अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में पिछले सत्र की गिरावट के बाद सीमित दायरे में कारोबार देखा जा रहा है। गुरुवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान पीली धातु 4,300 डॉलर के नीचे साप्ताहिक निचले स्तरों के आसपास संघर्ष करती नजर आई। बाजार सहभागी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार और दोनों महाशक्तियों के कूटनीतिक रिश्तों की दिशा तय होगी। इसके साथ ही डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल ने कीमती धातुओं की तेजी पर लगाम लगा रखी है।
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल में उछाल
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितता लगातार गहराती जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद तनाव और बढ़ गया, जिसमें उन्होंने ईरान को पूरी तरह नेस्तनाबूत करने की बात कही थी। इसके जवाब में तेहरान के नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि वे किसी भी सूरत में आत्मसमर्पण नहीं करेंगे। दूसरी ओर, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर हमलों का जोखिम भी लगातार बना हुआ है।
इन गंभीर भू-राजनीतिक चिंताओं ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। हाल के हफ्तों के निचले स्तर से उबरते हुए कच्चे तेल की कीमतें दोबारा 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर बढ़ने लगी हैं। तेल की बढ़ती कीमतों के कारण इक्विटी बाजारों में जोखिम उठाने की धारणा कमजोर हुई है और शेयर बाजार की हालिया बढ़त पटरी से उतरती दिखाई दे रही है।
फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और मजबूत डॉलर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं के हालिया बयानों ने ब्याज दरों को लेकर सख्त संदेश दिया है। केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने दरों में और बढ़ोतरी करने या उन्हें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की संभावनाओं को मजबूती दी है। इन आक्रामक उम्मीदों के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार तेजी दर्ज की गई, जिसने अमेरिकी डॉलर को दो महीने के उच्च स्तर के करीब सहारा दिया।
बढ़ती ब्याज दरों और मजबूत डॉलर का यह दोहरा असर सोने के लिए नकारात्मक साबित हो रहा है। आमतौर पर गैर-ब्याज वाली संपत्तियों में निवेश करने की अवसर लागत बढ़ जाती है जब सरकारी बॉन्ड आकर्षक रिटर्न देने लगते हैं। यही कारण है कि निवेशक सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर सोने को चुनने के बजाय नकदी या फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स को तरजीह दे रहे हैं।
व्यापार संघर्ष विराम की समयसीमा और आर्थिक पैकेज
सोने में आई तेज गिरावट को थामने में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के एक बयान ने मदद की है। स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार संघर्ष विराम को 10 जनवरी तक बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि जनवरी तक दोनों पक्षों के बीच एक बड़े आर्थिक पैकेज पर सहमति बन सकती है। इस घोषणा से बाजार को तात्कालिक राहत मिली है और गिरावट की गति धीमी हुई है। फिर भी, जब तक दोनों नेताओं की सीधी बातचीत के परिणाम सामने नहीं आ जाते, तब तक व्यापारी किसी बड़े दांव से बच रहे हैं।
मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों की नीति का गणित
मुद्रास्फीति यानी महंगाई किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की टोकरी के मूल्य में होने वाली वृद्धि को मापती है। इसे सामान्यतः महीने-दर-महीने और साल-दर-साल प्रतिशत बदलाव के रूप में देखा जाता है। केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से कोर महंगाई दर पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिसमें खाद्य और ईंधन जैसे उतार-चढ़ाव वाले घटकों को बाहर रखा जाता है। अधिकतर प्रमुख केंद्रीय बैंकों का लक्ष्य कोर महंगाई को लगभग 2 प्रतिशत के आसपास बनाए रखना होता है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जब 2 प्रतिशत से ऊपर निकलता है, तो केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं। उच्च ब्याज दरें विदेशी पूंजी को आकर्षित करती हैं, जिससे संबंधित देश की मुद्रा मजबूत होती है। ऐतिहासिक रूप से सोने को महंगाई से बचाव का माध्यम माना जाता रहा है, लेकिन अत्यधिक संकट के दौर को छोड़कर सामान्य समय में समीकरण अलग होते हैं। जब महंगाई को रोकने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट और ब्याज देने वाली संपत्तियों के मुकाबले सोने को अपने पास रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है, जिससे सोने पर दबाव बनता है। वहीं इसके विपरीत, जब महंगाई घटती है और ब्याज दरें गिरती हैं, तो सोना निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक विकल्प बन जाता है।
तकनीकी स्तर और चार्ट पर रुझान
दैनिक चार्ट पर नजर डालें तो एक्सएयू/यूएसडी 4,286.99 डॉलर पर कारोबार कर रहा है और अपने सभी प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है, जिससे अल्पकालिक रुझान मंदी का बना हुआ है। वर्तमान में 21-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 4,371.89 डॉलर पर स्थित है, जो मौजूदा मूल्य से काफी ऊपर है। इसके अलावा 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 4,312.48 डॉलर और 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 4,309.05 डॉलर पर सीमित दायरे में अवरोध पैदा कर रहे हैं। वहीं लंबी अवधि का 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 4,541.69 डॉलर के स्तर पर सुधारात्मक दबाव को दर्शा रहा है।
दैनिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 44.52 पर है, जो अत्यधिक बिकवाली की स्थिति के बजाय तेजी के दबाव के कमजोर पड़ने का संकेत देता है। यदि कीमतें ऊपर की ओर रुख करती हैं, तो पहला कड़ा प्रतिरोध 100-दिवसीय एसएमए के 4,309.05 डॉलर और 50-दिवसीय एसएमए के 4,312.48 डॉलर के दायरे में दिखेगा। इसके बाद अगला अवरोध 21-दिवसीय एसएमए पर 4,371.89 डॉलर पर रहेगा। दैनिक आधार पर इन स्तरों से ऊपर का बंद होना ही मंदी के रुझान को हल्का कर सकता है, जहां 200-दिवसीय एसएमए 4,541.69 डॉलर पर मजबूत बाधा बनेगा। गिरावट की स्थिति में पूर्व ट्रेंड-लाइन का ब्रेकआउट स्तर 4,000.03 डॉलर और उसकी मूल शुरुआत 3,990.07 डॉलर पर सहारा देगी, जहां खरीदार सुधार को रोकने का प्रयास कर सकते हैं।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, सोने का मौजूदा भाव 4,323 डॉलर पर है, जो पिछले 4,318 डॉलर के बंद स्तर की तुलना में 0.11 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 3,750 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच है और वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.18 गुना दर्ज किया गया है। लाइव संकेतकों में आरएसआई 42 पर और एमएसीडी -18.60 (सिग्नल 0.69) पर नकारात्मक बना हुआ है। बॉलिंगर बैंड्स 4,264 डॉलर से 4,588 डॉलर के दायरे में हैं, जबकि दैनिक पिवट 4,323 डॉलर, पहला प्रतिरोध 4,338 डॉलर और पहला समर्थन 4,308 डॉलर पर स्थित है।
विदेशी मुद्रा बाजारों और अन्य केंद्रीय बैंकों की हलचल
वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। गुरुवार को एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के स्तर की ओर फिसलता नजर आया। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त रोजगार आंकड़ों में बेरोजगारी दर अनुमानित 4.5 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई, हालांकि रोजगार परिवर्तन 39.5 हजार के आंकड़े के साथ अनुमानों से बेहतर रहा।
उधर डॉलर/येन तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलकर 158.00 के करीब आ गया। बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। जापानी सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी और संभावित मुद्रा हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को सहारा दिया, जिससे डॉलर की बढ़त पर कुछ हद तक रोक लगी।


















