अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का रुख बना हुआ है, जिससे निवेशकों का ध्यान अब निचले स्तरों के संभावित सपोर्ट पर केंद्रित हो गया है। सोसिएते जेनेराल के रणनीतिकारों के अनुसार, 200 दिनों के मूविंग एवरेज के आसपास 4,510 से 4,540 डॉलर के स्तर से ऊपर टिकने में असमर्थ रहने के बाद सोने में बिकवाली का दायरा और गहरा गया है। धातु फिलहाल 4,095 डॉलर के अंतरिम अनुमानित स्तर की तरफ बढ़ रही है, जहां इसे तात्कालिक सहारा मिल सकता है। यदि यह स्तर टूटता है, तो कीमतों में 4,000 डॉलर और उसके बाद जून व जुलाई के निचले स्तर 3,960 से 3,940 डॉलर तक की गिरावट देखने को मिल सकती है, जो कई महीनों के दायरे की निचली सीमा है।
तकनीकी संकेतकों में मंदी और सोसिएते जेनेराल का आकलन
सोसिएते जेनेराल के विश्लेषकों का मानना है कि यदि धातु 4,095 डॉलर के स्तर की रक्षा करने में नाकाम रहती है, तो गिरावट का यह दौर और तीखा हो सकता है। उनके मुताबिक, 4,000 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर और 3,960 से 3,940 डॉलर का दायरा एक मजबूत आधार का काम कर सकता है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, सोना (GC=F) 4,190 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 4,157 डॉलर से 0.79 प्रतिशत अधिक है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 3,901 से 5,586 डॉलर के बीच दर्ज किया गया है। ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 0.46 गुना पर दर्ज हुआ है, जो सीमित भागीदारी को दर्शाता है।
तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14 दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 38 पर बना हुआ है, जो कमजोरी का संकेत है। एमएसीडी (MACD) इंडिकेटर -66.83 पर है जबकि इसका सिग्नल -48.85 पर है, जिसका हिस्टोग्राम -17.98 मंदी का रुख दर्शा रहा है। एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज में 20-डे ईएमए 4,284 डॉलर, 50-डे ईएमए 4,333 डॉलर और 200-डे ईएमए 4,439 डॉलर पर मौजूद है। वहीं 50-डे सिंपल मूविंग एवरेज 4,370 डॉलर और 200-डे एसएमए 4,552 डॉलर पर स्थित है। ईएमए50 के ईएमए200 से नीचे जाने के कारण चार्ट पर डेथ क्रॉस बना हुआ है, जो लंबी अवधि के मंदी के रुझान की पुष्टि करता है। बॉलिंजर बैंड 4,103 से 4,508 डॉलर के बीच फैला है, जिसका मध्य स्तर 4,306 डॉलर है और कीमत वर्तमान में बैंड के अंदर है। 14 दिवसीय एडीएक्स 20 पर होने से रुझान कमजोर या सीमित दायरे में दिखाई देता है। स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 19 और सिग्नल लाइन 10 पर है, जबकि 14 दिवसीय एटीआर 92.10 डॉलर पर दर्ज हुआ है। 20 दिनों का सपोर्ट 4,131 डॉलर और रेजिस्टेंस 4,480 डॉलर के करीब है। प्रमुख दैनिक स्तरों में पिवट 4,176 डॉलर, पहला रेजिस्टेंस 4,222 डॉलर, दूसरा रेजिस्टेंस 4,253 डॉलर, पहला सपोर्ट 4,144 डॉलर और दूसरा सपोर्ट 4,099 डॉलर पर स्थित है।
ट्रेजरी यील्ड्स और डॉलर के असर से कीमतों में उतार-चढ़ाव
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोना 4,104 डॉलर के दो महीने के निचले स्तर तक फिसल गया था। इसके बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में आई नरमी ने अमेरिकी डॉलर पर दबाव डाला, जिससे सोने को कुछ सहारा मिला और यह 4,173 डॉलर के करीब पहुंचकर दिन में 0.82 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा। फिक्स्ड इनकम बाजार में लगातार बिकवाली के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के पास बनी हुई हैं। यह स्थिति भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के साथ मिलकर अमेरिकी डॉलर को मजबूती प्रदान कर रही है, भले ही अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं घट रही हों।
मुद्रा बाजार के अन्य मोर्चों पर भी इन व्यापक कारकों का प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) एशियाई सत्र के दौरान फिसल गई, जिससे पिछले हफ्ते छुए गए दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई दो दिन की रिकवरी पर ब्रेक लग गया। हालांकि, इस महीने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को कुछ मजबूती दे सकती हैं। दूसरी ओर, डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) मंगलवार की सुबह यूरोपीय सत्र में फिर से 158.00 के पार निकल गया। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद जापानी येन दबाव में बना हुआ है, क्योंकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स और भू-राजनीति डॉलर को समर्थन दे रहे हैं।
यूरोपीय राजनीति और केंद्रीय बैंकों की चुनौतियां
वैश्विक वित्तीय बाजारों में आज किसी बड़े पहले दर्जे के आर्थिक आंकड़े की घोषणा निर्धारित नहीं है। इसलिए निवेशकों का पूरा ध्यान यूरोप के बाजार घटनाक्रमों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात पर टिका हुआ है। फ्रांस में आने वाले दिनों में यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण रहेगा कि क्या सोशलिस्ट पार्टी और मरीन ले पेन की नेशनल रैली बजट को लेकर सरकार को गिराने के संकेत देती हैं या नहीं। फ्रांस की राजनीतिक अस्थिरता यूरोपीय बॉन्ड बाजारों और निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
इधर यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) के सामने भी नीतिगत असमंजस गहरा रहा है। आम परिस्थितियों में मुद्रास्फीति के अपने लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चलने पर ईसीबी के पास ब्याज दरें बढ़ाने का सीधा विकल्प होता। लेकिन मौजूदा हालात सामान्य नहीं हैं। बॉन्ड बाजार में यील्ड्स की बढ़ोतरी अपने आप वित्तीय परिस्थितियों को सख्त बना रही है, जिससे ईसीबी के लिए मौद्रिक नीति पर स्पष्ट निर्णय लेना बेहद पेचीदा हो गया है। इन तमाम वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने के सुरक्षित निवेश वाले प्रवाह और डॉलर के मजबूत रुख के बीच खींचतान जारी रहने के आसार हैं।





















