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नाइजीरिया में स्टेबलकॉइन का तेज़ी से बढ़ता इस्तेमाल, IMF ने चेताया कि जोखिम अब और भी साफ़ दिखने लगे हैंबाज़ार
16 जून 2026, 8:20 pm (45 दिन पहले)· 4

नाइजीरिया में स्टेबलकॉइन का तेज़ी से बढ़ता इस्तेमाल, IMF ने चेताया कि जोखिम अब और भी साफ़ दिखने लगे हैं

International Monetary Fund की एक नई रिपोर्ट कहती है कि नाइजीरिया में डॉलर से जुड़े स्टेबलकॉइन के तेज़ी से अपनाए जाने ने इनके फ़ायदे तो दिखाए हैं, पर साथ ही मौद्रिक संप्रभुता और वित्तीय अखंडता पर जोखिम भी और गहरे कर दिए हैं।

नाइजीरिया में डॉलर से जुड़े क्रिप्टो एसेट यानी स्टेबलकॉइन जिस रफ़्तार से लोगों के बीच पहुँचे हैं, उसने एक साथ दो बातें उजागर कर दी हैं। एक तरफ़ इन डिजिटल एसेट के असली फ़ायदे सामने आए हैं, तो दूसरी तरफ़ इनसे जुड़े ख़तरे भी पहले से कहीं ज़्यादा साफ़ नज़र आने लगे हैं। यह बात International Monetary Fund की एक ताज़ा रिपोर्ट में कही गई है।

आँकड़े क्या बता रहे हैं

IMF के शोधकर्ताओं का कहना है कि स्टेबलकॉइन अब सीमा पार भुगतान का एक ठोस और मायने रखने वाला ज़रिया बन चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई 2023 से जून 2024 के बीच नाइजीरिया में करीब $59 billion का क्रिप्टो एसेट इनफ़्लो दर्ज हुआ। इतना ही नहीं, 2019 के बाद से उप सहारा अफ़्रीका में आए कुल स्टेबलकॉइन इनफ़्लो का 60% हिस्सा अकेले इसी देश के खाते में जाता है।

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फ़ायदे, जिन्हें IMF भी मानता है

रिपोर्ट इस बात से इनकार नहीं करती कि स्टेबलकॉइन अपने साथ साफ़ फ़ायदे लेकर आते हैं। इनमें वित्तीय समावेशन यानी ज़्यादा लोगों तक बैंकिंग जैसी सुविधाओं की पहुँच और सीमा पार भुगतान का सस्ता होना शामिल है। इसी वजह से ये पारंपरिक रेमिटेंस यानी विदेश से पैसे भेजने के पुराने रास्तों को पीछे छोड़ते जा रहे हैं।

असली चिंता कहाँ है

लेकिन IMF ने दो बड़ी चिंताएँ गिनाई हैं, मौद्रिक संप्रभुता और वित्तीय अखंडता। रिपोर्ट का कहना है कि डॉलर से जुड़े स्टेबलकॉइन दरअसल डॉलरीकरण का एक डिजिटल रूप बन सकते हैं, जिससे देश की अपनी मौद्रिक नीति कमज़ोर पड़ सकती है। साथ ही, पारंपरिक वित्तीय निगरानी तंत्र इन लेनदेन को ठीक से पकड़ नहीं पाते, और इनमें मिलने वाली गुमनामी अवैध वित्त यानी ग़ैरक़ानूनी पैसों के लेनदेन का ख़तरा बढ़ा देती है।

रोकने की कोशिश का फ़ायदा कम

रिपोर्ट इस पर भी दो टूक है कि स्टेबलकॉइन के इस्तेमाल को दबाने की कोशिशें ज़्यादा कारगर साबित नहीं होंगी। इसके शब्दों में,

“स्टेबलकॉइन के इस्तेमाल को दबाने की कोशिशें शायद सिर्फ़ आंशिक रूप से ही असरदार रहेंगी।”
इसके बजाय रिपोर्ट एक व्यावहारिक रवैया अपनाने की सलाह देती है, जो जोखिमों को संभालते हुए नवाचार के लिए जगह छोड़े।

IMF की सुझाई राह

रिपोर्ट के लेखकों ने डिजिटल डॉलरीकरण से निपटने के लिए मौद्रिक स्थिरता की रक्षा करने पर ज़ोर दिया है, और हाल के व्यापक आर्थिक सुधारों तथा सख़्त मौद्रिक नीति की तारीफ़ की है। जोखिम संभालने के बाक़ी उपायों में निगरानी को मज़बूत करना, ब्लॉकचेन एनालिटिक्स को naira से स्टेबलकॉइन में बदलाव की रिपोर्टिंग के साथ जोड़कर बेहतर डेटा तैयार करना, और मौजूदा भुगतान ढाँचे को इस तरह उन्नत करना शामिल है कि स्टेबलकॉइन जैसे ग़ैर नियंत्रित ज़रियों पर निर्भरता घटे।

पहले भी रही है यही चेतावनी

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब IMF ने स्टेबलकॉइन पर सवाल उठाए हों। बीते कई वर्षों से यह संस्था बार बार आगाह करती रही है कि ये एसेट केंद्रीय बैंक के नियंत्रण को कमज़ोर कर सकते हैं और किसी वित्तीय संकट को और गहरा बना सकते हैं। पिछले हफ़्ते ही इस वैश्विक वित्तीय संस्था ने नेपाल में क्रिप्टो के बढ़ते इस्तेमाल पर नज़दीकी निगरानी की अपील की थी, और पूँजी नियंत्रण से बचने तथा बड़े पैमाने पर जमा राशि के बाहर जाने जैसे ख़तरों की ओर इशारा किया था।

सवाल-जवाब

जुलाई 2023 से जून 2024 के बीच नाइजीरिया में कितना क्रिप्टो इनफ़्लो आया?
रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में नाइजीरिया में करीब $59 billion का क्रिप्टो एसेट इनफ़्लो दर्ज हुआ।
उप सहारा अफ़्रीका में नाइजीरिया की हिस्सेदारी कितनी है?
2019 के बाद से इस क्षेत्र में आए कुल स्टेबलकॉइन इनफ़्लो का 60% हिस्सा अकेले नाइजीरिया के खाते में जाता है।
IMF किन जोखिमों को लेकर चिंतित है?
IMF मुख्य रूप से मौद्रिक संप्रभुता और वित्तीय अखंडता को लेकर चिंतित है, जिसमें डिजिटल डॉलरीकरण और अवैध वित्त का ख़तरा शामिल है।
क्या IMF स्टेबलकॉइन पर रोक लगाने की सलाह देता है?
नहीं, रिपोर्ट कहती है कि रोकने की कोशिशें सिर्फ़ आंशिक रूप से असरदार होंगी और इसके बजाय जोखिम संभालते हुए नवाचार की जगह छोड़ने वाला व्यावहारिक रवैया अपनाने की सलाह देती है।
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