गणपति, नवरात्रि और दिवाली नजदीक आते ही इस बार मिठाई खरीदना जेब पर थोड़ा भारी पड़ सकता है। मिठाई कारोबारी खुदरा दामों में 10-15% तक की बढ़ोतरी की तैयारी कर रहे हैं, ठीक उसी वक्त जब त्योहारी मांग बढ़नी शुरू हुई है और घरों से लेकर दुकानों तक मिठाई की खरीद तेज हो रही है।
चीनी की कीमतों ने बढ़ाई सबसे ज्यादा टेंशन
मिठाई उद्योग के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता चीनी की कीमत बनी हुई है। महाराष्ट्र के कुछ बाजारों में खुदरा चीनी का दाम 65 रुपये प्रति किलो के पार जा चुका है। कारोबारियों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में सप्लाई कम होने और त्योहारी मांग बढ़ने की वजह से चीनी के दाम 35% से भी ज्यादा बढ़ गए हैं, ठीक उसी दौर में जब हलवाई त्योहारी सीजन के लिए स्टॉक जमा करना शुरू करते हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि मिल स्तर पर चीनी की कीमतें घटी हैं और यह राहत धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंच सकती है, लेकिन यह बदलाव तुरंत नहीं दिखेगा।
चीनी की किल्लत की असली वजह
इस सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जो उम्मीद से कम है। इसके अलावा करीब 30 लाख टन चीनी को एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल के लिए मोड़ दिया गया है। यह डायवर्जन देश के फ्यूल ब्लेंडिंग लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करता है, लेकिन जब कुल उत्पादन पहले से ही दबाव में हो, तो इससे सीधे खाने-पीने के लिए बाजार में उपलब्ध चीनी की मात्रा और घट जाती है।
दूध की कीमतों ने भी बढ़ाई मुश्किल
चीनी के साथ-साथ दूध की कीमतों ने भी मिठाई कारोबारियों की परेशानी बढ़ाई है, खासकर महाराष्ट्र में। मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने 1 सितंबर से खुले दूध के दाम में 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। इसका सीधा असर पेड़ा, बर्फी, कलाकंद, बासुंदी और रसमलाई जैसी दूध आधारित मिठाइयों पर पड़ेगा। इसके अलावा जिन मिठाइयों में घी और पनीर मुख्य सामग्री होती है, उनकी लागत भी बढ़ी हुई दूध की कीमतों की वजह से ऊपर जा सकती है। तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात में भी दूध की कीमतें बढ़ने की खबरें हैं, जिससे यह दबाव सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रह गया है।
घी, ड्राई फ्रूट्स और अन्य लागतें भी बढ़ीं
मिठाई बनाने और बेचने की कुल लागत में सिर्फ चीनी और दूध ही नहीं, बल्कि घी, पनीर, ड्राई फ्रूट्स, खाने के तेल, पैकेजिंग, बिजली और ईंधन जैसे कई और खर्चे भी शामिल होते हैं। जब इनमें से कई चीजें एक साथ महंगी हो जाती हैं, तो मिठाई कारोबारियों के पास अपने मुनाफे को बचाने के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं बचती और उन्हें खुदरा दाम बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखता।
त्योहारी सीजन से पहले हलवाइयों के लिए दोहरी चुनौती
मिठाई कारोबारियों के लिए यह समय खासतौर पर मुश्किल भरा है। त्योहारी उत्पादन असली खरीदारी के सीजन से काफी पहले शुरू करना पड़ता है, इसलिए कारोबारियों को कच्चा माल पहले से बड़ी मात्रा में खरीदना पड़ता है। ऐसे में सामग्री की कीमतों में कोई भी बढ़ोतरी सीधे तैयार मिठाई की लागत में जुड़ जाती है, वो भी तब जब त्योहारी खरीदारी अभी शुरू ही हुई है। यही वजह है कि इस बार गणपति, नवरात्रि और दिवाली पर मिठाई का बिल पहले से भारी लगने की आशंका है।


















