भारतीय सिनेमा के इतिहास में 5 अगस्त 1983 की तारीख एक बेहद खास मुकाम रखती है। इसी दिन बड़े पर्दे पर एक ऐसी प्रेम कहानी ने दस्तक दी थी, जिसने थिएटर्स के बाहर दर्शकों की लंबी कतारें लगा दी थीं। दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के बेटे सनी देओल ने फिल्म बेताब के जरिए बॉलीवुड में कदम रखा था। अपनी पहली ही फिल्म में अपनी बुलंद आवाज, आकर्षक व्यक्तित्व और स्वाभाविक अभिनय क्षमता के दम पर सनी देओल ने यह साबित कर दिया था कि वह लंबे समय तक फिल्म उद्योग पर राज करने वाले हैं। इस फिल्म में एक अमीर परिवार की लड़की और एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि के लड़के के बीच के प्यार को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया था। सनी देओल का निडर अंदाज और रोमांटिक अवतार दर्शकों के दिलों को भा गया, जिसके चलते पहले ही दिन से सभी सिनेमाघर पूरी तरह से भर गए।
1.5 करोड़ रुपये का बजट और बंपर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
फिल्म निर्माण की बात करें तो इसे धर्मेंद्र की अपनी होम प्रोडक्शन कंपनी विजेता फिल्म्स के बैनर तले तैयार किया गया था। उस दौर के आंकड़ों के अनुसार, इस फिल्म को बनाने में लगभग 1.5 करोड़ रुपये का कुल खर्च आया था। जब यह फिल्म थिएटर्स में पहुंची, तो इसके बिजनेस ने कमाई के पुराने सारे समीकरण बदल दिए। फिल्म ने अपनी लागत से 10 गुना अधिक का शुद्ध मुनाफा हासिल किया। भारत के घरेलू बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने लगभग 13 से 15 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जबकि दुनिया भर के बाजारों को मिलाकर इसका कुल ग्रॉस कलेक्शन 18 से 20 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इस धमाकेदार प्रदर्शन की वजह से यह उस साल की ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
सनी देओल और अमृता सिंह की फ्रेश ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री
इस प्रेम कहानी की सबसे बड़ी ताकत इसकी मुख्य स्टारकास्ट की ताजगी थी। सनी देओल के साथ इस फिल्म से अमृता सिंह ने भी अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी। पर्दे पर इन दोनों युवा कलाकारों की नोंकझोंक, शुरुआती तकरार और फिर एक-दूसरे के प्रति गहराते प्यार को युवा दर्शकों ने खूब सराहा। कश्मीर की खूबसूरत बर्फ से ढकी घाटियों और मनमोहक लोकेशनों पर फिल्माए गए दृश्यों ने पूरी फिल्म के दृश्य अनुभव में चार चांद लगा दिए थे। दोनों मुख्य कलाकारों के स्वाभाविक अभिनय ने इस लव स्टोरी को यादगार बना दिया, जिससे हर वर्ग का दर्शक खिंचा चला आया।
आरडी बर्मन का संगीत और सदाबहार गाने
80 के दशक में किसी भी रोमांटिक फिल्म की सफलता में उसके संगीत की भूमिका सबसे अहम मानी जाती थी। इस मामले में फिल्म के गानों ने रिलीज होते ही रेडियो स्टेशन और म्यूजिक चार्ट्स पर अपना दबदबा बना लिया था। संगीत के महान जादूगर आरडी बर्मन यानी पंचम दा की सुरीली धुनों और जावेद अख्तर द्वारा लिखे गए गहरे बोलों ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वर कोकिला लता मंगेशकर और शब्बीर कुमार की आवाज में रिकॉर्ड किए गए गाने जैसे जब हम जवान होंगे, तुमने दी आवाज तो और बादल यूं गरजता है ने उस दौर में हर जगह धूम मचा दी थी। इन गीतों की लोकप्रियता ने फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
1983 की दूसरी सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर और सनी देओल की विरासत
साल 1983 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में बेताब दूसरे स्थान पर रही थी। यह सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की मशहूर फिल्म कुली के बाद उस साल की दूसरी सबसे बड़ी व्यावसायिक सफलता बनकर उभरी। इस ऐतिहासिक सफलता को बीते 43 साल हो चुके हैं, लेकिन भारतीय सिनेमा में इसका स्थान आज भी पूरी तरह से सुरक्षित है। पहली ही फिल्म की अपार सफलता ने सनी देओल को रातोंरात देश का चहेता स्टार बना दिया और इसके बाद उन्होंने अपने करियर में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस फिल्म की कामयाबी ने ही आगे चलकर सनी देओल की घायल, दामिनी और गदर जैसी क्लासिक और ऐतिहासिक फिल्मों का रास्ता तैयार किया था।



















