विदेशी मुद्रा बाजार में स्विस फ्रैंक के मुकाबले अमेरिकी डॉलर एक बेहद संवेदनशील तकनीकी मुकाम पर टिका हुआ दिखाई दे रहा है। हालिया कारोबारी दायरे में 0.8164 से 0.8198 के बीच उतार-चढ़ाव देखने के बाद यह करेंसी जोड़ी 0.8205 के प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर के ठीक नीचे स्थिर बनी हुई है। यूओबी के विश्लेषकों क्वेक सेर लियांग और ली सू एन के अनुसार, अल्पकालिक तौर पर डॉलर इस 0.8205 के स्तर को हल्का पार करने की कोशिश तो कर सकता है, लेकिन मौजूदा गति को देखते हुए इस स्तर से ऊपर टिके रहना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। किसी भी बड़े और स्थायी उछाल के लिए इस स्तर के ऊपर टिकना अनिवार्य माना जा रहा है, ताकि आगे 0.8245 तक का रास्ता साफ हो सके। दूसरी तरफ, नीचे की दिशा में 0.8145 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट बनकर उभरा है।
तकनीकी स्तरों पर नजर: दैनिक और मध्यम अवधि का विश्लेषण
अल्पकालिक 24 घंटे के तकनीकी दृष्टिकोण की बात करें तो पहले डॉलर के 0.8150 से 0.8195 के बीच बने रहने की संभावना जताई गई थी। इसके बाद वास्तविक कारोबार 0.8164 से 0.8198 के दायरे में सीमित रहा। हालांकि इस सीमित हलचल के दौरान खरीदारी की रफ्तार में कोई बहुत तेज इजाफा नहीं देखा गया है, फिर भी डॉलर के पास 0.8205 के अहम प्रतिरोध स्तर को क्षणिक रूप से छूने या उसके पार जाने की गुंजाइश बची हुई है। इसके बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत मोमेंटम के अभाव में वह इस बाधा के पार टिक नहीं पाएगा और अगला बड़ा स्तर 0.8245 फिलहाल पहुंच से दूर ही दिख रहा है। निकट अवधि में डॉलर के लिए प्राथमिक सपोर्ट 0.8175 पर स्थित है, जिसके टूटने पर 0.8160 का निचला स्तर देखा जा सकता है।
वहीं एक से तीन सप्ताह के मध्यम अवधि के नजरिए पर गौर करें तो 15 सितंबर को जब स्पॉट रेट 0.8175 पर था, तब यह रेखांकित किया गया था कि 0.8245 तक बढ़ने के लिए 0.8205 के ऊपर ब्रेकआउट और ठहराव बेहद आवश्यक है। इस दृष्टिकोण में अब तक कोई बदलाव नहीं आया है। नकारात्मक पहलू यह है कि यदि डॉलर फिसलकर 0.8145 के नीचे जाता है, जो पहले 0.8130 पर स्थित मजबूत सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा था, तो यह साफ संकेत होगा कि पिछले सप्ताह के अंत से बना तेजी का दबाव पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अन्य प्रमुख करेंसियों की स्थिति
व्यापक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के उच्च स्तर के करीब मजबूती से टिका हुआ है। इस मजबूती के पीछे फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर वृद्धि और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पैदा हुई मुद्रास्फीति की चिंताएं प्रमुख वजह हैं। इन चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की मांग को बढ़ाया है, जिसका सीधा फायदा डॉलर को मिल रहा है।
इस वैश्विक माहौल का असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन पर भी साफ देखा जा सकता है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में दबाव में है और बुधवार के एशियाई सत्र में मासिक निचले स्तर के करीब 0.7100 का बचाव करने का प्रयास करता दिखा। जोखिम के प्रति संवेदनशील मानी जाने वाली यह मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख और वैश्विक तनाव के कारण बैकफुट पर है। इसी प्रकार, यूएसडी/जेपीवाई बुधवार को एशियाई सत्र में 155.00 के ऊपर निकलकर एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की महंगाई और फेड के रुख के अलावा, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी डॉलर की वैश्विक आरक्षित मुद्रा की प्रतिष्ठा को सहारा दिया है। हालांकि, फेड के आगामी फैसले और बैंक ऑफ जापान की बैठक को देखते हुए कारोबारी अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं, जिससे यह जोड़ी 155.50 के स्तर से नीचे ही बनी हुई है।
सोने की चाल और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां
कमोडिटी बाजार में सोना बुधवार को यूरोपीय कारोबार के दौरान मामूली इंट्राडे बढ़त को बनाए रखने में संघर्ष करता दिखा और 4,350 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे बना रहा। दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद डॉलर की चाल में आए हल्के ठहराव ने कीमती धातु को कुछ सहारा तो दिया, लेकिन निवेशक फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले जैसे बड़े घटनाक्रम से पहले आक्रामक रुख अपनाने से बच रहे हैं और किनारे बैठकर स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।
इस पूरे बाजार परिदृश्य के केंद्र में फेडरल रिजर्व का निर्णय खड़ा है। इस बैठक से पहले आए मजबूत अमेरिकी अगस्त रोजगार आंकड़ों ने ब्याज दर बाजारों में नीतिगत सख्ती की आशंकाओं को हवा दी थी, लेकिन हाल में सामने आए अगस्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों को अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर, जापान की अति-निम्न ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की है, जिससे जापानी येन वैश्विक स्तर पर फंडिंग का सबसे सस्ता स्रोत बन गया था। चूंकि बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह मौद्रिक नीति को पुनः सख्त करने की उम्मीद की जा रही है, यह ऐतिहासिक लाभ अब एक नए चरण में प्रवेश कर सकता है। जहां दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में इजाफा किया, वहीं जापान लंबे समय तक दुनिया में एक अपवाद बना रहा था।



















