बुनियादी ढांचा क्षेत्र में राजमार्ग परियोजनाओं का संचालन करने वाला क्यूब हाईवेज ट्रस्ट प्राथमिक बाजार से 5,000 करोड़ रुपये का विशाल सार्वजनिक निर्गम पेश करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। मौजूदा महीने में ही इस पेशकश के बाजार में दस्तक देने की संभावना जताई गई है। यह पूरी प्रक्रिया ऑफर फॉर सेल अर्थात ओएफएस व्यवस्था के तहत संचालित की जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि निर्गम के माध्यम से कोई नवीन इकाइयां जारी नहीं की जाएंगी और न ही संस्था के खाते में कोई नई पूंजी आएगी, बल्कि मौजूदा हिस्सेदार ही अपनी यूनिटों की बिक्री करके नकदी जुटाएंगे। इस कदम का केंद्रीय लक्ष्य बाजार में सूचीबद्धता हासिल करके व्यापक निवेशक समुदाय को जोड़ना और ट्रेडिंग की तरलता को बेहतर बनाना है।
राजमार्ग नेटवर्क और संचालन का भौगोलिक विस्तार
ट्रस्ट के नियंत्रण में मौजूद सड़क बुनियादी ढांचे का जाल देश भर में व्यापक स्तर पर फैला हुआ है। 31 मार्च, 2026 की आधिकारिक स्थिति के अनुसार, यह उपक्रम देश के 12 अलग-अलग राज्यों सहित एक केंद्र शासित प्रदेश में सक्रिय 27 चालू राजमार्ग संपत्तियों का प्रबंधन देख रहा है। इन सभी परियोजनाओं को मिलाकर कुल लंबाई 8,754 लेन किलोमीटर दर्ज की गई है। सड़क अनुबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इन परियोजनाओं की औसत बची हुई रियायत मियाद 18 साल की है, जो दीर्घकालिक राजस्व सुरक्षा प्रदान करती है। वित्त वर्ष 2025-26 से जुड़ी वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट में ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय सी. सेकर ने स्पष्ट किया कि उनका पूरा फोकस वित्तीय संतुलन, कुशल संचालन, नपे-तुले अधिग्रहण और यूनिटधारकों को लगातार वितरण देने पर टिका रहेगा।
टोल राजस्व का दबदबा और निवेशकों को भारी नकद वितरण
कारोबारी मॉडल के विश्लेषण से पता चलता है कि ट्रस्ट की बैलेंस शीट में मुख्य योगदान टोल संग्रह करने वाले प्रोजेक्ट्स का है। पूरे पोर्टफोलियो में लगभग 85 प्रतिशत की भारी हिस्सेदारी टोल मार्गों की है, जिन्हें वाहनों की आवाजाही में तेजी और मुद्रास्फीति के अनुसार टोल दरों में होने वाली बढ़ोतरी का सीधा फायदा मिलता है। वहीं, शेष 15 प्रतिशत ढांचा एन्यूटी मॉडल पर निर्भर है, जहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के साथ हुए अनुबंधित समझौतों के जरिए नियमित और सुरक्षित आय की आवक बनी रहती है। नकदी प्रवाह की इसी मजबूती के चलते क्यूब हाईवेज ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपनी प्रत्येक यूनिट पर 13.77 रुपये के लाभांश वितरण का फैसला किया। इसके फलस्वरूप पूरे कारोबारी साल में यूनिटधारकों की जेब में कुल 1,851 करोड़ रुपये की राशि पहुंचाई गई।
कर्ज की मौजूदा स्थिति और भविष्य की विस्तार योजनाएं
वित्तीय देनदारियों पर नजर डालें तो मार्च, 2026 के समापन पर ट्रस्ट पर शुद्ध देनदारी 17,768 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस अवधि में कंपनी का ऋण और उपक्रम मूल्य के बीच का अनुपात 46.82 प्रतिशत दर्ज किया गया। बीते वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान संस्था ने आक्रामक विस्तार दिखाते हुए 9 नए सौदे पूरे किए, जिससे इसकी कुल प्रबंधनाधीन संपत्ति का आकार छलांग लगाकर 36,842 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। विकास की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए ट्रस्ट ने चार अतिरिक्त सड़क परियोजनाओं के वास्ते प्रतिबद्धता पत्र भी हासिल कर लिए हैं, जिनका सम्मिलित उपक्रम मूल्य करीब 7,300 करोड़ रुपये बैठता है। इन नए प्रोजेक्ट्स के औपचारिक तौर पर जुड़ते ही संस्था का नेटवर्क 13 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में कुल 31 परिसंपत्तियों तक फैल जाएगा।


















