यूरोपीय मुद्रा यूरो पर इस समय दोतरफा दबाव दिखाई दे रहा है, जिसके कारण ब्रिटिश पाउंड के खिलाफ इसकी कीमत में तेज गिरावट आई है। विदेशी मुद्रा बाजार में EUR/GBP जोड़ी 0.8610 के महत्वपूर्ण रेसिस्टेंस स्तर को पार करने में असफल रही और फिसलकर 0.8590 के स्तर पर आ गई। इस मंदी के पीछे दो मुख्य वैश्विक कारण काम कर रहे हैं। पहला कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी है और दूसरा कारण बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) का ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख है। इन दोनों कारकों ने मिलकर यूरो की स्थिति कमजोर कर दी है, जिससे पाउंड को मजबूती मिली है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड के कड़े रुख से यूरो पर बना दबाव
ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के हालिया बयानों ने पाउंड को काफी सहारा दिया है। विशेष रूप से, बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने शुक्रवार को स्पष्ट संकेत दिए कि देश में बढ़ती महंगाई के दबाव के बीच ब्याज दरों को लंबे समय तक स्थिर रखना बेहद मुश्किल होगा। बेली के इस बयान से बाजार को संकेत मिला कि आने वाले समय में नीतिगत दरों में और बढ़ोतरी की जा सकती है, जिससे पाउंड को बल मिला। इसके विपरीत, यूरो को यूरोक्षेत्र से ऐसा कोई मजबूत समर्थन नहीं मिल पा रहा है, जिससे इसकी गिरावट थमती नजर नहीं आ रही है।
EUR/GBP जोड़ी के लिए प्रमुख तकनीकी स्तर
तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो बिकवाल यूरो को लगातार नीचे धकेल रहे हैं। इस जोड़ी का तात्कालिक लक्ष्य 24 सितंबर का निचला स्तर है, जो 0.8592 पर स्थित है। यदि मंदी का रुख जारी रहता है और बाजार इस स्तर से नीचे जाता है, तो अगला ध्यान 18, 19 और 22 सितंबर को दर्ज किए गए निचले स्तरों पर केंद्रित होगा, जो 0.8570 के आसपास हैं। इससे भी नीचे जाने पर इस जोड़ी का मजबूत सपोर्ट 0.8560 के चैनल फ्लोर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, यदि यूरो में सुधार की कोई कोशिश होती है, तो उसे सबसे पहले 0.8610 के स्तर पर रेसिस्टेंस का सामना करना होगा, जो मौजूदा ट्रेडिंग चैनल का ऊपरी छोर है। इस बाधा को पार करने के बाद बाजार जून के आखिरी दिनों के उच्च स्तर यानी 0.8630 की ओर बढ़ सकता है, जिसके बाद अगला लक्ष्य 26 जून को दर्ज किया गया 0.8650 का उच्चतम स्तर होगा। दिलचस्प बात यह है कि पाउंड के मुकाबले कमजोर होने के बावजूद, यूरो आज के कारोबार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) के खिलाफ सबसे मजबूत स्थिति में रहा। वैश्विक बाजारों में मुद्राओं के इस उतार-चढ़ाव को समझने के लिए ट्रेडर अक्सर हीट मैप का उपयोग करते हैं। इस टूल में बाईं ओर की वर्टिकल कॉलम में बेस करेंसी और सबसे ऊपर हॉरिजॉन्टल रो में कोट करेंसी होती है। उदाहरण के लिए, यदि हम बाईं कॉलम से यूरो चुनते हैं और अमेरिकी डॉलर (USD) की लाइन में आगे बढ़ते हैं, तो दिखने वाला आंकड़ा सीधे तौर पर EUR/USD के प्रतिशत बदलाव को दर्शाता है।
वैश्विक मुद्रा बाजार: अमेरिकी डॉलर और जापानी येन में हलचल
दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) की जोड़ी भी इस समय दबाव में है। हफ्ते की शुरुआत में यह जोड़ी 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को बचाने का प्रयास कर रही है, जो 4 अगस्त के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है। इसका मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की चौतरफा मजबूती है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंकाओं के बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर बनी हुई है। इसके अलावा, बाजार में इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि फेडरल रिजर्व (FED) अक्टूबर में होने वाली बैठक में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। अमेरिकी और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को बढ़ाया है, जिससे यह जोड़ी मंगलवार को होने वाले रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के नीतिगत फैसलों से ठीक पहले दबाव में दिख रही है।
जापानी येन (JPY) के मोर्चे पर, USD/JPY की जोड़ी में निचले स्तरों पर खरीदारों की सक्रियता देखी गई है। इसने शुक्रवार को आई उस बड़ी गिरावट को काफी हद तक पाट दिया है, जो जापान के वित्तीय अधिकारियों द्वारा येन को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने की अटकलों के बाद आई थी। हालांकि, बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठक के नरम रुख वाले मिनट्स आने के बाद येन की तेजी पर लगाम लग गई। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर को फिर से गति मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच का गतिरोध कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचा बनाए हुए है, जिससे महंगाई का डर बढ़ रहा है और अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाए जाने की संभावना मजबूत हो रही है। यही वजह है कि USD/JPY जोड़ी दोबारा 158.00 के स्तर की तरफ बढ़ रही है।
सोने की कीमतों में भारी गिरावट और भू-राजनीतिक परिस्थितियां
कमोडिटी बाजार की बात करें तो सप्ताह की शुरुआत सोने के लिए काफी निराशाजनक रही है। पीली धातु की कीमतों में तेज गिरावट देखी जा रही है और यह आठ हफ्तों में पहली बार $4,150 के स्तर के पास पहुंच रही है। अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की बढ़ती संभावनाओं और तेल के कारण महंगाई बढ़ने के खतरों के चलते अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड लगातार ऊंचाई पर है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद अमेरिकी डॉलर को अतिरिक्त मजबूती मिली है। डॉलर की मजबूती और ऊंचे यील्ड के इस दोहरे प्रभाव ने सोने जैसी बिना ब्याज वाली सुरक्षित संपत्ति के आकर्षण को कम कर दिया है, जिससे इसमें भारी बिकवाली देखी जा रही है।
कार्डानो में दिखा ठहराव और अन्य महत्वपूर्ण अनुमान
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में, प्रमुख डिजिटल टोकन कार्डानो (ADA) में इस समय ठहराव का दौर देखा जा रहा है। पिछले सप्ताह 11% की शानदार बढ़त दर्ज करने के बाद, यह कॉइन $0.260 के स्तर से नीचे कंसोलिडेट हो रहा है। डेरिवेटिव्स बाजार और ऑन-चेन मैट्रिक्स के मिले-जुले संकेत बताते हैं कि इस समय निवेशक और ट्रेडर काफी सतर्क हैं। हालांकि कार्डानो का तकनीकी दृष्टिकोण अभी भी तेजी का संकेत दे रहा है, लेकिन निकट समय में इसकी दिशा कैसी रहेगी, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
इसके साथ ही, व्यापक डॉलर इंडेक्स में अपने मजबूत रेसिस्टेंस स्तर का परीक्षण करने के बाद थोड़ी गिरावट आई है, जिससे आने वाले सत्रों में यूरो को थोड़ी राहत मिल सकती है। दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी 158 से नीचे फिसल गई है और अब यह 157 से 156 के दायरे की तरफ बढ़ रही है, जबकि निकट भविष्य में EUR/JPY के 181 से 178 के बीच कारोबार करने का अनुमान है। भारतीय मुद्रा के संदर्भ में देखें तो USD/INR जोड़ी के 96 से नीचे रहने पर इसके 95.50 के स्तर तक जाने की मामूली संभावना है, हालांकि लंबी अवधि में भारतीय रुपया मजबूती की ओर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। अंत में, अगर वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति की बात करें तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की रणनीतियों में काफी समानताएं दिख रही हैं। दोनों केंद्रीय बैंकों ने पिछले हफ्ते अपनी ब्याज दरों में 25 bps (बेसिस पॉइंट्स) की बढ़ोतरी की है। दोनों ही बैंक महंगाई के खतरों का सामना कर रहे हैं और उन्होंने स्पष्ट किया है कि भविष्य के नीतिगत फैसले पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर आधारित होंगे।



















