अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की तेज रफ्तार पर अस्थायी विराम लगने के बाद यूरो को कुछ सहारा मिला है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हालिया रिकॉर्ड स्तरों से आई हल्की गिरावट के कारण यूरो बनाम डॉलर (EUR/USD) की विनिमय दर में सुधार दर्ज किया गया। हालांकि, अटलांटिक के दोनों छोर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते मुद्रास्फीति का जोखिम लगातार बना हुआ है, जिससे नीतिगत ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंकाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स का ताजा रुख
अमेरिकी डॉलर की ताकत को छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मापने वाला डॉलर इंडेक्स (DXY) 102.24 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। यह हालिया सोमवार को दर्ज किए गए 102.53 के शिखर से थोड़ा नीचे आया है, जो अप्रैल 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। इसके समानांतर, अमेरिकी बेंचमार्क 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.28 प्रतिशत के करीब आ गई है। इससे पहले बुधवार को यह यील्ड 5.36 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जो साल 2002 के बाद का उच्चतम स्तर था। यील्ड में आई इस मामूली नरमी ने डॉलर की तेजी पर लगाम लगाई है, जिसका सीधा लाभ यूरो जैसी प्रमुख मुद्राओं को मिला है।
फेडरल रिजर्व की सख्ती और आर्थिक वृद्धि का दबाव
ट्रेजरी यील्ड में तात्कालिक गिरावट के बावजूद उधारी लागत पर ऊपर की ओर दबाव बरकरार है। कच्चे तेल के बढ़ते दाम, मजबूत आर्थिक वृद्धि और भारी सरकारी कर्ज के कारण बॉन्ड बाजार में सतर्कता का माहौल है। बुधवार को जारी की गई फेडरल रिजर्व की सितंबर मौद्रिक नीति बैठक के मिनट्स से स्पष्ट संकेत मिले हैं कि केंद्रीय बैंक के नीति निर्माता मुद्रास्फीति को लेकर अब भी चिंतित हैं। बैठक में अधिकारियों ने स्वीकार किया कि महंगाई दर अब भी तय लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, लेबर मार्केट लगभग अधिकतम रोजगार के स्तर पर काम कर रहा है और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार ठोस गति से हो रहा है। अधिकांश नीति निर्माताओं का मानना था कि साल के अंत तक नीतिगत दरों में एक और बढ़ोतरी उचित हो सकती है। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज के फेडवॉच टूल (CME FedWatch Tool) के अनुसार, दिसंबर महीने में दरें बढ़ाए जाने की संभावना लगभग 86 प्रतिशत आंकी जा रही है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक और वैश्विक महंगाई परिदृश्य
दूसरी तरफ यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) ने अपने नीतिगत विकल्पों को खुला रखा है। यूरोप में ईंधन की कीमतों से उपजी महंगाई चिंता का विषय बनी हुई है, जिससे केंद्रीय बैंक के सामने आर्थिक वृद्धि को नुकसान पहुंचाए बिना कीमतों पर नियंत्रण पाने की कठिन चुनौती है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक फेडरल रिजर्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी नीतिगत दिशा पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच आज ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले डॉलर का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा।
एशियाई सत्र में अन्य मुद्राओं और सोने की स्थिति
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य प्रमुख युग्मों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला है। गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.6950 के ठीक ऊपर स्थिर होने का प्रयास करता दिखा। व्यापारी मध्य पूर्व के संकट पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, जहां पेंटागन द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित हमलों के लिए सैन्य तैयारी के निर्देश की पृष्ठभूमि में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम ऊंचा बना हुआ है। इस तनाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की मजबूती के चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव रहने के आसार हैं।
इसी तरह, डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) एशियाई सत्र में 158.00 के नीचे फिसल गया। बाजार में इस बात की जोरदार चर्चा है कि जापानी अधिकारी अपनी मुद्रा को अत्यधिक गिरावट से बचाने के लिए बाजार में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप कर सकते हैं। इसके अलावा 18 महीने के उच्च स्तर के करीब मुनाफावसूली होने से भी डॉलर इंडेक्स पर दबाव बढ़ा। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने अपनी चमक फिर से बिखेरते हुए रिकवरी दर्ज की। गुरुवार को पीली धातु अच्छी बढ़त के साथ प्रति ट्रॉय औंस 4,150 डॉलर के स्तर के करीब पहुंच गई। अमेरिकी डॉलर की गति धीमी पड़ने और 10 से 30 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाली अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई हल्की गिरावट ने सोने की इस मजबूती में अहम भूमिका निभाई है।


















