MCX पर कीमती धातुओं के लिए दिन मजबूत रहने के आसार हैं। सोना और चांदी दोनों के वायदा भाव में तेजी दिख सकती है, क्योंकि वैश्विक संकेत इनके पक्ष में जा रहे हैं। हाजिर सोना करीब $4,100 प्रति औंस पर टिका है, जबकि हाजिर चांदी उछलकर $61 प्रति औंस के आसपास पहुंच गई है। खास बात यह है कि इस तेजी की असली वजह खुद सर्राफा बाजार नहीं, बल्कि कच्चे तेल का बाजार है।
कच्चा तेल क्यों तय कर रहा है सोने-चांदी की चाल
ब्रेंट क्रूड तेज गिरावट के साथ $79 प्रति बैरल से नीचे आ गया है। यह गिरावट कतर के उस संकेत के बाद आई, जिसमें कहा गया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ रही है। सस्ता कच्चा तेल महंगाई की आशंका को ठंडा करता है, और नरम महंगाई से केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ाते रहने का दबाव घटता है। यही माहौल परंपरागत रूप से सोने और चांदी के लिए फायदेमंद माना जाता है।
होर्मुज जलसंधि का असर
इस पूरी कहानी के केंद्र में है होर्मुज जलसंधि। निवेशक इस अहम समुद्री रास्ते को दोबारा खोलने की जल्द संभावित डील की खबरों को तौल रहे हैं। अगर यह रास्ता खुलता है तो महंगाई की चिंता और घटेगी और नजदीकी समय में फेडरल रिजर्व के दरें बढ़ाने की आशंका भी कम होगी। मंगलवार को कतर ने बताया कि एक अंतरिम प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, वहीं वॉशिंगटन और तेहरान दोनों ने होर्मुज को खोलने की बातचीत में प्रगति के संकेत दिए। इसी वजह से तेल की कीमतों में तेज गिरावट आई।
फेड की दर बढ़ोतरी की उम्मीदें ठंडी
इस बदलाव का सीधा असर ब्याज दरों की उम्मीदों पर पड़ा है। बाजार ने सितंबर में फेड की दर बढ़ोतरी की संभावना घटाकर करीब 57% कर दी है, जो एक दिन पहले 67% थी। दर बढ़ने की घटती आशंका आमतौर पर सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों को सहारा देती है, क्योंकि जब दरें स्थिर रहने की उम्मीद हो तो सोना अपने पास रखने की लागत घट जाती है।
अब निवेशकों की नजर किस पर
बाजार में अब भी सतर्कता बनी हुई है और कारोबारी साफ दिशा तलाश रहे हैं। अगला बड़ा संकेत अमेरिका के श्रम बाजार के ताजा आंकड़े होंगे। जुलाई के लिए ADP की निजी पेरोल रिपोर्ट आज दिन में बाद में आने वाली है। कमजोर आंकड़ा फेड के दरें स्थिर रखने के पक्ष को मजबूत करेगा, जबकि मजबूत आंकड़ा दर बढ़ोतरी की उम्मीदें फिर जगा सकता है और धातुओं की तेजी पर लगाम लगा सकता है।
चीन की खरीदारी जारी
पूरब से मांग भी कीमतों को एक और सहारा दे रही है। चीन में सोने पर आधारित ETF में लगातार निवेश आ रहा है और संस्थागत निवेशक $4,000 प्रति औंस के अहम स्तर से ऊपर सर्राफा को समर्थन बनाए हुए हैं। यह लगातार बनी संस्थागत मांग कीमतों के नीचे एक मजबूत आधार तैयार कर रही है, भले ही बाजार अगले बड़े संकेत का इंतजार कर रहा हो।
कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि बाजार तेजी की ओर झुका है, लेकिन जल्दबाजी में नहीं। गिरता कच्चा तेल, घटती महंगाई की आशंका, ठंडी पड़ती दर बढ़ोतरी की उम्मीदें और चीन की स्थिर खरीदारी, ये सब सोने और चांदी को एक ही दिशा में खींच रहे हैं। हालांकि निवेशक श्रम बाजार के आंकड़ों को लेकर सतर्क हैं, जो फेड के अगले कदम की दिशा तय कर सकते हैं।



















