अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की भारी बिकवाली के बीच ब्रिटिश पाउंड ने शानदार वापसी दर्ज की है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव परिणामों की अनिश्चितता और वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध की संभावनाओं ने डॉलर इंडेक्स को कमजोर किया है, जिसका सीधा फायदा पाउंड स्टर्लिंग को मिल रहा है। कारोबारी सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 0.4% की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। इसके साथ ही मुद्रा बाजार में निवेशकों की नजरें अब पूरी तरह से बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीतिगत फैसलों पर टिक गई हैं, जहां ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की व्यापक उम्मीद जताई जा रही है।
ब्रिटिश पाउंड का तकनीकी ढांचा और 1.36 का लक्ष्य
मुद्रा रणनीतिकारों के अनुसार ब्रिटिश पाउंड में आई हालिया मजबूती तकनीकी रूप से काफी सकारात्मक संकेत दे रही है। पाउंड का यह उछाल यूरो द्वारा डॉलर के खिलाफ की गई बढ़त के अनुरूप ही देखा जा रहा है। तकनीकी विश्लेषण में 200 दिवसीय मूविंग एवरेज 1.3425 के ऊपर दैनिक क्लोजिंग को पाउंड के लिए बेहद रचनात्मक माना जा रहा है। इसके अलावा 1.3470 का स्तर और भी अधिक महत्वपूर्ण है, जो अगस्त से अक्टूबर के बीच आई गिरावट का 61.8% रिट्रेसमेंट स्तर दर्शाता है।
स्कॉटियाबैंक के एफएक्स रणनीतिकारों का आकलन है कि मध्य अक्टूबर के निचले स्तर से पाउंड में जो तेज सुधार शुरू हुआ था, उसने साप्ताहिक चार्ट पर एक बड़ा रिवर्सल पैटर्न बनाया है। यह ढांचा आने वाले हफ्तों में ब्रिटिश पाउंड को 1.36 के ऊपरी दायरे की ओर ले जाने का लक्ष्य रखता है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार GBP/USD 1.35 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 1.34 से 0.47% की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय आरएसआई 64 पर है, जबकि 20 दिवसीय बॉलिंजर बैंड 1.32 से 1.35 के दायरे में है और कीमत ऊपरी बैंड के आसपास बनी हुई है। पिवट स्तर 1.35 पर है, जिसमें अगला प्रतिरोध R1 1.35 और R2 1.36 पर स्थित है, जबकि तात्कालिक समर्थन स्तर S1 1.34 पर देखा जा रहा है।
यूके पीएमआई आंकड़ों का सीमित असर
ब्रिटेन के आर्थिक मोर्चे पर अक्टूबर महीने के अंतिम सेवा पीएमआई और कंपोजिट पीएमआई आंकड़ों में मामूली गिरावट दर्ज की गई। अंतिम आंकड़े क्रमशः 52.8 और 52.9 पर संशोधित किए गए। हालांकि, इन आंकड़ों में आए थोड़े से संकुचन का पाउंड की तेजी पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा। बाजार के कारोबारी आर्थिक आंकड़ों की तुलना में आगामी मौद्रिक नीति और डॉलर की व्यापक कमजोरी पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। बाजार पूरी तरह से मानकर चल रहा है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड महंगाई को काबू करने के लिए मौद्रिक सख्ती का सिलसिला जारी रखेगा और ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि करेगा।
डॉलर पर चौतरफा दबाव: येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोने में चमक
बुधवार के कारोबारी सत्र में डॉलर की कमजोरी का लाभ केवल पाउंड को ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों को भी मिला। शुरुआती अमेरिकी मध्यावधि चुनावी रुझानों के बाद उभरी राजनीतिक अनिश्चितता ने डॉलर को एक महीने के निचले स्तर पर धकेल दिया। इस राजनीतिक उथल-पुथल के कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट देखी गई, जिससे डॉलर पर बिकवाली का भारी दबाव बना।
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में एशियाई सत्र के दौरान तेज गिरावट दर्ज की गई और USD/JPY गिरकर 158.00 के नीचे आ गया। वाशिंगटन में नीतिगत गतिरोध की संभावना ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की ओर मोड़ा, जिससे येन को समर्थन मिला। इसी प्रकार AUD/USD ने जोरदार वापसी करते हुए लगातार दो दिनों की गिरावट को पीछे छोड़ा और 0.7000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को दोबारा हासिल कर लिया। दूसरी ओर, कमोडिटी बाजार में सोने ने भी राहत की सांस ली। अमेरिकी डॉलर में गिरावट, बॉन्ड प्रतिफल में नरमी और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के मिले-जुले प्रभाव से सोने ने दो दिनों की सुस्ती के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर को पुनः पार कर लिया।


















