वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों के अलग अलग संकेतों के चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड में मजबूती दर्ज की जा रही है। एक तरफ जहां बाजार यह मानकर चल रहे हैं कि फेडरल रिजर्व अक्टूबर की बैठक में अपनी नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, वहीं दूसरी ओर बैंक ऑफ इंग्लैंड से जुलाई 2027 तक चार बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद लगाई जा रही है। नीतिगत प्राथमिकताओं में यह विरोधाभास पाउंड को सहारा दे रहा है, जबकि निवेशक ब्रिटेन के आगामी बजट पर भी करीबी नजर रख रहे हैं ताकि राजकोषीय अनुशासन से ब्रिटिश गिल्ट्स यानी सरकारी बॉन्ड की मांग मजबूत हो सके।
तकनीकी स्तरों पर पाउंड डॉलर जोड़ी की स्थिति
दैनिक चार्ट पर नजर डालें तो जीबीपी/यूएसडी जोड़ी फिलहाल 1.3310 के आसपास कारोबार कर रही है। मौजूदा कारोबारी स्तर 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए के नीचे और नौ दिवसीय ईएमए के ऊपर बना हुआ है, जिससे अल्पकालिक रुझान हल्का नकारात्मक बना हुआ है। 14 दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 51.26 के स्तर पर मौजूद है, जो बाजार के लगभग निष्पक्ष क्षेत्र में होने का संकेत देता है। यह किसी बहुत मजबूत एकतरफा रुझान के बजाय कीमतों में ठहराव और सीमित दायरे में ट्रेडिंग की ओर इशारा करता है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, इस समय जोड़ी का भाव 1.3300 के आसपास केंद्रित है और 52 हफ्तों का दायरा 1.3000 से 1.3800 के बीच रहा है।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, तेजी की स्थिति में तत्काल प्रतिरोध 50 दिवसीय ईएमए पर 1.3349 के स्तर पर बना हुआ है। जब तक दैनिक आधार पर कैंडल इस स्तर के ऊपर बंद नहीं होती, तब तक मंदी का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं होगा और एक मजबूत रिकवरी की जमीन तैयार नहीं होगी। दूसरी तरफ, नीचे की ओर नौ दिवसीय ईएमए 1.3277 पर शुरुआती समर्थन दे रहा है। यदि यह स्तर नीचे की ओर टूटता है, तो विक्रेताओं की पकड़ फिर से मजबूत हो सकती है और जोड़ी हालिया सुधारात्मक गिरावट को और आगे बढ़ा सकती है। अतिरिक्त संकेतकों में बोलिंजर बैंड्स 1.3200 से 1.3300 के बीच सिमटे हैं और 14 दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज लगभग 0.01 पर है, जिससे पता चलता है कि दैनिक अस्थिरता अभी नियंत्रित दायरे में है।
फेडरल रिजर्व की नीति और केविन वार्श की टिप्पणी का असर
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने हाल ही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लचीलेपन पर संतोष व्यक्त किया था, लेकिन उन्होंने आने वाले समय में ब्याज दरों में संभावित बदलाव को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। बाजार ने इस सतर्क रुख को तुरंत भांप लिया है। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि वायदा बाजार के कारोबारी अक्टूबर की आगामी बैठक में ब्याज दरों के स्थिर रहने की पूरी संभावना देख रहे हैं। हालांकि, इसके साथ ही दिसंबर की नीतिगत बैठक में ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना 82.8 प्रतिशत आंकी जा रही है।
भाषणों के भावना विश्लेषण में केविन वार्श के वक्तव्य को 10 में से 5.6 का स्कोर दिया गया, जो उनके ऐतिहासिक औसत 6.1 की तुलना में थोड़ा नरम माना जा सकता है। वार्श ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक मजबूती और निवेश की तेज रफ्तार का जिक्र जरूर किया, लेकिन वैश्विक वित्तीय संकट के गहरे अनुभवों का हवाला देकर उन्होंने यह साफ कर दिया कि केंद्रीय बैंक किसी भी तरह के जोखिम से पूरी तरह सतर्क है। अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों पर किसी निश्चित फैसले से लगातार बचने के कारण डॉलर के भविष्य के रास्ते पर एक तरह की अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि वार्श ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पूंजीगत निवेश आधारित आर्थिक विस्तार और वैश्विक प्रभावों पर सकारात्मक राय रखी, लेकिन उनके भाषण में ऐसा कोई नया बिंदु नहीं था जो तत्काल ब्याज दरों के अनुमानों को पूरी तरह बदल दे।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की रणनीति और गिल्ट बाजार की हलचल
ब्रिटिश पाउंड के पक्ष में सबसे बड़ा कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड की आगामी मौद्रिक नीति का अनुमान है। वित्तीय बाजारों का आकलन है कि यूके का केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए जुलाई 2027 तक ब्याज दरों में चार बार तक बढ़ोतरी कर सकता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड का प्राथमिक लक्ष्य कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और खुदरा महंगाई को करीब दो प्रतिशत के दायरे में सीमित रखना है। जब भी मुद्रास्फीति इस लक्ष्य से ऊपर निकलती है, केंद्रीय बैंक ऋण को महंगा करने के लिए दरों में इजाफा करता है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए ब्रिटेन की संपत्तियां आकर्षक बन जाती हैं और पाउंड को सीधा समर्थन मिलता है।
इसके साथ ही, बाजार में यूके के आगामी वार्षिक बजट को लेकर भी काफी उत्सुकता है। ट्रेडर्स और संस्थागत निवेशकों का मानना है कि यदि सरकार सख्त राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने का खाका पेश करती है, तो इससे ब्रिटिश सॉवरेन बॉन्ड यानी गिल्ट्स पर भरोसा बढ़ेगा। मजबूत वित्तीय प्रबंधन से सरकारी उधारी का जोखिम कम होता है, जिससे वैश्विक पूंजी यूके के डेट मार्केट की ओर आकर्षित होती है और घरेलू मुद्रा की विनिमय दर को आधार मिलता है।
पाउंड स्टर्लिंग का ऐतिहासिक महत्व और वैश्विक कारोबार
पाउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा मानी जाती है, जिसका इतिहास वर्ष 886 से जुड़ा हुआ है। यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है और दुनिया के विदेशी मुद्रा बाजार में चौथी सबसे ज्यादा कारोबार की जाने वाली इकाई है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा लेन देन में पाउंड की हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत है, जिसका दैनिक टर्नओवर औसतन 630 अरब डॉलर का है।
मुद्रा बाजार में इसके प्रमुख जोड़ों में सबसे महत्वपूर्ण जीबीपी/यूएसडी है, जिसे ट्रेडर्स प्यार से केबल कहते हैं और यह कुल विदेशी मुद्रा बाजार का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा जीबीपी/जेपीवाई, जिसे बाजार में ड्रैगन नाम से पुकारा जाता है, करीब 3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जबकि यूरो और पाउंड का क्रॉस ईयूआर/जीबीपी लगभग 2 प्रतिशत कारोबार दर्ज करता है। पाउंड की दिशा तय करने में यूके के सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई आंकड़े, रोजगार की स्थिति और व्यापार संतुलन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब देश का निर्यात मजबूत होता है और व्यापार अधिशेष बनता है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा पाउंड की मांग बढ़ जाती है, जिससे मुद्रा और मजबूत होती है।
अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं का हाल
विदेशी मुद्रा बाजार में केवल पाउंड ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रमुख संपत्तियों में भी तेज हलचल देखने को मिल रही है। जोखिम लेने की निवेशकों की भूख सुधरने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दो दिनों की बढ़त दर्ज की है और यह 0.50 प्रतिशत से अधिक उछलकर 0.6980 के स्तर पर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया की मुद्रा को चीन के मजबूत जीडीपी और खुदरा बिक्री के आंकड़ों से भी काफी समर्थन मिला है, क्योंकि चीन ऑस्ट्रेलियाई निर्यातों का सबसे बड़ा बाजार है।
वहीं दूसरी ओर, एशियाई कारोबारी सत्र में यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के स्तर के पास दबाव में दिखाई दिया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हालिया गिरावट के चलते अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के निचले स्तर के करीब सुस्त बना रहा। साथ ही, बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा के सख्त रुख और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी दखल के अंदेशे ने जापानी येन को सहारा दिया। हालांकि, दिसंबर में फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की 82.8 प्रतिशत संभावना और वैश्विक भू राजनीतिक चिंताओं के कारण डॉलर की गिरावट पर एक हद तक लगाम भी लगी हुई है।
कमोडिटी बाजार में सोने के भाव शुरुआती एशियाई सत्र के दौरान गिरकर करीब 4,135 डॉलर प्रति औंस पर आ गए। ऊर्जा की गिरती कीमतों के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों पर टिके रहने से पीली धातु पर बिकवाली का दबाव देखा गया। अमेरिका में हाल ही में जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई और उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी पीपीआई दोनों में ही मूल्य दबाव में तेज बढ़ोतरी देखी गई थी। इन महंगाई आंकड़ों ने इस चिंता को फिर से हवा दे दी है कि फेडरल रिजर्व को अपनी सख्त मौद्रिक नीति उम्मीद से अधिक समय तक जारी रखनी पड़ सकती है, जिससे इक्विटी बाजारों और सोने दोनों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
















