जापानी मुद्रा येन इस समय दबाव में है और USD/JPY पिछले हफ्ते 162.84 का 40 साल का उच्चतम स्तर छूने के बाद अब 162.00 के आसपास ठहरा हुआ है। ब्राउन ब्रदर्स हैरिमैन के एलियास हद्दाद का आकलन है कि बैंक ऑफ जापान के अचानक सख्त (हॉकिश) रुख अपनाने की उम्मीद बनने की राह बेहद कठिन है, और यही वजह है कि येन में आने वाली किसी भी राहत भरी तेजी पर ऊपरी छत लगी रहने की आशंका है, भले ही ब्याज दरों को लेकर बाजार की मौजूदा अपेक्षाएं कुछ भी हों।
असल में जापान से जो ताजा संकेत मिल रहे हैं, वे केंद्रीय बैंक पर दरें बढ़ाने का दबाव कम करते हैं। मई महीने के वेतन आंकड़े नरम पड़े हैं, और बैंक ऑफ जापान जिन अंदरूनी CPI यानी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संकेतकों पर नजर रखता है, उनमें से ज्यादातर मई में और गिरकर 2% से नीचे आ गए। इसका सीधा मतलब है कि महंगाई का दबाव सीमित है, और जब तक कीमतें तेजी से नहीं चढ़तीं, तब तक ब्याज दरें आक्रामक ढंग से बढ़ाने की कोई ठोस वजह केंद्रीय बैंक के सामने नहीं बनती।
वेतन बढ़ोतरी महंगाई की बड़ी वजह नहीं
बाजार अक्सर यह मानकर चलता है कि वेतन बढ़ने से महंगाई भड़कती है, लेकिन जापान के मामले में तस्वीर अलग है। कुल कारक उत्पादकता (टोटल फैक्टर प्रोडक्टिविटी) में सालाना करीब 1% की बढ़त को देखते हुए वहां वेतन में हो रही बढ़ोतरी महंगाई का कोई बड़ा स्रोत नहीं बन रही। यही कारण है कि नरम वेतन आंकड़े और 2% से नीचे खिसकते महंगाई संकेतक मिलकर यह इशारा कर रहे हैं कि बैंक ऑफ जापान के पास जल्दबाजी में कदम उठाने की गुंजाइश नहीं है, और येन को इसी कमजोर पृष्ठभूमि का सामना करना पड़ रहा है।
बॉन्ड बिक्री को जोरदार समर्थन, लंबी अवधि की यील्ड गिरी
ब्याज दरों की इसी तस्वीर का असर जापान के सरकारी बॉन्ड बाजार पर भी दिखा। 30 साल की मियाद वाले जापानी सरकारी बॉन्ड (JGB) की यील्ड निवेशकों की मजबूत खरीदारी के दम पर 10bps तक गिरकर 4.00% पर आ गई। 30 साल के बॉन्ड की नीलामी को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिसका औसत बिड-टू-कवर रेशियो 4.55 रहा, जबकि जून में यह सिर्फ 2.94 था। यह मई 2019 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है और साफ बताता है कि निवेशकों की मांग कितनी दमदार रही।
डॉलर की मिलीजुली चाल: पाउंड और यूरो
दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर के लिए मंगलवार का दिन एकतरफा नहीं रहा। GBP/USD ने लगातार नौवें दिन अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा और एशियाई कारोबारी घंटों में यह करीब 1.3390 पर पहुंच गया। पाउंड को मजबूती इसलिए मिली क्योंकि बाजार भागीदारों ने इस महीने और सितंबर में फेडरल रिजर्व की दरें बढ़ाने की अपेक्षाओं में कटौती कर दी, जिससे डॉलर पर दबाव बना। वहीं EUR/USD मंगलवार को यूरोपीय कारोबार में 1.1400 की ओर फिसलता दिखा और 1.1450 के स्तर पर अटक गया। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले डॉलर में हल्की रिकवरी, होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर से बढ़े तनाव और एशियाई टेक शेयरों में बिकवाली ने जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को हवा दी, जिससे यूरो कमजोर पड़ा।
सोना, कच्चा तेल और होर्मुज का असर
कीमती धातुओं में भी हलचल रही। यूरोपीय सत्र की ओर बढ़ते हुए सोने का रुख दबाव भरा रहा, हालांकि यह $4,100 के स्तर से ऊपर टिका रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव फिर बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें ऊपर चढ़ीं, जिससे महंगाई की चिंता दोबारा जगी। इसके चलते अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में एक और उछाल आया, जिसने डॉलर को कुछ सहारा दिया और बिना ब्याज देने वाली पीली धातु यानी सोने पर लगातार दूसरे दिन दबाव डाला।
ट्रेजरी में सेंध के बाद बॉन्क टोकन धड़ाम
क्रिप्टो बाजार में बॉन्क टोकन दबाव में रहा और पिछले दिन 10% से ज्यादा गिरने के बाद यह $0.0000044 से नीचे कारोबार करता दिखा। सोमवार की इस गिरावट की वजह वह चूक रही जिसका ऐलान बॉन्क डीएओ ने खुद किया। उसने बताया कि गवर्नेंस में हुई एक सेंधमारी की वजह से उसके ट्रेजरी से 2 करोड़ डॉलर मूल्य के BONK टोकन चोरी हो गए, और इसी झटके ने कीमत को नीचे धकेल दिया।
केंद्रीय बैंक अब कम बोलने की तैयारी में
इन सबके बीच एक बड़ा बदलाव यह है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी बोलने की शैली बदल रहे हैं। वर्षों तक ये संस्थान बाजार को पहले से बताते रहे कि आगे क्या होने वाला है, लेकिन अब हालात अलग हैं। फेडरल रिजर्व से लेकर यूरोपियन सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड तक, नीति-निर्माता अब फॉरवर्ड गाइडेंस से पीछे हट रहे हैं। इसका मतलब है कि आने वाले समय में कारोबारियों को केंद्रीय बैंकों से पहले जैसे साफ इशारे शायद न मिलें, और उन्हें आंकड़ों के आधार पर खुद ज्यादा अनुमान लगाने पड़ें।











