मध्य पूर्व के रणनीतिक क्षेत्र में सैन्य तनाव एक बार फिर से बेहद खतरनाक और चरम स्तर पर पहुंच गया है, जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह आधिकारिक पुष्टि की कि अमेरिकी सैन्य बलों ने ईरान में स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर नए सिरे से व्यापक हवाई और मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी सशस्त्र बलों ने मंगलवार को 12:00 ET (16:00 GMT) पर इन सैन्य हमलों की शुरुआत की। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय और सेंट्रल कमांड ने आरोप लगाया कि ईरानी सैन्य इकाइयों ने हाल ही में अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमले करने का प्रयास किया था और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा किया था।
दक्षिण ईरान के कई प्रांतों में हुए जोरदार हमले, नागरिक हताहतों की पुष्टि
अमेरिकी सेना के इस नए और व्यापक सैन्य अभियान का प्रभाव दक्षिण ईरान के कई प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों और तटीय प्रांतों में व्यापक रूप से देखा गया, जहां सैन्य ठिकानों के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। ईरानी राज्य टेलीविजन द्वारा प्रसारित एक प्रांतीय अधिकारी के बयान के अनुसार, दक्षिण ईरान के सीरिक शहर के पास हुए एक अमेरिकी हवाई हमले की चपेट में पास ही चल रहा एक शादी का कार्यक्रम आ गया। इस दुखद घटना में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य मेहमान और स्थानीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए।
इसी सैन्य अभियान के दौरान प्राप्त अन्य आधिकारिक विवरणों से पता चला है कि अमेरिकी मिसाइलों और हवाई हमलों ने चाबहार तथा कोनारक के महत्वपूर्ण तटीय क्षेत्रों में स्थित कई सामरिक ठिकानों को निशाना बनाया। देश के अंदरूनी हिस्से में स्थित जी रोफ्त शहर के एक महत्वपूर्ण हवाई अड्डे पर भी अमेरिकी प्रक्षेपास्त्रों ने सीधे हमले किए। इस बीच, तटीय बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और पास के क़ेश्म द्वीप के निवासियों ने लगातार कई शक्तिशाली विस्फोटों की तेज आवाजें सुनीं, जिससे पूरे तटीय इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
डोनाल्ड ट्रंप ने दी सख्त चेतावनी, कहा और बड़ा सैन्य प्रहार तैयार
अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद कड़ा सार्वजनिक बयान जारी करते हुए तेहरान के सैन्य नेतृत्व को साफ शब्दों में चेतावनी दी। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि ईरानी प्रशासन या उसकी सेना ने अमेरिकी बलों या क्षेत्र में अमेरिकी हितों के खिलाफ कोई भी जवाबी कार्रवाई करने का दुस्साहस किया, तो ईरान पर फिर से हमला किया जाएगा और वह हमला इस बार की तुलना में बहुत अधिक कठोर और कई गुना उच्च स्तर का होगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने आगे स्पष्ट किया कि मंगलवार को किए गए ये बड़े और विनाशकारी हमले जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य बेस पर ईरान द्वारा किए गए पिछले हमले का सीधा और कड़ा जवाब थे। इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि ईरानी बलों ने हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों में बारूदी सुरंगें बिछाने का प्रयास किया था जिसमें वे पूरी तरह विफल रहे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि स्थिति बिगड़ी, तो इससे भी कहीं अधिक बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाने की पूरी तैयारी रखी गई है।
आईआरजीसी ने दी बदला लेने की धमकी, अमेरिकी अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन दागे
अमेरिकी सैन्य अभियान के जवाब में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के शीर्ष कमान ने एक आपातकालीन आधिकारिक बयान जारी किया। आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका को ईरानी संप्रभुता और क्षेत्र पर ये हमले करने के अपने फैसले पर भारी पछतावा होगा। इस बयान के कुछ ही समय बाद ईरानी राज्य समाचार एजेंसियों ने पुष्टि की कि ईरानी सशस्त्र बलों ने मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों और अमेरिकी क्षेत्रीय हितों को निशाना बनाकर अपनी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसके तहत कई बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे गए हैं।
दोनों देशों की सेनाओं के बीच शुरू हुई इस सीधी गोलाबारी ने फारस की खाड़ी और आसपास के पूरे इलाके में अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है, जहां वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी लगातार दुश्मनी के कारण वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पहले से ही ठप पड़ी हुई थी।
फरवरी से लेकर जून समझौते के समाप्त होने तक का पूरा घटनाक्रम
ईरान पर अमेरिकी हमलों की यह नई लहर दो शक्तिशाली देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य टकराव का नवीनतम अध्याय है। इस संघर्ष की शुरुआत इस साल 28 फरवरी को हुई थी, जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के विभिन्न हिस्सों में सैन्य और परमाणु ठिकानों पर व्यापक संयुक्त हमले किए थे। उस समय ईरान ने भी इसके जवाब में इजरायल, क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी के पड़ोसी सहयोगी देशों पर भीषण मिसाइल हमले किए थे, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए अति महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद करना पड़ा था।
उस समय बढ़ते युद्ध को नियंत्रित करने के लिए वाशिंगटन और तेहरान के राजनयिकों ने जून महीने में एक द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग कहा गया था। इस मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम की अवधि को आगे बढ़ाना था। हालांकि, अब उस ऐतिहासिक समझौते की तय समयसीमा समाप्त हो चुकी है और दोनों में से किसी भी पक्ष ने इसे आगे नहीं बढ़ाया, जिसके कारण दोनों देशों के बीच कूटनीति समाप्त हो गई और प्रत्यक्ष सैन्य युद्ध फिर से शुरू हो गया।
समझौते की समाप्ति के बाद से ही समुद्र में सैन्य झड़पें काफी बढ़ गई थीं। ईरानी नौसेना उन जहाजों पर सीधे हमले कर रही थी, जिन पर तेहरान की अनुमति के बिना जलडमरूमध्य पार करने का प्रयास करने का आरोप था। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी नौसैनिक बेड़े ने ईरानी बंदरगाहों की पूरी तरह से नौसैनिक घेराबंदी कर रखी है ताकि ईरान के समुद्री व्यापार को रोका जा सके।
अतिरिक्त आर्थिक प्रतिबंध और दोनों देशों का कूटनीतिक रुख
सैन्य मोर्चे पर हो रही बमबारी के साथ-साथ वाशिंगटन ने तेहरान पर आर्थिक शिकंजा कसने के प्रयास भी तेज कर दिए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने 24 अगस्त को एक नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंध पैकेज की घोषणा की थी। इस प्रतिबंध अभियान का उद्देश्य तेहरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणालियों से पूरी तरह अलग-थलग करना और ईरान के साथ व्यापार या वित्तीय लेनदेन करने वाले सहयोगी देशों तथा विदेशी संस्थाओं पर कड़े द्वितीयक प्रतिबंध लागू करना था।
ईरानी सरकारी अधिकारियों और राज्य संचालित मीडिया ने इन अमेरिकी प्रतिबंधों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इन्हें निष्प्रभावी करार दिया था। ईरानी पक्ष का कहना था कि यह कदम अमेरिका की पुरानी असफल आर्थिक नीतियों की ही अगली कड़ी है, जिसे वाशिंगटन क्षेत्र में मिली अपनी सैन्य असफलताओं को छिपाने के उद्देश्य से उठा रहा है।
इन तमाम सैन्य झड़पों और आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। ईरानी राज्य मीडिया ने देश के शीर्ष नेतृत्व का रुख सामने रखते हुए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन का बयान प्रकाशित किया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका पिछले समझौते की शर्तों और प्रतिबद्धताओं का पूरी तरह से पालन करने के लिए वापस लौटता है, तो ईरान भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए समझौते का पालन करने के लिए तैयार है।


















