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सस्ते कच्चे तेल और विदेशी निवेश के सहारे डॉलर के मुकाबले संभला रुपयाबाज़ार
2 घंटे पहले· 3

सस्ते कच्चे तेल और विदेशी निवेश के सहारे डॉलर के मुकाबले संभला रुपया

कच्चे तेल में हल्की तेजी के बावजूद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ, जबकि निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व की जून बैठक के मिनट्स और आगे आने वाले तिमाही नतीजों पर टिकी है।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 5 मिनट पढ़ें AI के लिए
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CL━SMA20 ━SMA50 · RSI · MACD
Candles + SMA20/50 · RSI(14) · MACD(12,26,9) with buy/sell signals — live from Yahoo

तकनीकी विश्लेषण7 जुलाई 2026

मूविंग एवरेजEMA 20 / 50 / 200

यह क्या है

EMA यानी एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज कीमत को सहज बनाकर छोटी (20), मध्यम (50) और लंबी (200) अवधि का रुझान दिखाती हैं। कीमत इनके ऊपर और तीनों ऊपर की ओर हों तो तेजी का रुझान; नीचे और नीचे की ओर हों तो गिरावट का रुझान।

अभी यह कहाँ है

CL अभी $69.29 पर है, जबकि EMA20 $75.77, EMA50 $83.44 और EMA200 $75.89 पर हैं।

आगे संभावित चाल

तेजी संभवतः EMA20 ($75.77) के पास थम सकती है।

RSIRelative Strength Index (14)

यह क्या है

RSI 0 से 100 तक का मोमेंटम मापक है जो हालिया बढ़त बनाम गिरावट दिखाता है। 70 के ऊपर ओवरबॉट (खिंचा हुआ), 30 के नीचे ओवरसोल्ड (बिकवाली से थका), और 50 तटस्थ रेखा है।

अभी यह कहाँ है

CL का RSI 31 है।

आगे संभावित चाल

60 के ऊपर बढ़त या 40 के नीचे फिसलन पर नजर रखें।

भारतीय रुपये ने मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले वापसी की और थोड़ा मजबूत हुआ, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में हल्की खरीदारी लौट आई थी। खास बात यह रही कि तेल में यह सुधार ऐसे समय आया जब कच्चा तेल भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए दबाव की बड़ी वजह माना जाता है। इसके साथ ही बाजार की नजर फेडरल रिजर्व की जून नीतिगत बैठक के मिनट्स पर बनी हुई है, जिनका बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।

तेल की वापसी और रुपये पर असर

MCX पर 20 जुलाई को समाप्त होने वाला कच्चे तेल का अनुबंध इस समय 1.3 प्रतिशत की बढ़त के साथ करीब 6,640 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। हालांकि यह अब भी पिछले हफ्ते बने कई महीनों के निचले स्तर 6,435 के आसपास ही है। आम तौर पर देखा जाता है कि जिन देशों की अर्थव्यवस्था अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात पर टिकी होती है, जैसे भारत, वहां की मुद्राएं तेल के दाम चढ़ने पर कमजोर पड़ जाती हैं। यही वजह है कि तेल की हर हलचल पर रुपये की चाल की भी बारीकी से नजर रखी जाती है।

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ताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक बेंचमार्क कच्चा तेल इस समय करीब 69.29 डॉलर पर है और दिन के दौरान इसमें लगभग 1.08 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। इसके बावजूद 14 दिन का RSI करीब 31 पर होना यह इशारा करता है कि लंबी अवधि का रुझान अब भी कमजोरी की ओर झुका हुआ है। यही कारण है कि तेल में आई अचानक तेजी का असर सीमित रहने की उम्मीद है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ संघर्षविराम अब भी बरकरार है।

होर्मुज जलसंधि में फिर बढ़ा तनाव

तेल की कीमतों को नई हवा उस घटनाक्रम से मिली, जब ईरान ने होर्मुज जलसंधि से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर कम से कम दो मिसाइलें दागीं। इस हमले में दो वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया और उन्हें भारी नुकसान पहुंचा, हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। दुनिया के तेल व्यापार के लिए यह जलमार्ग बेहद अहम है, इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव कीमतों को तुरंत प्रभावित करता है। फिलहाल संघर्षविराम टूटा नहीं है, इसलिए बाजार इस तनाव को लेकर बहुत ज्यादा घबराहट में नहीं दिख रहा।

विदेशी निवेशक और आगे आने वाले तिमाही नतीजे

विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII सोमवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन शुद्ध खरीदार रहे, लेकिन उनके निवेश की रकम शुक्रवार के मुकाबले काफी कम रही। सोमवार को FII ने भारतीय शेयर बाजार में 243.03 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि शुक्रवार को यह आंकड़ा 1,355.33 करोड़ रुपये का था। यानी खरीदारी का सिलसिला भले जारी रहा हो, लेकिन उसकी रफ्तार धीमी पड़ गई।

आगे चलकर विदेशी निवेशक अपने अगले कदम तय करने के लिए भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बारीकी से नजर रखेंगे। निफ्टी 50 की कंपनियों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS सबसे पहले अपने पहली तिमाही (Q1FY27) के नतीजे गुरुवार को पेश करेगी, जिससे नतीजों के मौसम की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है।

तकनीकी नजरिए से कहां खड़ा है USD/INR

USD/INR गिरकर करीब 95.10 पर आ गया है, लेकिन नजदीकी अवधि में इसका रुझान हल्का तेजी वाला बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि यह जोड़ी 20 दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) यानी 95.00 के ऊपर टिकी है और डिसेंडिंग ट्रायंगल के ब्रेकआउट को भी बनाए हुए है। करीब 51.6 पर मौजूद रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) यह दर्शाता है कि गति सकारात्मक है और बाजार अभी ओवरबॉट यानी जरूरत से ज्यादा खरीदे गए स्तर पर नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि जब तक कीमत छोटी अवधि के EMA के ऊपर टिकी रहती है, तब तक धीरे-धीरे रिकवरी संभव है।

नीचे की ओर पहला सहारा 20 दिन के EMA यानी 95.00 पर दिख रहा है और उसके बाद 7 मई का निचला स्तर 94.03 अहम है। ऊपर की ओर यह जोड़ी करीब 97.10 के अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर को दोबारा छूने की कोशिश कर सकती है।

बाकी बाजारों का हाल

ब्रिटिश पाउंड की तेजी का सिलसिला लगातार नौवें दिन भी जारी रहा और GBP/USD मंगलवार को एशियाई कारोबार के दौरान करीब 1.3390 पर पहुंच गया। यह मजबूती इसलिए आई क्योंकि अमेरिकी डॉलर दबाव में है, जबकि बाजार भागीदारों ने इस महीने और सितंबर में फेडरल रिजर्व की दरें बढ़ाने की उम्मीदों को घटा दिया है।

दूसरी ओर यूरो कमजोर पड़ता दिखा और EUR/USD मंगलवार को यूरोपीय कारोबार में 1.1400 की ओर फिसल गया, क्योंकि इसे 1.1450 के स्तर पर बिकवाली का सामना करना पड़ा। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले डॉलर में हल्की मजबूती के बीच यह जोड़ी नीचे आई, वहीं होर्मुज जलसंधि में नए सिरे से बढ़े तनाव और एशियाई तकनीकी शेयरों में बिकवाली ने जोखिम से बचने की भावना को हवा दी।

सोना कारोबार के दौरान दबाव में रहा, हालांकि यह 4,100 डॉलर के स्तर के ऊपर टिका रहा। होर्मुज जलसंधि में तनाव के चलते कच्चे तेल में आई तेजी ने महंगाई की चिंताओं को फिर जगा दिया, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में उछाल आया। इसका सहारा डॉलर को मिला और बिना ब्याज देने वाली पीली धातु लगातार दूसरे दिन दबाव में रही।

क्रिप्टो बाजार में बोंक भी दबाव में बना रहा और यह 0.0000044 डॉलर के नीचे कारोबार करता दिखा, क्योंकि एक दिन पहले इसमें 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी थी। यह गिरावट तब आई जब बोंक के विकेंद्रीकृत स्वायत्त संगठन (DAO) ने बताया कि उसके गवर्नेंस सिस्टम में एक सेंधमारी हुई, जिसके चलते उसके ट्रेजरी से 2 करोड़ डॉलर मूल्य के BONK टोकन चोरी हो गए।

इस बीच एक बड़ा बदलाव दुनिया के केंद्रीय बैंकों के रुख में देखने को मिल रहा है। बरसों तक बाजार को यह बताते रहने के बाद कि आगे क्या हो सकता है, अब फेडरल रिजर्व, यूरोपियन सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड जैसे नीति-निर्माता फॉरवर्ड गाइडेंस से पीछे हट रहे हैं। इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में कारोबारियों को इन बैंकों से भविष्य के संकेत काफी कम मिल सकते हैं।

इसका आप पर असर

  • आम लोगों के लिए: कच्चे तेल की कीमत और रुपये की चाल सीधे पेट्रोल-डीजल और आयातित सामान की लागत को छूती है, इसलिए तेल में तेज उछाल आगे चलकर महंगाई बढ़ा सकता है।
  • निवेशकों के लिए: रुपये की मजबूती और विदेशी निवेश का रुख शेयर बाजार की दिशा तय करता है, और गुरुवार को आने वाले TCS के नतीजे नतीजों के मौसम का पहला बड़ा संकेत होंगे।

सवाल-जवाब

रुपया डॉलर के मुकाबले क्यों मजबूत हुआ?
कच्चे तेल की कीमतें कुल मिलाकर नीचे रहीं और अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना, जिससे भारतीय रुपये को वापसी करने का मौका मिला।
होर्मुज जलसंधि में क्या हुआ?
ईरान ने वहां से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों पर कम से कम दो मिसाइलें दागीं, जिसमें दो जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।
सोमवार को FII ने कितना निवेश किया?
सोमवार को FII ने भारतीय शेयर बाजार में 243.03 करोड़ रुपये लगाए, जो शुक्रवार के 1,355.33 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम रहा।
TCS अपने तिमाही नतीजे कब पेश करेगी?
TCS निफ्टी 50 की पहली कंपनी होगी जो गुरुवार को अपने पहली तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी करेगी।
USD/INR अभी किन स्तरों पर है?
USD/INR करीब 95.10 पर है, जिसका पहला सहारा 95.00 और फिर 94.03 पर है, जबकि ऊपर की ओर सर्वकालिक उच्च स्तर करीब 97.10 है।
कच्चे तेल की कीमत का हाल क्या है?
MCX पर 20 जुलाई वाला अनुबंध 1.3 प्रतिशत बढ़कर करीब 6,640 पर है, हालांकि यह पिछले हफ्ते के निचले स्तर 6,435 के करीब है; ताजा आंकड़ों में वैश्विक कच्चा तेल करीब 69.29 डॉलर पर है।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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