आइजोल: मिजोरम में मादक पदार्थों की लत के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के तहत वर्तमान में कुल 48 केंद्र और होम संचालित किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इन सुविधाओं के माध्यम से इस समय 5,224 लोग ड्रग्स की लत से उबरने के लिए उपचार, देखभाल और पुनर्वास सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। राज्य सरकार इन संस्थानों के कामकाज को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
वित्तीय सहायता और सरकारी सहयोग
नशे के खिलाफ इस लड़ाई को मजबूत करने के वास्ते राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान इन सभी सुविधाओं को 42 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस आर्थिक मदद का उद्देश्य पुनर्वास केंद्रों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना और वहां आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना है ताकि वे सामान्य जीवन की तरफ लौट सकें।
हुलह्लियाप डिटॉक्सिफिकेशन सेंटर की भूमिका
इसके अलावा, मिजोरम में हुलह्लियाप नाम से एक विशेष अल्पकालिक डिटॉक्सिफिकेशन सेंटर भी स्थापित किया गया है, जहां अब तक 2,255 लोग अपना इलाज करा चुके हैं। पिछले साल जून में इस केंद्र के शुरू होने के बाद से यहां कुल नौ बैचों ने अपना निर्धारित कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया है। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने इन नौ बैचों के संचालन पर अब तक 3.86 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है। इसके साथ ही, इस केंद्र को अन्य स्रोतों से 1.34 लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्राप्त हुई है।
क्षमता और उपचार की प्रक्रिया
यह विशेष डिटॉक्सिफिकेशन केंद्र एक बार में लगभग 200 मरीजों को ठहराने की क्षमता रखता है। केंद्र में आने वाले लोगों को शुरुआत के 15 दिनों तक डॉक्टरों, नर्सों और काउंसलर की देखरेख में डिटॉक्सिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके बाद उन्हें विशेष आध्यात्मिक काउंसलिंग दी जाती है ताकि उनकी मानसिक स्थिति मजबूत हो सके।
आगे की प्रक्रिया और पुनर्वास
हुलह्लियाप केंद्र में निर्धारित कार्यक्रम पूरा होने के बाद मरीजों को या तो उनके परिजनों को सौंप दिया जाता है या फिर आगे की देखभाल और सहायता के लिए अन्य पुनर्वास केंद्रों में भेज दिया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है ताकि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकाला जा सके।





















