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बिहार की पारंपरिक काले तिल की चटनी से बढ़ाएं खाने का जायका, हफ्तों तक नहीं होती खराबखानपान
31 अग॰ 2026, 1:29 pm (52 मिनट पहले)· 3

बिहार की पारंपरिक काले तिल की चटनी से बढ़ाएं खाने का जायका, हफ्तों तक नहीं होती खराब

मिथिलांचल की पारंपरिक काले तिल की चटनी न केवल खाने का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। जानिए इसे महीनों तक ताज़ा रखने का आसान तरीका।

बिहार के मधुबनी और मिथिलांचल क्षेत्र में खान-पान की परंपरा बेहद समृद्ध मानी जाती है। यूं तो आपने कई प्रकार की चटनियां चखी होंगी, लेकिन काले तिल की चटनी का स्वाद और इसके फायदे बेहद खास होते हैं। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ लंबे समय तक खराब न होने वाला एक बेहतरीन व्यंजन है। यदि आप कभी व्यस्त हों और सब्ज़ी बनाने का समय न मिले, तो यह चटनी मिनटों में बनकर तैयार हो जाती है। इसे आप पराठे, दाल-चावल या मिथिलांचल के प्रसिद्ध दही-चूड़ा के साथ मजे से खा सकते हैं। इसके अलावा इसमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है।

पारंपरिक मिथिलांचल स्वाद और दादी-नानी का नुस्खा

मिथिलांचल के घरों में दही-चूड़ा का सेवन काफी लोकप्रिय है। अक्सर लोग मीठे के साथ कुछ नमकीन और चटपटा खाना पसंद करते हैं, जहां काले तिल की यह खास चटनी बिल्कुल सटीक बैठती है। पुराने समय में परिवार की बुजुर्ग महिलाएं और दादी-नानी इसे खास अंदाज में तैयार करती थीं। वीणा देवी बताती हैं कि इस चटनी को बनाने की विधि बहुत सरल है और इसे बनाने के दो अलग-अलग तरीके प्रचलित हैं। यदि इसे सिलबट्टे पर पीसा जाए तो यह 5 से 7 दिनों तक ताज़ा रहती है, जबकि ओखली में सूखी कूटकर बनाई गई चटनी एक महीने तक भी खराब नहीं होती।

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सिलबट्टे और मिक्सर से चटनी बनाने की आसान विधि

काले तिल की चटनी तैयार करने के लिए सबसे पहला कदम तिल को सही तरीके से भूनना यानी रोस्ट करना है। काले तिल में अपना प्राकृतिक तेल मौजूद होता है, इसलिए इसमें अलग से तेल की अधिक आवश्यकता नहीं पड़ती। तिल को भूनने के बाद सुखा लिया जाता है। यदि आप इसे 4 से 5 दिनों के भीतर खाने के लिए बना रहे हैं, तो भुने हुए तिल को मिक्सर जार या सिलबट्टे पर रखें। इसमें लहसुन की कलियां, हरी मिर्च, अदरक और स्वादानुसार नमक डालकर पीस लें। पीसने के बाद इसमें केवल आधा चम्मच कच्चा सरसों का तेल मिला दें। सिलबट्टे पर पिसी चटनी का दरदरापन और मिक्सर में पिसी चटनी की बनावट थोड़ी अलग होती है, लेकिन दोनों ही स्वाद में बेहतरीन होती हैं।

महीने भर चलने वाली सूखी चटनी और संरक्षण के नियम

अगर आप इस चटनी को 15 दिन, 20 दिन या एक महीने तक सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो इसकी सूखी विधि अपनाई जाती है। इसके लिए भुने हुए काले तिल को ओखली में मूसल से कूटें या मिक्सर में सूखा ही पीस लें। इस दौरान तिल में थोड़ा नमक, हरी मिर्च और अदरक मिलाएं। सूखे पिसे हुए मिश्रण में थोड़ा सा सरसों का तेल मिलाकर इसे कांच के जार में बंद करके रख दें। यह चटनी 20 दिनों से लेकर एक महीने तक बिल्कुल ताज़ा रहती है। हालांकि, सबसे ध्यान देने योग्य बात यह है कि लंबी शेल्फ लाइफ के लिए इसमें लहसुन बिल्कुल न मिलाएं। यदि इसमें लहसुन मिलाया जाता है, तो इसकी शेल्फ लाइफ घटकर केवल 2 से 3 दिन रह जाती है।

सवाल-जवाब

काले तिल की चटनी कितने दिनों तक खराब नहीं होती?
ओखली में सूखी कूटकर बनाई गई चटनी कांच के जार में 15 से 20 दिन या एक महीने तक खराब नहीं होती।
क्या इस चटनी में लहसुन मिलाने से इसकी शेल्फ लाइफ कम हो जाती है?
हां, चटनी में लहसुन मिलाने पर इसे केवल 2 से 3 दिनों के भीतर ही इस्तेमाल करना चाहिए।
काले तिल की चटनी खाने से क्या स्वास्थ्य लाभ होते हैं?
काले तिल में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
इस चटनी को किन-किन व्यंजनों के साथ खाया जा सकता है?
इसे दही-चूड़ा, दाल-चावल, पूड़ी और पराठों के साथ खाया जा सकता है।
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