भोजन समाप्त करने के उपरांत कई बार पेट में खिंचाव या जरूरत से ज्यादा भारीपन महसूस होने लगता है। अधिकतर लोग इसे केवल सामान्य गैस या ज्यादा मात्रा में खा लेने का परिणाम मानकर अनदेखा कर देते हैं। कभी-कभार होने वाली यह परेशानी अपने आप भी सामान्य हो जाती है, किंतु यदि हर बार भोजन के बाद पेट फूलने लगे, खाना पचने में भारी दिक्कत महसूस हो या असहजता घंटों तक बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज करना सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। शरीर के भीतर लगातार बनने वाला यह खिंचाव किसी छुपी हुई अंदरूनी परेशानी का संकेत भी हो सकता है।
ओपीडी में बढ़ रही पेट फूलने की समस्या
अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता के अनुसार, ओपीडी में रोजाना ऐसे कई लोग परामर्श लेने पहुंच रहे हैं जो पेट फूलने और भारीपन से परेशान हैं। मरीजों की मुख्य शिकायत यह रहती है कि थोड़ा सा भी भोजन करने के बाद पेट फूल जाता है और पाचन ठीक तरह से नहीं हो पाता। डॉ. रजिता ने स्पष्ट किया कि दैनिक जीवन की कुछ गलत आदतें, जैसे नियमित रूप से बाहर का बना खाना, अत्यधिक तेल-मसालेदार व्यंजन और भोजन करने के तुरंत बाद बिस्तर पर लेट जाना, पाचन तंत्र की इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होती हैं।
दिनचर्या में शामिल करें ये सरल और असरदार आदतें
इस समस्या से बचाव के लिए दिनचर्या में कुछ साधारण मगर महत्वपूर्ण बदलाव करने की सलाह दी जाती है। डॉ. रजिता के मुताबिक, भोजन करने के तुरंत बाद बैठने या लेटने के बजाय कुछ देर सामान्य गति से टहलना पाचन क्रिया को सक्रिय रखने में बेहद मददगार होता है।
- सौंफ और अजवाइन का प्रयोग: भोजन के बाद थोड़ी सी सौंफ चबाने से पेट को शांति मिलती है। जिन लोगों को खट्टी डकार या एसिडिटी की शिकायत रहती है, उनके लिए अजवाइन का सीमित इस्तेमाल भी आराम पहुंचा सकता है।
- योगासनों की मदद: नियमित रूप से वज्रासन और पवनमुक्तासन का अभ्यास करने से आंतों में रुकी गैस बाहर निकलती है और पेट का तनाव कम होता है।
- खान-पान में बदलाव: बाजार के अत्यधिक तले-भुने और तीखे मसालों वाले भोजन से परहेज रखना जरूरी है। घर पर तैयार हल्का भोजन पाचन को सुगम बनाता है।
- सलाद खाने का सही समय: भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियों को प्राथमिकता दें। सलाद को मुख्य भोजन के साथ मिलाकर खाने की जगह भोजन शुरू करने से कुछ समय पूर्व खाना अधिक लाभकारी रहता है।
- पानी और विश्राम का नियम: दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि आंतों की सक्रियता बनी रहे, किंतु भोजन के ठीक बाद सीधे सोने जाने से बचें।
हार्मोनल उतार-चढ़ाव भी बन सकता है मुख्य वजह
पेट का बार-बार असामान्य रूप से फूलना केवल आहार की गड़बड़ियों तक सीमित नहीं होता। महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी इसकी एक बड़ी वजह बनते हैं। मासिक धर्म यानी पीरियड्स शुरू होने से पहले एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में आने वाले बदलावों के चलते शरीर में खिंचाव और पेट फूलने की समस्या उभर सकती है।
इसके अतिरिक्त, थायरॉयड हार्मोन के स्तर में कमी आने पर शरीर की चयापचय दर यानी मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है। मेटाबॉलिज्म धीमा होने से आंतों की गति धीमी हो जाती है और लंबे समय तक रहने वाली कब्ज पेट में भारीपन बढ़ा देती है। इसी तरह रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज के दौर से गुजर रही महिलाओं में भी हार्मोनल फेरबदल के कारण यह परेशानी आम तौर पर देखी जाती है।
पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियां और खाद्य संवेदनशीलता
यदि जीवनशैली सुधारने के बाद भी पेट का भारीपन बना रहे, तो यह आंतों से जुड़े रोगों का परिणाम हो सकता है। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम यानी IBS से पीड़ित व्यक्तियों में पेट दर्द, मरोड़, अत्यधिक गैस और ब्लोटिंग के लक्षण बार-बार सामने आते हैं।
इसके अलावा, लैक्टोज इनटॉलरेंस की स्थिति में व्यक्ति का पाचन तंत्र दूध या दूध से बने उत्पादों में मौजूद शर्करा को पचाने में असमर्थ होता है, जिससे पेट में गैस और सूजन पैदा होती है। वहीं सीलिएक डिजीज और पुरानी गंभीर कब्ज की वजह से भी पेट नियमित रूप से तना हुआ और फूला महसूस हो सकता है।
इन गंभीर लक्षणों पर तुरंत लें डॉक्टरी सलाह
चिकित्सकों का कहना है कि पेट फूलने के साथ दिखने वाले कुछ अन्य लक्षण शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की खराबी की ओर इशारा कर सकते हैं। लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी होने पर पेट के भीतर तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे पेट का आकार अचानक बढ़ जाता है। ऐसे हालात में रोगी को पीलिया, लगातार कमजोरी और बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन घटने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
दूसरी ओर, हृदय की कार्यप्रणाली कमजोर पड़ने पर भी शरीर में जल भराव की स्थिति बन जाती है। इस कारण पेट फूलने के साथ-साथ पैरों व टखनों में सूजन आ जाती है, सीढ़ियां चढ़ने या सामान्य काम करने पर सांस फूलने लगती है और गहरा तनाव महसूस होता है। जब भी पेट फूलने के साथ ऐसे असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत योग्य चिकित्सक से जांच कराना अनिवार्य है।



















