उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच छिड़ा पारिवारिक और कानूनी विवाद लगातार गहराता जा रहा है. देहरादून में गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने सोमवार को कैबिनेट मंत्री के आवास पहुंचकर उनका विस्तृत बयान दर्ज किया. जांच टीम ने मामले से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग को अपने कब्जे में लेकर फॉरेंसिक पड़ताल के लिए सुरक्षित रख लिया है. पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने प्राथमिकी में दर्ज सभी बिंदुओं, शादी से पहले पिछली शादी की जानकारी छिपाने और कारोबारी दस्तावेजों में जाली हस्ताक्षरों से जुड़ी हेराफेरी पर कई अहम जानकारियां जुटाईं.
दर्ज प्राथमिकी और संगीन आरोपों की फेहरिस्त
यह कानूनी टकराव 15 अक्तूबर को उस समय सार्वजनिक हुआ जब रेखा आर्या ने देहरादून के कैंट पुलिस थाने में अपने पति के खिलाफ औपचारिक शिकायत दी. इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने घरेलू हिंसा, शारीरिक मारपीट, मानसिक प्रताड़ना, जातिसूचक अपशब्दों का प्रयोग, जालसाजी और जान से मारने की धमकी जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा कायम किया था. मंत्री का आरोप है कि गिरधारी लाल साहू ने अपनी पूर्व वैवाहिक स्थिति को पूरी तरह छिपाकर उनसे विवाह रचाया था. जब उन्होंने इस धोखे का विरोध किया, तो उनके साथ कथित तौर पर हिंसक बर्ताव किया गया, गालियां दी गईं और जान से मारने की धमकियां दी गईं. इसके अतिरिक्त शासकीय आवास में तैनात कर्मचारियों के सामने अपमानजनक जातिसूचक टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया गया है.
आरोपों पर पति का पलटवार और 210 करोड़ का दावा
दूसरी तरफ, गिरधारी लाल साहू ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उनका दावा है कि जिस कथित बातचीत के ऑडियो के आधार पर उन पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, वह आधुनिक एआई तकनीक के जरिए तैयार किया गया एक फर्जी रिकॉर्ड है. साहू ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाई है. इसके साथ ही उन्होंने अपनी मंत्री पत्नी पर पलटवार करते हुए गंभीर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप मढ़े हैं. साहू ने दावा किया है कि रेखा आर्या के पास करीब 210 करोड़ रुपये की अनुपातहीन और अवैध संपत्ति मौजूद है, जिसकी स्वतंत्र जांच एजेंसियों से पड़ताल कराई जानी चाहिए.
पुराने विवादों और मामलों से जुड़ा इतिहास
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद के निवासी गिरधारी लाल साहू का प्रभाव बरेली के व्यापारिक तथा राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ उत्तराखंड में भी रहा है. वर्ष 1990 में वह बरेली नगर में सभासद चुने गए थे. उनका नाम पूर्व में भी गंभीर विवादों से जुड़ता रहा है. इनमें सबसे पुराना प्रकरण 11 जून 1990 का है, जब बरेली के प्रमुख कारोबारी नरेश जैन और उनकी धर्मपत्नी पुष्पा जैन की हत्या कर दी गई थी. इस चर्चित जैन दंपत्ति हत्याकांड का मामला वर्तमान में भी अदालत में विचाराधीन है. इसके अलावा उनके एक भूतपूर्व कर्मचारी ने साहू पर अवैध रूप से किडनी निकलवाने का भी गंभीर आरोप लगाया था. अब एसआईटी मंत्री के दर्ज बयानों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है.
























