फिलीपींस के नीति नियंताओं के सामने महंगाई को नियंत्रित करने की चुनौती एक बार फिर गंभीर होती दिख रही है। बढ़ती मुद्रास्फीति, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फिलीपीन पेसो में आई गिरावट के चलते देश का केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरों में नई बढ़ोतरी कर सकता है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के अर्थशास्त्री जोनाथन कोह और एडवर्ड ली का अनुमान है कि बैंको सेंट्रल एनजी पिलिपिनास (BSP) अक्टूबर की अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25% कर सकता है। पहले बैंक द्वारा ब्याज दरों को यथावत रखने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन हालिया आर्थिक परिस्थितियों ने इस रुख में बदलाव ला दिया है।
मुद्रास्फीति का दबाव और केंद्रीय बैंक का बदला नजरिया
अर्थशास्त्रियों के अनुसार सितंबर के दौरान व्यापक स्तर पर महंगाई में तेजी देखी गई है। कोर इन्फ्लेशन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि बुनियादी वस्तुओं और सेवाओं की लागत बढ़ रही है। इसके साथ ही ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल के भाव में दोबारा तेजी देखने को मिली है, जिसका सीधा असर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। दूसरी ओर घरेलू मुद्रा फिलीपीन पेसो की कमजोरी ने आयातित वस्तुओं को और महंगा बना दिया है। इन सभी कारणों ने केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसलों के लिए सख्त रुख अपनाना आवश्यक बना दिया है।
जोनाथन कोह और एडवर्ड ली ने स्थिति का आकलन करते हुए कहा कि सितंबर की बैठक में फेड द्वारा दरें बढ़ाए जाने और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक सख्ती जारी रखने से फिलीपींस में भी एक नपी-तुली बढ़ोतरी का आधार मजबूत हुआ है, भले ही देश की समग्र आर्थिक वृद्धि फिलहाल सुस्त बनी हुई हो। इसी पृष्ठभूमि में विश्लेषकों ने वर्ष 2026 के अंत तक के लिए अपने नीतिगत ब्याज दर के पूर्वानुमान को 5.00% से संशोधित करके 5.25% कर दिया है।
राहत की संभावना और मौद्रिक ढील की समयसीमा
ब्याज दरों में तत्काल राहत की उम्मीद कर रहे बाजारों के लिए विश्लेषकों का मानना है कि नरमी का दौर शुरू होने में अभी लंबा वक्त लग सकता है। पूर्वानुमान के मुताबिक जब तक मुद्रास्फीति घटकर निर्धारित लक्ष्य दायरे में नहीं आ जाती, तब तक केंद्रीय बैंक सख्त रुख बनाए रखेगा। बैंक को उम्मीद है कि महंगाई के तय दायरे में लौटने के बाद 2027 की तीसरी तिमाही (Q3-2027) से नीतिगत दरों में कटौती या मौद्रिक ढील की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। तब तक उच्च ब्याज दरों का दौर अर्थव्यवस्था में मांग और मूल्य वृद्धि को संतुलित करने के लिए जारी रहने के आसार हैं।
वैश्विक मुद्रा बाजारों में डॉलर की मजबूती और अन्य मुद्राओं का हाल
फिलीपींस के घटनाक्रम के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड्स का असर साफ दिखाई दे रहा है। मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) जोड़ी में नरमी दर्ज की गई, जिससे पिछले हफ्ते दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई दो दिवसीय रिकवरी पर ब्रेक लग गया। फिक्स्ड इनकम बाजार में बिकवाली जारी रहने से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब बनी हुई हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के साथ मिलकर यह स्थिति अमेरिकी डॉलर को मजबूत बनाए रखने में मदद कर रही है, भले ही अक्टूबर में फेड द्वारा दरों में और बढ़ोतरी की संभावनाएं कुछ कम हुई हों। हालांकि इस महीने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दर में एक और बढ़ोतरी की संभावना ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कुछ सहारा दे सकती है।
दूसरी ओर जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) मंगलवार को यूरोपीय सुबह के सत्र में 158.00 के स्तर से ऊपर निकल गया। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की ओर से सख्त रुख की संभावनाओं और संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद जापानी मुद्रा को कोई खास मजबूती नहीं मिल पा रही है। जापान के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों के आने से पहले और केंद्रीय बैंक की अस्पष्ट समयसीमा के बीच मुद्रा 158.00 के आसपास डोल रही है।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार की हलचल
कमोडिटी बाजार में सोने ने सोमवार की मामूली बढ़त को आगे बढ़ाया, हालांकि मंगलवार को पीली धातु प्रति ट्रॉय औंस $4,200 के अहम स्तर को दोबारा हासिल करने के लिए संघर्ष करती नजर आई। सोने में यह बढ़त अमेरिकी डॉलर में नए सिरे से आई कमजोरी और ट्रेजरी यील्ड्स में आई गिरावट के चलते देखने को मिली।
डिजिटल एसेट बाजार में बिटकॉइन ने अपनी मजबूती बरकरार रखी और मंगलवार को $85,837 के आसपास कारोबार किया, जहां बिकवाल बाजार पर नियंत्रण पाने का प्रयास करते दिखे। वहीं अन्य क्रिप्टोकरेंसीज में बिटकॉइन के दायरे का ही असर दिखा, जिसमें एथेरियम $2,700 के ऊपर सपाट रहा और रिपल $1.50 के महत्वपूर्ण स्तर के इर्द-गिर्द घूमता रहा।
यूरोपीय केंद्रीय बैंक के सामने जटिल चुनौती
यूरोप में मौद्रिक नीति का परिदृश्य और भी जटिल बना हुआ है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति अपने लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) के पास ब्याज दरें बढ़ाने का सीधा रास्ता होता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं। बॉन्ड बाजार में यील्ड्स की तेजी पहले से ही अर्थव्यवस्था पर सख्ती का काम कर रही है, जिससे ECB के सामने एक बेहद कठिन असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है कि आगे ब्याज दरों को लेकर क्या कदम उठाया जाए।
















