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रेमंड के इंजीनियरिंग बिजनेस पर भरोसा बढ़ा, फंडरेजिंग बैठक से पहले शेयर छह महीने में दोगुने से ज्यादा उछलाबाज़ार
7 सित॰ 2026, 9:40 pm (50 मिनट पहले)· 2

रेमंड के इंजीनियरिंग बिजनेस पर भरोसा बढ़ा, फंडरेजिंग बैठक से पहले शेयर छह महीने में दोगुने से ज्यादा उछला

रेमंड के शेयर 7 सितंबर को 52 हफ्तों के नए हाई पर पहुंच गए और 4.22% चढ़कर 772.80 रुपये पर बंद हुए, ठीक एक दिन पहले जब कंपनी का बोर्ड फंडरेजिंग प्रस्ताव पर बैठक करने वाला है। बीते छह महीनों में शेयर करीब 103% उछल चुका है, क्योंकि निवेशकों की नजर अब कंपनी के तेजी से बढ़ते एयरोस्पेस और प्रिसिजन इंजीनियरिंग कारोबार पर टिक गई है।

सोमवार, 7 सितंबर को रेमंड के शेयरों ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरीं। कंपनी का स्टॉक 52 हफ्तों के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि पूरा बाजार उस दिन कमजोर रुख में कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान शेयर 789 रुपये तक चढ़ा और आखिर में 4.22% की बढ़त के साथ 772.80 रुपये पर बंद हुआ। इस तेजी पर निवेशकों की नजर इसलिए भी टिकी है क्योंकि ठीक अगले दिन कंपनी की एक अहम बोर्ड बैठक होने वाली है।

शेयर बाजार की भाषा में किसी स्टॉक को तभी मल्टीबैगर कहा जाता है जब वह निवेशकों के पैसे को कई गुना बढ़ा दे, और रेमंड ने हाल की रैली से यह तमगा आसानी से हासिल कर लिया है। 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने का मतलब है कि शेयर बीते एक साल के अपने हर बंद और इंट्राडे भाव से ऊपर निकल चुका है, यानी एक ऐसा तकनीकी संकेत जो कमजोर बाजार में भी नई खरीदारी को आकर्षित करता है।

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फंडरेजिंग पर बोर्ड बैठक से तय होगी अगली दिशा

रेमंड के निदेशक मंडल की बैठक मंगलवार, 8 सितंबर को होनी है, जिसमें नई पूंजी जुटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। कंपनी पहले ही शेयर बाजारों को बता चुकी है कि वह इक्विटी शेयर, कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज, वारंट या किसी अन्य अनुमति प्राप्त माध्यम से पूंजी जुटा सकती है। अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि रास्ता कौन सा चुना जाएगा, लेकिन विकल्पों में राइट्स इश्यू, प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट या कानूनन मान्य कोई अन्य तरीका शामिल है।

वारंट को आसान भाषा में समझें तो यह निवेशक को तय समय के भीतर, पहले से तय कीमत पर शेयरों में बदलने का अधिकार देता है, और कंपनियां अक्सर इसका इस्तेमाल एक साथ नहीं बल्कि चरणों में पूंजी जुटाने के लिए करती हैं। अब तक कंपनी ने न तो जुटाई जाने वाली रकम बताई है और न ही यह स्पष्ट किया है कि पैसे का इस्तेमाल किस मकसद के लिए होगा, यही वजह है कि मंगलवार का फैसला निवेशकों के लिए इतना अहम है।

मौजूदा शेयरधारकों के लिए तरीका क्यों मायने रखता है

रेमंड आखिरकार जो भी रास्ता चुनेगी, उसी से तय होगा कि मौजूदा निवेशकों पर इसका क्या असर पड़ेगा। प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट में चुनिंदा खरीदारों को नए शेयर जारी किए जाते हैं, और वारंट का नया इश्यू भी कीमत व शर्तों के आधार पर मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी को घटा (डाइल्यूट) सकता है। राइट्स इश्यू इससे अलग है, क्योंकि इसमें मौजूदा शेयरधारकों को अपनी हिस्सेदारी के अनुपात में नए शेयर खरीदने का पहला अधिकार मिलता है, जिससे वे चाहें तो अपनी हिस्सेदारी बचाए रख सकते हैं। जब तक बोर्ड बैठक नहीं हो जाती और फैसला सामने नहीं आता, डाइल्यूशन बनाम भागीदारी का यह सवाल ही शेयर पर सबसे बड़ी अनिश्चितता बना हुआ है।

कमजोर बाजार में भी सबसे तेज दौड़ने वाला शेयर

रेमंड की रैली को खास बनाने वाली बात यह है कि यह पूरी तेजी शेयर बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच आई है। बीते सिर्फ छह महीनों में स्टॉक करीब 103% उछल चुका है, जिसने इसे बाजार के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल कर दिया है। अगर समयसीमा और पीछे खींचें तो 30 मार्च को दर्ज हुए 320.40 रुपये के 52-हफ्ते के निचले स्तर से अब तक शेयर करीब 141% चढ़ चुका है।

इतनी बड़ी तेजी बिना किसी बुनियादी बदलाव के शायद ही आती है, और रेमंड भी इसका अपवाद नहीं है। यह रैली कंपनी के पुनर्गठन के साथ-साथ चली है, जिसने बाजार के कंपनी को देखने के नजरिए को ही बदल दिया है। रेमंड की पहचान कभी मुख्य रूप से टेक्सटाइल और ब्रांडेड लाइफस्टाइल कारोबार वाले समूह की थी, लेकिन अब निवेशक इसे इंजीनियरिंग केंद्रित कारोबार में इसकी मौजूदगी के लिहाज से कहीं ज्यादा गंभीरता से परख रहे हैं। यही बदलाव शेयर के मूल्यांकन को नए सिरे से गढ़ता दिख रहा है, जिससे यह भी समझ आता है कि निवेशक अब रेमंड की तुलना टेक्सटाइल कंपनियों की बजाय इंजीनियरिंग और औद्योगिक कंपनियों से करने लगे हैं।

तिमाही आंकड़ों ने भी दिया भरोसे को सहारा

कंपनी के हालिया नतीजों ने इस बदलती कहानी को और मजबूत किया है। रेमंड ने FY27 की पहली तिमाही में 628 करोड़ रुपये की कुल आय दर्ज की, जो एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 13% ज्यादा है। कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर 14% बढ़कर 100 करोड़ रुपये हो गया, जबकि EBITDA मार्जिन 20 बेसिस पॉइंट्स सुधरकर 15.9% पर पहुंच गया। आय में तेजी के साथ मार्जिन में भी सुधार होना आमतौर पर यह संकेत देता है कि कंपनी सिर्फ कारोबार ही नहीं बढ़ा रही, बल्कि लागत और परिचालन दक्षता को भी बेहतर ढंग से संभाल रही है, और यही मेल किसी एक बार की उछाल के बजाय लगातार बने रहने वाली निवेशक दिलचस्पी की वजह बनता है।

एयरोस्पेस और प्रिसिजन इंजीनियरिंग कारोबार बने सबसे चमकते सितारे

निर्मल बंग के मुताबिक, रेमंड के एयरोस्पेस और प्रिसिजन इंजीनियरिंग कारोबार ने इस तिमाही में अब तक की अपनी सबसे ज्यादा तिमाही आय दर्ज की। किसी एक अकेले ऐलान से कहीं ज्यादा, यही प्रदर्शन कंपनी के लंबी अवधि के ग्रोथ को लेकर बाजार का भरोसा बढ़ा रहा है। फंडरेजिंग पर बोर्ड बैठक अब सिर्फ एक दिन दूर है, ऐसे में रेमंड आगे की ग्रोथ के लिए पूंजी कैसे जुटाती है, इस पर उन सभी निवेशकों की करीबी नजर रहेगी जो इस रैली में अब तक बने हुए हैं।

सवाल-जवाब

7 सितंबर को रेमंड का शेयर किस भाव तक पहुंचा?
स्टॉक कारोबार के दौरान 789 रुपये तक चढ़ा और 4.22% की बढ़त के साथ 772.80 रुपये पर बंद हुआ।
8 सितंबर की बोर्ड बैठक किस बारे में है?
बोर्ड इक्विटी शेयर, कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज, वारंट या अन्य अनुमति प्राप्त माध्यमों से पूंजी जुटाने के प्रस्ताव पर विचार करेगा।
हाल में रेमंड का शेयर कितना बढ़ा है?
बीते छह महीनों में शेयर करीब 103% और 30 मार्च के 320.40 रुपये के 52-हफ्ते के निचले स्तर से करीब 141% चढ़ चुका है।
क्या फंडरेजिंग से मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी घट सकती है?
हां, प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट या वारंट इश्यू से हिस्सेदारी घट सकती है, जबकि राइट्स इश्यू में मौजूदा शेयरधारकों को भाग लेने का मौका मिलता है।
रेमंड के FY27 की पहली तिमाही के नतीजे कैसे रहे?
कुल आय 628 करोड़ रुपये रही, जो सालाना आधार पर 13% ज्यादा है, EBITDA 14% बढ़कर 100 करोड़ रुपये और मार्जिन 20 बेसिस पॉइंट्स सुधरकर 15.9% हो गया।
कौन से कारोबार निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा रहे हैं?
निर्मल बंग के मुताबिक, रेमंड के एयरोस्पेस और प्रिसिजन इंजीनियरिंग कारोबार ने अपनी अब तक की सबसे ज्यादा तिमाही आय दर्ज की।
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