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मिडिल ईस्ट में जहाजों पर हमलों से दहला बाजार, कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर के करीब पहुंचींबाज़ार
7 सित॰ 2026, 2:09 pm (6 दिन पहले)· 2

मिडिल ईस्ट में जहाजों पर हमलों से दहला बाजार, कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर के करीब पहुंचीं

खाड़ी ओमान और होर्मुज की जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम उछले हैं, जिससे वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

खाड़ी क्षेत्र में अचानक बढ़े सैन्य तनाव ने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में हलचल मचा दी है। ओमान की खाड़ी और होर्मुज की जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हुए सिलसिलेवार हमलों के बाद निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सप्ताहांत के दौरान अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जिनमें से दो को निष्क्रिय कर दिया गया और एक को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। इसके जवाब में कार्रवाई करते हुए ईरान ने तीन अमेरिकी संबद्ध जहाजों और होर्मुज की जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे तीन अन्य तेल टैंकरों को अपना निशाना बनाया।

इसी बीच तेहरान की ओर से बयान आया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने की योजना बना रहा है। साथ ही ओमान के साथ सहमत हुए नए शिपिंग मार्ग का भी आने वाले दिनों में अनावरण किया जाएगा। इस भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर दिखाई दिया है। बीते हफ्ते में लगभग 8 प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज करने के बाद, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त बनाकर 90.00 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया।

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विदेशी मुद्रा बाजार: AUD/USD और USD/JPY का ताजा रुख

भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों के बीच मुद्रा बाजार में अलग-अलग रुझान देखने को मिल रहे हैं। AUD/USD में हफ्ते की शुरुआत में ही तेजी का रुख बना और यह 0.7200 के स्तर से ऊपर कारोबार करते हुए मध्य मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की ओर से सख्त ब्याज दरों की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती दी है। हालांकि, अमेरिका के हालिया मजबूत रोजगार आंकड़ों (NFP) के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं और सुरक्षित संपत्ति के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग ने इस बढ़त को सीमित भी किया है।

दूसरी ओर, USD/JPY गिरावट के साथ 155.50 के स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। पिछले हफ्ते इस मुद्रा जोड़े में करीब 2.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी। बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा दरें बढ़ाने के संकेतों के कारण जापानी येन में मजबूती जारी है। इसके विपरीत, अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज से जुड़ी चिंताओं और शुक्रवार को आने वाले अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों से पहले फेड की भविष्य की नीति को लेकर अनिश्चितता के कारण अमेरिकी डॉलर दबाव महसूस कर रहा है।

सोना, डीज़ल और क्रिप्टो बाजार में तेजी की लहर

कमोडिटी और डिजिटल एसेट बाजारों में भी उल्लेखनीय हलचल दर्ज की गई है। सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन हल्की बिकवाली देखी गई, लेकिन यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं थी। सोना यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक 4,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास बना रहा। मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद शुक्रवार को निचले स्तर को छूने के बावजूद यह धातु उस स्तर से ऊपर टिकी हुई है।

तेल बाजार के दूसरे क्षेत्रों में भी अभूतपूर्व स्थिति बनी हुई है। अमेरिका में डीज़ल का क्रैक स्प्रेड, जो WTI क्रूड के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीज़ल फ्यूचर्स का प्रीमियम होता है, इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। इसने कारोबार के दौरान 102.00 डॉलर से अधिक का रिकॉर्ड उच्च स्तर छू लिया, जो ईंधन बाजार में भारी तंगी की ओर इशारा करता है।

डिजिटल संपत्तियों में बिटटेंसर (TAO) में सोमवार को अच्छी बढ़त देखने को मिली। लगातार पांच दिनों से चल रही इस तेजी के साथ TAO ने 25 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है। सोलाना ब्लॉकचेन पर इसी नाम से लॉन्च हुए एक मीम कॉइन और चैटजीपीटी-6 एस्ट्रा के रिलीज होने से बिटटेंसर को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं काफी बढ़ गई हैं। तकनीकी संकेतकों के मजबूत होने के साथ खरीदार अब 300 डॉलर के ब्रेकआउट स्तर पर नजरें जमाए हुए हैं।

रिस्क-ऑन बनाम रिस्क-ऑफ़: बाजार का बदलता मिजाज

वित्तीय बाजार में अनिश्चितता के समय दो मुख्य अवधारणाएं काम करती हैं जिन्हें रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ़ कहा जाता है। ये शब्द दर्शाते हैं कि निवेशक किसी खास अवधि में कितना जोखिम उठाने को तैयार हैं। रिस्क-ऑन माहौल में निवेशक भविष्य को लेकर आशावादी होते हैं और जोखिम भरी संपत्तियों को खरीदने के लिए तैयार रहते हैं। ऐसे समय में शेयर बाजार चढ़ते हैं, सोने को छोड़कर बाकी कमोडिटीज के दाम बढ़ते हैं और कमोडिटी निर्यातक देशों की मुद्राएं मजबूत होती हैं।

इसके विपरीत, जब बाजार में डर या अनिश्चितता का माहौल होता है तो रिस्क-ऑफ़ स्थिति उत्पन्न होती है। इसमें निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। ऐसे समय में सरकारी बॉन्ड, सोना और सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राएं जैसे अमेरिकी डॉलर, जापानी येन और स्विस फ्रैंक मजबूत होते हैं। अमेरिकी डॉलर को दुनिया की रिजर्व करेंसी होने और अमेरिकी सरकार के कर्ज के सुरक्षित होने का फायदा मिलता है। जापानी येन को घरेलू निवेशकों का समर्थन प्राप्त होता है जो संकट में भी बिकवाली नहीं करते, जबकि स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानून स्विस फ्रैंक को पूंजी सुरक्षा प्रदान करते हैं।

सवाल-जवाब

होर्मुज जलडमरूमध्य में क्या घटना हुई है?
अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े तीन तेल टैंकरों पर कार्रवाई की, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बनाया तथा क्षेत्र में नया प्रतिबंधित दायरा घोषित करने की बात कही।
कच्चे तेल की कीमत में कितना बदलाव आया है?
पिछले हफ्ते लगभग 8 प्रतिशत की बढ़त के बाद नए हफ्ते की शुरुआत में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1 प्रतिशत चढ़कर 90.00 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
AUD/USD और USD/JPY किस स्तर पर कारोबार कर रहे हैं?
AUD/USD 0.7200 के ऊपर मध्य मई के बाद के उच्चतम स्तर पर है, जबकि USD/JPY 155.50 के पास बना हुआ है।
रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ़ का क्या मतलब होता है?
रिस्क-ऑन माहौल में निवेशक आशावादी होकर शेयर और कमोडिटी जैसी जोखिम भरी संपत्तियां खरीदते हैं, जबकि रिस्क-ऑफ़ माहौल में सतर्क होकर डॉलर, येन और सरकारी बॉन्ड जैसी सुरक्षित संपत्तियों में पैसा लगाते हैं।
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