अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है, जिसके चलते कीमती धातु में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। एशियाई व्यापार सत्र के दौरान पीली धातु करीब 0.2 प्रतिशत टूटकर 4,115 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई, जबकि हाजिर बाजार में यह 4,160 डॉलर के आसपास संघर्ष करती दिखी। हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में आई जोरदार तेजी और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों के कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को मजबूत सहारा मिला है। सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले रिटर्न में इस उछाल ने बिना ब्याज देने वाली सुरक्षित संपत्तियों, विशेषकर सोने की चमक को फिलहाल फीका कर दिया है।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और ऊर्जा बाजार की हलचल
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हालिया मजबूती के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में आया उतार-चढ़ाव एक प्रमुख कारक बनकर उभरा है। ऊर्जा आपूर्ति के संभावित व्यवधानों ने वैश्विक मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं दोबारा बढ़ा दी हैं। बीते कारोबारी सत्र में तेल की कीमतों में तब आंशिक मुनाफावसूली देखने को मिली थी, जब एक अपुष्ट खबर में दावा किया गया कि कतर और पाकिस्तान ने अमेरिका तथा ईरान के बीच गतिरोध समाप्त करने के लिए एक मध्यस्थता योजना पेश की है। हालांकि, यह राहत अधिक समय तक नहीं टिक सकी क्योंकि ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि समझौते के संबंध में चल रहे दावे सही नहीं हैं, लेकिन उन्होंने यह पुष्टि अवश्य की कि अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता जारी है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान और कतर जैसे मध्यस्थ देशों के जरिए कूटनीतिक संवाद के रास्ते खुले हुए हैं। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और कूटनीतिक वार्ताओं की इस मिली-जुली स्थिति ने कच्चे तेल को सहारा दिया, जिससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तरों पर बनी रही और सोने की कीमतों पर सीधा असर पड़ा।
तकनीकी कंपनियों का भारी कर्ज और एआई पर पूंजीगत व्यय
वित्तीय बाजारों में इस समय अमेरिकी हाइपरस्केलर्स यानी प्रमुख तकनीकी कंपनियों की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) निवेश योजनाओं पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। ये भारी-भरकम पूंजीगत खर्च योजनाएं बॉन्ड यील्ड की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। तकनीकी कंपनियां अपने एआई बुनियादी ढांचे को तैयार करने के लिए कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार से बड़े पैमाने पर उधारी ले रही हैं। बाजार भागीदारों की नजर अब मेटा के तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजों पर टिकी है, जिससे आगामी बाजार दिशा का अंदाजा लगाया जा सकेगा।
गोल्डमैन सैक्स के आकलन के अनुसार, मेटा जैसी दिग्गज एआई हाइपरस्केलर कंपनियां अगले साल अपने कुल पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा सकती हैं। इस विशाल पूंजीगत आवश्यकता को पूरा करने के लिए कंपनियों द्वारा जारी किए जा रहे ऋण पत्रों से बॉन्ड बाजार में यील्ड पर ऊपर की तरफ दबाव बना हुआ है।
गार्टनर द्वारा जारी एक हालिया अध्ययन से इस पूंजीगत विस्तार के दीर्घकालिक जोखिम भी उजागर हुए हैं। इस अध्ययन के मुताबिक, एआई बुनियादी ढांचा तैयार करने वाली कंपनियां वर्ष 2030 तक 8.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की भारी राशि खर्च करने की राह पर हैं। इसके विपरीत, उपभोक्ता और उद्यम स्तर पर एआई से होने वाला कुल राजस्व केवल 3.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। राजस्व और खर्च के इस विशाल अंतर के कारण वर्ष 2032 तक 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक मूल्य की परिसंपत्तियों के राइट-डाउन यानी मूल्य ह्रास का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इस भारी उधारी और पूंजीगत दबाव ने ऋण बाजार की दरों को मजबूत रखा है, जिसका सीधा नुकसान सोने जैसी संपत्तियों को उठाना पड़ रहा है।
तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख समर्थन स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर सोने का परिदृश्य मंदी के रुझान की ओर इशारा कर रहा है। चार्ट पर कीमती धातु 4,124.56 डॉलर के स्तर पर दबाव में दिखी और यह 4,178.85 डॉलर के 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) से नीचे बनी हुई है। जब तक कीमतें इस ऊपरी गतिशील बाधा के नीचे रहेंगी, तब तक किसी भी तेजी के प्रयास में बिकवाली का दबाव हावी रहने की पूरी संभावना है।
दैनिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 41.77 पर बना हुआ है, जो हल्के नकारात्मक दायरे का संकेत देता है। यह स्थिति दर्शाती है कि बाजार में खरीदारों की गति बेहद कमजोर है, हालांकि बाजार अभी पूरी तरह ओवरसोल्ड क्षेत्र में नहीं पहुंचा है। ताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक, 14-दिवसीय आरएसआई 42 के स्तर पर है, जबकि एमएसीडी -53.64 पर है जो -57.81 के सिग्नल से ऊपर रहते हुए 4.17 के हिस्टोग्राम के साथ सीमित स्थिरता दिखा रहा है। लंबी अवधि के मूविंग एवरेज में 50-दिवसीय ईएमए 4,282 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,438 डॉलर पर स्थित है, जो दीर्घकालिक डेथ क्रॉस संरचना को प्रदर्शित कर रहे हैं।
सोने के लिए 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 4,067 डॉलर से 4,338 डॉलर के बीच फैला हुआ है, जबकि दैनिक औसत ट्रू रेंज यानी वोलैटिलिटी बफर 81.74 डॉलर पर दर्ज किया गया है। ऊपर की तरफ पहला प्रमुख अवरोध स्तर पिवट 4,176 डॉलर और आर1 रेसिस्टेंस 4,196 डॉलर पर है, जिसके बाद आर2 स्तर 4,231 डॉलर पर आता है। मौजूदा मंदी के दबाव को कम करने और एक स्थायी सुधार शुरू करने के लिए कीमतों का इन स्तरों के ऊपर टिकना अनिवार्य होगा। नीचे की तरफ पहला मजबूत समर्थन एस1 4,140 डॉलर और एस2 4,120 डॉलर पर है, जबकि 4,000 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर सबसे अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की भूमिका
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में अपनी केंद्रीय भूमिका निभाई है। आभूषणों के निर्माण और इसकी चमक के अलावा, सोने को दुनिया भर में संकट के समय सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। सोने का कोई विशिष्ट जारीकर्ता या संप्रभु सरकार नहीं होती, जिसके कारण इसे मुद्रास्फीति और अवमूल्यन के खिलाफ सबसे भरोसेमंद हेज के तौर पर देखा जाता है।
दुनिया के विभिन्न केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े खरीदार और धारक हैं। आर्थिक अस्थिरता के दौर में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को स्थिरता देने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का विविधीकरण करते हैं। भारी स्वर्ण भंडार किसी भी देश की वित्तीय साख और कर्ज चुकाने की क्षमता के प्रति वैश्विक बाजारों में भरोसा पैदा करता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड बनाते हुए अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 70 अरब डॉलर थी। यह इतिहास में किसी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी आधिकारिक खरीद दर्ज की गई थी। वर्तमान में चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।
सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ ऐतिहासिक रूप से विपरीत संबंध रहता है। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तब सोने की कीमतें आमतौर पर बढ़ती हैं क्योंकि यह अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सस्ता हो जाता है। इसी तरह शेयर बाजार और जोखिम भरी संपत्तियों की तेजी सोने के आकर्षण को कम करती है, जबकि इक्विटी बाजारों की तेज गिरावट में सोने को सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर भारी मांग मिलती है। वर्तमान में मजबूत डॉलर और ऊंची यील्ड ने सोने की इस बढ़त को रोक रखा है।
मुद्रा बाजार का माहौल और आने वाले आर्थिक आंकड़े
वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी मिश्रित रुझान देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार चौथे दिन सकारात्मक रुख के साथ 0.7000 के ऊपर कारोबार कर रहा है, जो तीन सप्ताह का उच्च स्तर है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के डिप्टी गवर्नर एंड्रयू हॉसर के सख्त नीतिगत बयानों और महंगाई की चिंताओं ने इस मुद्रा जोड़ी को सहारा दिया है, हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच बनी अनिश्चितता के कारण डॉलर की मांग ऊपरी स्तरों पर लगाम लगा रही है।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 158.50 के स्तर के पास एक सीमित दायरे में बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के समय को लेकर जारी अनिश्चितता येन को कमजोर बनाए हुए है, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीतिगत उम्मीदें डॉलर को मजबूत कर रही हैं। इसके साथ ही बैंक ऑफ जापान की ओर से मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंका येन की गिरावट को सीमित कर रही है।
आगामी वृहद आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो ब्रिटेन का राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय सितंबर महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़े जारी करने जा रहा है। इसके साथ ही उत्पादक मूल्य सूचकांक और खुदरा बिक्री के आंकड़े भी घोषित किए जाएंगे। ये आंकड़े बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दरों के रुख को स्पष्ट करने में मदद करेंगे, जिससे वैश्विक मुद्रा विनिमय दरों और अंततः डॉलर के जरिए सोने की कीमतों पर नया असर देखने को मिल सकता है।


















