ब्रिटेन के कमजोर होते राजकोषीय हालात और केंद्रीय बैंक के नरम रुख के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड लगातार दबाव का सामना कर रहा है। ताजा कारोबारी सत्र में यूरो बनाम पाउंड की विनिमय दर में मामूली बढ़त देखने को मिली है, लेकिन तकनीकी चार्ट पर 100-दिन का सरल मूविंग एवरेज (SMA) किसी भी बड़ी रिकवरी की राह में अवरोध बनकर खड़ा है। बाजार के भागीदार ब्रिटिश सरकार की वित्तीय नीतियों, बढ़ते कर्ज के बोझ और बैंक ऑफ इंग्लैंड के आगामी ब्याज दर फैसलों का सावधानीपूर्वक आकलन कर रहे हैं, जिसके कारण इस मुद्रा जोड़ी में स्पष्ट दिशा का अभाव नजर आ रहा है।
ब्रिटेन के राजकोषीय दबाव और बजटीय सिरदर्द का असर
ब्राउन ब्रदर्स हैरीमैन के विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिटेन की राजकोषीय पृष्ठभूमि लगातार सख्त और चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक ब्रिटेन की सरकार ने अगस्त में 18.3 अरब पाउंड का कर्ज लिया। यह आंकड़ा अगस्त 2025 के मुकाबले 2.9 अरब पाउंड अधिक है और ऑफिस फॉर बजट रिस्पॉन्सिबिलिटी के पहले के अनुमानों से भी 3.5 अरब पाउंड ज्यादा दर्ज किया गया है। भारी मात्रा में हो रहे इस सरकारी उधार ने राजकोषीय लचीलेपन को बुरी तरह घटा दिया है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि बढ़ती उधार लागत के चलते सरकार का वित्तीय गुंजाइश का दायरा लगभग आधा घटकर 12 अरब पाउंड के आसपास रह गया है। इस तेज गिरावट ने चांसलर जॉन हीली पर खासा दबाव बना दिया है। जॉन हीली को 28 अक्टूबर के ऑटम बजट में अनिश्चितता के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा कवच तैयार करने के अपने वादे को पूरा करने के लिए करों में बढ़ोतरी करने और सार्वजनिक खर्चों में कटौती करने जैसे कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। जब तक बजट को लेकर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक पाउंड पर अनिश्चितता के बादल मंडराते रहने के आसार हैं।
तकनीकी संकेतकों में गति की भारी कमी
दैनिक चार्ट पर यूरो बनाम पाउंड की जोड़ी 50-दिवसीय और 100-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज के बीच फंसी हुई है, जिससे अल्पावधि का परिदृश्य व्यापक रूप से तटस्थ बना हुआ है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार यह जोड़ी लगभग 0.8577 पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद 0.8573 के मुकाबले 0.05 प्रतिशत की हल्की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 0.8468 से 0.8865 के बीच रहा है, जबकि मौजूदा कारोबारी वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना स्तर पर सामान्य बना हुआ है।
तकनीकी संकेतकों से साफ है कि बाजार में न तो खरीदार पूरी तरह हावी हैं और न ही विक्रेता कोई आक्रामक रुख दिखा पा रहे हैं। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) लगभग 52 से 53 के आसपास घूम रहा है, जो केवल मामूली रूप से सकारात्मक गति की ओर इशारा करता है। वहीं मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) शून्य से मामूली नीचे बना हुआ है और पूरी तरह सपाट है, जो नकारात्मक हिस्टोग्राम के साथ मंदी का हल्का पूर्वाग्रह दिखाता है। इसके साथ ही 14-दिवसीय एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) का 14 के स्तर पर होना यह साबित करता है कि बाजार पूरी तरह दिशाहीन और कमजोर है। जब तक कीमतें प्रमुख मध्यम अवधि के औसतों से नीचे रहेंगी, तब तक झुकाव नीचे की ओर ही बना रह सकता है।
चार्ट पर अहम रेजिस्टेंस और सपोर्ट के स्तर
ऊपरी स्तरों पर नजर डालें तो पहली तात्कालिक रुकावट 100-दिवसीय SMA के पास 0.8593 पर मौजूद है। अगर कीमतें इससे ऊपर निकलती हैं, तो अगला बड़ा प्रतिरोध 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर 0.8604 पर आएगा। इसके बाद 0.8641 का एक बेहद मजबूत अवरोध क्षेत्र उभरता है, जहां 200-दिवसीय SMA और 78.6 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट आपस में मिलते हैं। व्यापक तेजी की स्थिति में पूरे चक्र का उच्चतम स्तर यानी 100.0 प्रतिशत फाइबोनैचि स्तर 0.8689 पर ऊपरी सीमा तय करता है। लाइव स्तरों पर दैनिक धुरी बिंदु यानी पिवट 0.8575 पर है, जबकि इसके ऊपर R1 0.8583 और R2 0.8589 पर गिने जा रहे हैं।
गिरावट की स्थिति में बाजार को तुरंत 50.0 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर 0.8578 के ठीक नीचे सहारा मिलता है। इसके बाद 50-दिवसीय SMA 0.8559 पर और 38.2 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर 0.8551 पर मिलकर द्वितीयक मांग क्षेत्र बनाते हैं, जो बॉलिंगर बैंड्स की निचली सीमा 0.8551 के साथ भी मेल खाता है। यदि बिकवाली और गहरी होती है, तो 23.6 प्रतिशत का स्तर 0.8519 पर खुलेगा और अंततः संरचनात्मक आधार 0.8466 के आसपास परीक्षण के दायरे में आएगा। नीचे की ओर तात्कालिक सपोर्ट S1 0.8570 और S2 0.8562 पर स्थित हैं।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति का पाउंड पर प्रभाव
ब्रिटेन के लिए समग्र मौद्रिक नीति तय करने की जिम्मेदारी बैंक ऑफ इंग्लैंड की है, जिसका प्राथमिक लक्ष्य 2 प्रतिशत की स्थिर मुद्रास्फीति दर के साथ मूल्य स्थिरता हासिल करना है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक अपनी आधार उधार दरों में फेरबदल करता है। यह वह ब्याज दर होती है जिस पर बैंक ऑफ इंग्लैंड वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है और बैंक आपस में लेनदेन करते हैं, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों की लागत तय होती है।
जब महंगाई बैंक ऑफ इंग्लैंड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो वह ब्याज दरों में वृद्धि करके कर्ज को महंगा बनाता है ताकि खर्च में कमी आए। ऊंची ब्याज दरें पाउंड स्टर्लिंग के लिए सकारात्मक साबित होती हैं क्योंकि दुनिया भर के निवेशक बेहतर रिटर्न पाने के लिए ब्रिटेन की संपत्तियों में पैसा लगाना पसंद करते हैं। इसके विपरीत, जब महंगाई लक्ष्य से नीचे फिसलती है और आर्थिक वृद्धि सुस्त पड़ती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड विकास को बढ़ावा देने और कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने हेतु ब्याज दरें घटाता है। दरों में कटौती पाउंड के लिए नकारात्मक प्रभाव डालती है।
अत्यधिक गंभीर आर्थिक संकट की स्थिति में बैंक ऑफ इंग्लैंड क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) यानी मौद्रिक ढील की नीति का सहारा लेता है। इस प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक नई मुद्रा जारी करके बैंकों और वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड या उच्च रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदता है ताकि वित्तीय प्रणाली में नकदी का प्रवाह बढ़ाया जा सके। आम तौर पर इस तरह की नीतियों से पाउंड स्टर्लिंग कमजोर होता है। वहीं दूसरी तरफ, जब अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और मुद्रास्फीति बढ़ने लगती है, तो क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) लागू की जाती है। इसमें केंद्रीय बैंक नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड की मूल राशि का दोबारा निवेश नहीं करता, जो पाउंड के लिए मददगार होता है।
वैश्विक मुद्राओं और अन्य परिसंपत्तियों की ताजा हलचल
मुद्रा बाजार के व्यापक रुझानों में पाउंड स्टर्लिंग ने प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मिलाजुला प्रदर्शन किया है, जिसमें यह ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के खिलाफ सबसे मजबूत स्थिति में रहा। वहीं ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी एशियाई सत्र में 0.7100 के स्तर से ऊपर कारोबार करती दिखी। इसे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त टिप्पणियों से बल मिला। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख डॉलर को समर्थन देकर इस जोड़ी की बढ़त को सीमित कर रहा है, जबकि बाजार की नजरें इस हफ्ते होने वाले ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर टिकी हैं।
दूसरी ओर, डॉलर बनाम जापानी येन की जोड़ी एशियाई सत्र में 157.50 के स्तर के करीब मामूली बढ़त के साथ कारोबार कर रही है। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के डर ने येन की गिरावट को कुछ हद तक थामा है, लेकिन बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने और 31 साल के उच्च स्तर पर ले जाने के बावजूद नरम रुख रखने से येन पर दबाव कायम है। सोने की कीमतों में भी लगातार दूसरे दिन गिरावट आई और यूरोपीय सत्र में यह 4,315 डॉलर प्रति औंस के तीन-दिवसीय निचले स्तर के करीब पहुंच गया, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व का आक्रामक दृष्टिकोण बिना ब्याज वाली इस धातु से निवेशकों को दूर ले जा रहा है। क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन पिछले दिन 6.7 प्रतिशत उछलने के बाद कुछ रुकावट का सामना करते हुए 85,500 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है, हालांकि स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में लगभग 1 अरब डॉलर के अंतर्वाह और स्ट्रैटेजी द्वारा अपने खजाने में 950 बीटीसी जोड़ने से संस्थागत मांग मजबूत बनी हुई है।

















