सिंगापुर स्थित यूओबी के वित्तीय विश्लेषक जेस्टर कोह ने भारत के आर्थिक परिदृश्य पर नया विश्लेषण जारी करते हुए देश की विकास दर और मुद्रास्फीति दोनों के अनुमानों में बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत साल-दर-साल आर्थिक वृद्धि के बाद बैंक ने अपने पूरे साल के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों और सेवाओं तथा ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते खर्च को देखते हुए कुल महंगाई दर का अनुमान भी 5.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया गया है।
खाद्य कीमतों पर मौसम का असर और मुद्रास्फीति की चुनौतियां
यूओबी की रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि आने वाले महीनों में प्रतिकूल मौसम के कारण खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे महीने-दर-महीने महंगाई में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, भारत सरकार के पास उपलब्ध पर्याप्त सार्वजनिक खाद्यान्न भंडार और सरकारी सब्सिडी इस दबाव को आंशिक रूप से कम करने में मदद करेंगे। जेस्टर कोह के अनुसार, यदि ब्याज दरों में और बढ़ोतरी नहीं की जाती है तो भारत की वास्तविक ब्याज दरें नकारात्मक हो सकती हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि नवंबर 2026 तक साल-दर-साल महंगाई दर 6 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है।
वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर की बढ़त से यूरो और पाउंड पर दबाव
भारत के व्यापक आर्थिक परिदृश्य के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी मंगलवार को बड़ा बदलाव देखा गया। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के बीच अमेरिकी डॉलर में मजबूती दर्ज की गई। इसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) गिरकर दो सप्ताह के निचले स्तर 1.3500 के आसपास पहुंच गया। इसी तरह यूरो (EUR/USD) भी दबाव में आकर 1.1600 के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर से नीचे चला गया। कमजोर अमेरिकी आंकड़ों के बावजूद डॉलर में आए उछाल ने प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर नकारात्मक असर डाला।
सॉवरेन बॉन्ड, सोने और डीजल क्रैक स्प्रेड में तेज हलचल
कीमती धातुओं के बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और यह प्रति ट्रॉय औंस $4,300 के स्तर की ओर खिसक गया। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हुई तेज बढ़ोतरी ने सोने की मांग को प्रभावित किया। वैश्विक सॉवरेन बॉन्ड बाजार में नए महीने की शुरुआत बिकवाली के साथ हुई, जिसमें ब्रिटेन के बॉन्ड सबसे अधिक प्रभावित हुए। ब्रिटेन के 2-वर्षीय और 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में एक समय 10 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई, जो बाद में क्रमशः 7 और 8 बेसिस पॉइंट की बढ़त पर बनी रही। दूसरी ओर, ऊर्जा बाजार में अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड यानी WTI क्रूड के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल वायदा का प्रीमियम पहली बार $100 प्रति बैरल के पार निकलकर $102.00 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।


















