अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सिंगापुर डॉलर (USD/SGD) में पिछले सप्ताह की तेज बढ़त के बाद बड़ा सुधार देखने को मिला है। हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में नीचे की ओर गिरावट की रफ्तार सीमित बनी हुई है। मुद्रा विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में यह मुद्रा जोड़ी 1.2680 से 1.2780 के एक व्यापक दायरे में कारोबार करती रहेगी। दैनिक कारोबार के दौरान संभावित गिरावट को 1.2695 के स्तर पर समर्थन मिलने की उम्मीद है, जबकि ऊपर की ओर 1.2725 और 1.2735 के स्तर मजबूत प्रतिरोध के रूप में कार्य कर सकते हैं। इसके साथ ही सिंगापुर डॉलर की नाममात्र प्रभावी विनिमय दर (S$NEER) का स्तर भी ऊंचा बना हुआ है, जो 1.2676 से 1.2740 के संभावित व्यापारिक दायरे का संकेत देता है।
24 घंटे का परिदृश्य और तात्कालिक समर्थन स्तर
हालिया कारोबारी सत्रों में डॉलर का रुख अनिश्चित नजर आया है। शुक्रवार को हुई जोरदार तेजी के दौरान डॉलर 1.2754 तक पहुंच गया था, जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि ओवरबॉट स्थितियों के कारण यह बढ़त 1.2725 से 1.2765 के बीच ही सीमित रहेगी। उस समय विश्लेषकों का अनुमान था कि यदि डॉलर 1.2765 के स्तर को पार भी कर लेता है, तो भी 1.2780 का प्रमुख प्रतिरोध स्तर टूटना मुश्किल होगा। हालांकि, बाजार की वास्तविक चाल इन अनुमानों से अलग रही और डॉलर में अचानक 1.2710 के स्तर तक की तेज गिरावट दर्ज की गई।
ताजा विनिमय रुझानों से पता चलता है कि हालांकि हालिया गिरावट का दायरा थोड़ा और बढ़ सकता है, लेकिन बाजार में मंदी की कोई मजबूत लहर नहीं दिखी है। इस स्थिति में मुद्रा जोड़ी के 1.2695 के निचले स्तर से नीचे गिरने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। ऊपरी स्तरों की बात करें तो पहला तात्कालिक प्रतिरोध 1.2725 पर देखा जा रहा है, जिसके बाद 1.2735 पर अगला मुख्य रुकावट बिंदु बना हुआ है।
मध्यम अवधि का दृष्टिकोण और तटस्थ रुख
एक महीने तक अमेरिकी डॉलर के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने के बाद, विश्लेषकों ने 31 अगस्त को अपना दृष्टिकोण नकारात्मक से बदलकर तटस्थ (न्यूट्रल) कर दिया था। उस समय हाजिर बाजार में विनिमय दर 1.2750 के आसपास बनी हुई थी और अनुमान था कि डॉलर 1.2705 से 1.2780 के दायरे में ही स्थिर रहेगा। इसके ठीक बाद बाजार में आई अचानक तेज गिरावट ने 1.2710 के निचले स्तर को छू लिया, जो कि तात्कालिक अनुमान से अधिक तेज था।
इस तेज प्रतिक्रिया के बावजूद, मध्यम अवधि का दृष्टिकोण फिलहाल तटस्थ ही बना हुआ है क्योंकि मंदी की ओर कोई स्थायी बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। बाजार में बढ़ी हुई अस्थिरता को देखते हुए अब अगले 1 से 3 हफ्तों के दौरान व्यापारिक सीमा का दायरा 1.2680 से 1.2780 तक चौड़ा होने की पूरी उम्मीद है। जब तक कोई नया व्यापक आर्थिक कारक सामने नहीं आता, तब तक डॉलर इसी सीमित दायरे में ऊपर-नीचे होता रहेगा।
वैश्विक मुद्रा बाजार: स्टर्लिंग और यूरो पर दबाव
सिंगापुर डॉलर में उतार-चढ़ाव के बीच वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं पर भी गहरा असर देखा जा रहा है। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) मंगलवार को दबाव में आ गया और गिरकर 1.3500 के निचले क्षेत्र में पहुंच गया, जो दो हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। पाउंड में दर्ज की गई इस मंदी का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर में आई समग्र मजबूती है। निवेशक इस समय अमेरिका से जारी होने वाले आर्थिक आंकड़ों और अमेरिका-ईरान संकट से जुड़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का बारीकी से आकलन कर रहे हैं।
इसी तरह यूरो (EUR/USD) में भी मंगलवार को दैनिक सुधार की प्रक्रिया तेज हो गई, जिससे यह 1.1600 के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर से नीचे फिसल गया। अमेरिकी डॉलर में आए उछाल ने यूरो पर नकारात्मक दबाव डाला है। यद्यपि अमेरिका के हालिया आर्थिक आंकड़े कुछ हद तक निराशाजनक रहे हैं, फिर भी वैश्विक भू-राजनीतिक चिंताओं ने डॉलर की सुरक्षित-संपत्ति के रूप में मांग को बनाए रखा है, जिससे यूरोपीय मुद्रा में गिरावट देखने को मिल रही है।
सोने में नरमी और बॉन्ड प्रतिफल में उछाल
मुद्रा बाजार के इस फेरबदल के साथ-साथ कीमती धातुओं और ऋण बाजारों में भी बड़ी हलचल दर्ज की गई है। मंगलवार को सोने की कीमतों में गिरावट की गति तेज हो गई और हाजिर सोना घटकर $4,300 प्रति ट्रॉय औंस के मुख्य स्तर के करीब आ गया। सोने में आई इस गिरावट का सीधा संबंध अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल (बॉन्ड यील्ड) में आई जोरदार तेजी से है। बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से बिना ब्याज देने वाली धातुओं जैसे सोने की मांग पर असर पड़ा है।
नये महीने की शुरुआत के साथ ही वैश्विक संप्रभु बॉन्ड (बॉन्ड मार्केट) में भी भारी बिकवाली देखने को मिली है। इस बिकवाली का सबसे अधिक प्रभाव ब्रिटेन के ऋण बाजार पर पड़ा, जहां 2-वर्षीय और 10-वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल एक समय 10 आधार अंक (bps) तक उछल गए थे। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन दोनों अवधियों के बॉन्ड प्रतिफल में क्रमशः 7 और 8 आधार अंकों की बढ़त बनी हुई है, जो वैश्विक वित्तीय बाजार में कसते हालात की ओर इशारा करती है।
ऊर्जा बाजार: डीजल क्रैक स्प्रेड का नया रिकॉर्ड
ऊर्जा क्षेत्र में कच्चे तेल का बाजार हालांकि पिछले कुछ महीनों की तुलना में अधिक शांत नजर आ रहा है, लेकिन डीजल सेगमेंट से बहुत अलग संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका में डीजल क्रैक स्प्रेड यानी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई (WTI) कच्चे तेल के बीच का अंतर हाल ही में पहली बार $100 प्रति बैरल की सीमा को पार कर गया। कारोबार के दौरान यह प्रीमियम उछलकर $102.00 प्रति बैरल के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।
डीजल के रिफाइनिंग मार्जिन में हुई यह रिकॉर्ड बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर मध्यवर्ती डिस्टिलेट्स की भारी किल्लत और आपूर्ति शृंखला की चुनौतियों को दर्शाती है। यद्यपि कच्चे तेल की कीमतें एक निश्चित दायरे में कारोबार कर रही हैं, लेकिन औद्योगिक और परिवहन ईंधन के रूप में उपयोग होने वाले डीजल के ऊंचे दाम आने वाले समय में वैश्विक परिवहन और विनिर्माण लागत को बढ़ा सकते हैं।


















