॉइंट $90.76 पर है, जबकि ऊपर की ओर रेसिस्टेंस स्तर R1 $91.87 और R2 $93.95 पर हैं, और नीचे की ओर सपोर्ट स्तर S1 $88.68 और S2 $87.57 पर मौजूद हैं।
क्रिप्टोकरंसी बाजार में गिरावट: बिटकॉइन और एथेरियम पर दबाव
भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर डिजिटल संपत्तियों के बाजार पर भी पड़ा है। एथेरियम इस समय $1,900 के स्तर से थोड़ा नीचे कारोबार कर रहा है, जिसमें डेरिवेटिव बाजार में रुचि बढ़ने के बावजूद गुरुवार को 3% की गिरावट दर्ज की गई। इस प्रमुख ऑल्टकॉइन का ओपन इंटरेस्ट बढ़कर 14.60 मिलियन ETH हो गया है, जो पिछले दो दिनों में लगभग 600K ETH की वृद्धि दर्शाता है। यह 7 जून के बाद से इसका उच्चतम स्तर है, जो डेरिवेटिव बाजार में बढ़ते सट्टेबाजी के रुझान को दिखाता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पूरे क्रिप्टोकरंसी बाजार को विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। इस दबाव के चलते बिटकॉइन शुक्रवार को गिरकर अपने 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) सपोर्ट के पास पहुंच गया है, जो $65,135 के स्तर के आसपास है। बाजार में इस बिकवाली के दबाव के बीच पिछले 24 घंटों के दौरान पाई नेटवर्क और स्काई सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली डिजिटल संपत्तियां बनकर उभरी हैं, जिससे क्रिप्टो निवेशकों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।




















