चीन के व्यापारिक मॉडल पर चौतरफा दबाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में ईरान और वेनेजुएला के साथ चीन के व्यावसायिक संबंधों को निशाना बनाकर नए प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं। राबोबैंक के आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, चीन इस समय विशाल व्यापार अधिशेष और सुस्त घरेलू मांग के दोहरे संकट से जूझ रहा है। घरेलू स्तर पर खपत कमजोर रहने के कारण देश को अपनी विनिर्माण क्षमता का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों में खपाना पड़ता है। हालांकि, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और नई व्यापारिक रुकावटों के चलते चीन के लिए निर्यात के जरिए अपनी सुस्त अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
विनिर्माण आंकड़े और घरेलू खपत का गहराता संकट
चीन के विनिर्माण क्षेत्र को लेकर सामने आ रहे आंकड़े मिला-जुला संकेत दे रहे हैं। हाल ही में जारी गैर-सरकारी आंकड़ों के मुताबिक विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार दर्ज किया गया है और इसकी रफ्तार अर्थशास्त्रियों के अनुमान से कहीं अधिक रही है। यदि ये आंकड़े जमीनी हकीकत को सही तरीके से दर्शाते हैं, तो इसका अर्थ यह है कि चीन में कमजोर घरेलू मांग और बढ़ते निर्यात योग्य अधिशेष की समस्या और भी गंभीर हो गई है। ऐसी स्थिति में चीन को अपनी वस्तुओं के लिए विदेशी बाजारों पर निर्भरता बढ़ानी होगी। वहीं दूसरी ओर, यदि ये आंकड़े वास्तविक स्थिति नहीं दिखाते हैं, तो यह संकेत है कि चीन का निर्यात इंजन भी सुस्त पड़ रहा है और आधिकारिक आर्थिक विकास लक्ष्य हासिल करने पर गंभीर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
यूरोपीय संघ की सख्ती और मुक्त व्यापार के सिद्धांतों में बदलाव
वैश्विक व्यापार मंच पर केवल अमेरिकी दबाव ही एकमात्र चुनौती नहीं है। यूरोपीय संघ भी चीन के साथ अपने रिकॉर्ड व्यापार घाटे को कम करने के लिए सख्त रुख अपना रहा है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि यदि जारी व्यापार वार्ता के जरिए यूरोपीय संघ के रिकॉर्ड व्यापार घाटे में ठोस कमी नहीं आती है, तो यूरोपीय संघ को नियामक साधनों का सहारा लेना पड़ेगा। इसमें यूरोपीय संघ का प्रसिद्ध 'ट्रेड बाज़ूका' यानी जबरन व्यापार विरोधी साधन भी शामिल है। जब वैश्विक व्यापार में सभी देश नियमों का पालन नहीं करते, तो शास्त्रीय अर्थशास्त्र का रिकॉर्डियन तुलनात्मक लाभ सिद्धांत भी उतना असरदार नहीं रह जाता। अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति में अब संरक्षणवाद का प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है।
विदेशी मुद्रा और सरकारी बॉन्ड बाजारों में उथल-पुथल
वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती से प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया है। मंगलवार को GBP/USD की जोड़ी कमजोर होकर 1.3500 के निचले स्तरों तक गिर गई, जो दो सप्ताह का निचला स्तर है। यह गिरावट डॉलर में आए उछाल और अमेरिका-ईरान संकट को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच दर्ज की गई। इसी तरह, EUR/USD में गिरावट दर्ज की गई और यह 1.1600 के प्रमुख सपोर्ट लेवल से नीचे आ गया। दूसरी ओर, वैश्विक सरकारी बॉन्ड बाजारों में नई महीने की शुरुआत के साथ भारी बिकवाली देखी गई। ब्रिटेन का बॉन्ड बाजार इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां 2-वर्षीय और 10-वर्षीय सरकारी यील्ड में 10 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी हुई और बाद में यह क्रमशः 7 और 8 बेसिस पॉइंट की बढ़त पर स्थिर हुई।
कच्चे तेल में तेजी और कमोडिटी बाजारों का हाल
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतें दबाव में दिखीं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना गिरकर $4,300 प्रति ट्रॉय औंस के महत्वपूर्ण स्तर के पास पहुंच गया। सोने में यह गिरावट अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी के कारण दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ, ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। दक्षिणी ईरान में नए धमाकों की रिपोर्टों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (CL=F) की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई और यह $90.60 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव $85.76 की तुलना में 5.64% अधिक है। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो RSI(14) 64 पर है, जबकि 20-दिवसीय EMA $84.07, 50-दिवसीय EMA $83.23 और 200-दिवसीय EMA $76.33 पर बना हुआ है। तेल बाजार के लिए तात्कालिक सपोर्ट S1 $87.62 और रेजिस्टेंस R1 $92.10 पर स्थित है।
डीजल क्रैक स्प्रेड में रिकॉर्ड तेजी और क्रिप्टो बाजार की स्थिति
ईंधन बाजार में अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड (WTI के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम) इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के पार निकल गया और इंट्राडे कारोबार के दौरान $102.00 से अधिक के रिकॉर्ड स्तर को छू गया। यह तेजी वैश्विक स्तर पर रिफाइनिंग क्षमता और मध्यवर्ती ईंधनों की आपूर्ति में भारी खिंचाव को दर्शाती है। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन ने ETF में फिर से निवेश आने के कारण $78,000 के सपोर्ट स्तर के ऊपर अपनी पकड़ बनाए रखी। एथेरियम संस्थागत निवेशकों के समर्थन के बल पर $2,450 के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि एक्सआरपी अपने 200-दिवसीय EMA सपोर्ट के पास दबाव में रहा।


















