नवरात्र और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों से ठीक पहले घरेलू रसोई के बजट को राहत देने के मकसद से केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों पर बुनियादी सीमा शुल्क में कटौती की है। पिछले एक साल के दौरान वनस्पति तेलों के दामों में लगभग 20% तक की तेजी दर्ज की गई थी, जिसके चलते आगामी त्योहारी मांग के दौरान कीमतों को काबू में रखना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। इस नए नीतिगत कदम से पाम तेल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल के भाव नरम होने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर देश भर की तेल रिफाइनरियों, एफएमसीजी कंपनियों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
आयात शुल्क दरों में संशोधन का पूरा ढांचा
जारी किए गए बदलावों के अनुसार, सरकार ने कच्चे और रिफाइंड दोनों श्रेणियों के तेलों पर आयात शुल्क में फेरबदल किया है। कच्चे पाम तेल और कच्चे सोयाबीन तेल पर बुनियादी सीमा शुल्क को संशोधित किया गया है। इसके साथ ही रिफाइंड पाम तेल और रिफाइंड सोयाबीन तेल पर लगने वाले सीमा शुल्क को 32.5% से घटाकर 27.5% कर दिया गया है। इस कटौती का उद्देश्य रिफाइनरियों के लिए कच्चे माल की लागत को कम करना और घरेलू बाजार में आपूर्ति को तेजी से बढ़ाना है।
हालांकि मूल सीमा शुल्क में बदलाव के बावजूद कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर तथा सामाजिक कल्याण अधिभार पहले की तरह ही लागू रहेंगे। इन सभी शुल्कों को मिलाकर अब कच्चे पाम तेल और कच्चे सोया तेल पर कुल आयात शुल्क 11% रहेगा। वहीं कच्चे सूरजमुखी तेल पर कुल प्रभावी शुल्क घटकर 5.5% पर आ गया है। इससे पहले इन सभी तेलों पर लगने वाला कुल प्रभावी आयात शुल्क 16.5% के स्तर पर बना हुआ था, जिसके चलते आयातकों पर वित्तीय दबाव काफी अधिक था।
त्योहारी मांग और बढ़ती महंगाई पर अंकुश की तैयारी
आगामी दो महीनों के दौरान देश भर में नवरात्र और दिवाली का पर्व मनाया जाना है, जिस दौरान मिठाइयों, नमकीन और पारंपरिक व्यंजनों के निर्माण के कारण खाद्य तेलों की घरेलू खपत अपने चरम पर पहुंच जाती है। सितंबर से नवंबर के इस महत्वपूर्ण त्योहारी चक्र के दौरान मांग को पूरा करने के लिए बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना आवश्यक माना जा रहा है। हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाजारों में वनस्पति तेलों की कीमतों में तीव्र उछाल देखने को मिला था।
अगस्त 2026 के महंगाई के आंकड़ों पर नजर डालें तो सरसों तेल की महंगाई दर 5.8%, सोया तेल की 11.7%, सूरजमुखी तेल की 18.4% और मूंगफली तेल की 9.9% दर्ज की गई थी। अर्थशास्त्रियों के अनुमान के अनुसार सितंबर 2026 में यह दबाव और गहरा सकता है, जहां बैंक ऑफ बड़ौदा के विश्लेषकों ने सरसों तेल में 6.8%, सोया तेल में 12.5%, सूरजमुखी तेल में 18.7% और मूंगफली तेल में 11.1% तक मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका जताई है। ऐसे में समय रहते सीमा शुल्क में की गई कटौती से त्योहारी महीनों में आम जनता को मूल्य वृद्धि से जरूरी राहत मिल सकेगी।
आयात पर भारी निर्भरता और विदेशी स्रोत
भारत अपनी घरेलू खाद्य तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी बाजारों पर निर्भर रहता है। देश की कुल मांग का लगभग दो-तिहाई यानी करीब 60% हिस्सा विदेशों से मंगाए जाने वाले पाम, सोया और सूरजमुखी तेल से पूरा किया जाता है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत ने कुल 16.65 मिलियन टन खाद्य तेल का आयात किया, जो वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) के 16.07 मिलियन टन के मुकाबले 3% अधिक है।
देश का पाम तेल मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया से आता है, जबकि सोयाबीन तेल का बड़ा हिस्सा अर्जेंटीना से मंगाया जाता है। वहीं सूरजमुखी तेल की आपूर्ति मुख्य रूप से रूस और यूक्रेन से की जाती है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले किसी भी उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय बाजार की खुदरा कीमतों पर पड़ता है।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और बाजार की रणनीति
आयात शुल्क में कटौती के फैसले का वनस्पति तेल उद्योग ने स्वागत किया है। पतंजलि फूड्स के उपाध्यक्ष आशीष आचार्य के अनुसार शुल्क कटौती का सबसे बड़ा फायदा सूरजमुखी तेल को मिलेगा, जिससे यह रिफाइनरियों के लिए कहीं अधिक आकर्षक विकल्प बन जाएगा और संभवतः सोयाबीन तेल तथा पाम तेल की मांग का कुछ हिस्सा सूरजमुखी तेल की ओर स्थानांतरित हो सकता है।
वहीं मुंबई स्थित वनस्पति तेल ब्रोकरेज फर्म सनविन ग्रुप के मुख्य कार्यकारी संदीप बाजोरिया ने बताया कि आयात शुल्क में कमी की उम्मीद के चलते रिफाइनरियों ने पहले अपनी खरीदारियों को रोक रखा था। संदीप बाजोरिया के अनुसार, शुल्क घटने के बाद अब रिफाइनर कंपनियां आगामी त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए तेजी से अपने आयात सौदे पूरे करेंगी।
शेयर बाजार में खाद्य तेल कंपनियों के शेयरों का रुख
इस फैसले के बाद शेयर बाजार में खाद्य तेल कारोबार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। प्रमुख दिग्गज कंपनियों में मैरिको और पतंजलि फूड्स खाद्य तेल श्रेणी में मजबूत बाजार हिस्सेदारी रखती हैं, हालांकि बीते वर्षों में दोनों ही काउंटरों में उतार-चढ़ाव देखा गया है जहां मैरिको का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है।
गुरुवार के शुरुआती कारोबारी सत्र में गोकुल रिफॉइल्स, बीसीएल इंडस्ट्रीज, सनड्रॉप ब्रांड्स, पतंजलि फूड्स और मैरिको के शेयरों में 0.3% से लेकर 1.5% तक की हल्की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत राजगोर कैस्टर, गोकुल एग्रो, शांति ओवरसीज, कृति न्यूट्रिएंट्स, राज ऑयल मिल्स और एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस के शेयरों में हल्की बढ़त से लेकर 5% तक की तेजी देखने को मिली।



















