वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय एक बेहद महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति निर्णय को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है, क्योंकि रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड अपनी नवीनतम बेंचमार्क ब्याज दर घोषणा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वित्तीय बाजार के अधिकांश विश्लेषकों का व्यापक अनुमान है कि न्यूजीलैंड का केंद्रीय बैंक अपनी प्रमुख ब्याज दर यानी ऑफिशियल कैश रेट (OCR) में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करेगा। इस बढ़ोतरी के साथ ही देश की मुख्य ब्याज दर 2.50% से बढ़कर 2.75% के स्तर पर पहुंच जाएगी। यह प्रत्याशित मौद्रिक नीतिगत बदलाव देश के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है, जब नीति निर्माता एक तरफ घरेलू स्तर पर बनी जिद्दी मुद्रास्फीति के दबाव से जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के संकेतों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल को भी ध्यान में रख रहे हैं।
रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड की नीतिगत सख्ती और फैसले का समय
रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड द्वारा मौद्रिक नीति निर्णय की आधिकारिक घोषणा बुधवार को भारतीय समयानुसार तड़के (02:00 GMT) जारी की जाएगी। मुख्य ब्याज दर निर्णय के साथ-साथ केंद्रीय बैंक विश्लेषणात्मक दस्तावेजों का एक पूरा सेट जारी करेगा, जिसमें मोनेट्री पॉलिसी रिव्यू, विस्तृत मोनेट्री पॉलिसी Statement और मोनेट्री पॉलिसी कमेटी की बैठक के मिनट्स शामिल होंगे। विदेशी मुद्रा बाजार के व्यापारी और वैश्विक निवेशक इन जारी दस्तावेजों का बारीक विश्लेषण करेंगे ताकि भविष्य में ब्याज दरों की दिशा और समिति के सदस्यों के बीच बने सहमत विचारों को समझा जा सके।
दस्तावेजों के आधिकारिक प्रकाशन के तुरंत बाद, रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड की गवर्नर एना ब्रेमन 03:00 GMT पर एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगी। बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद है कि गवर्नर एना ब्रेमन केंद्रीय बैंक के अद्यतन आर्थिक अनुमानों के पीछे के मुख्य कारणों और रणनीतिक दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा करेंगी। उनकी टिप्पणियों में यह गहराई से देखा जाएगा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां केंद्रीय बैंक की मध्यम अवधि की मौद्रिक नीति के खाके को किस प्रकार प्रभावित कर सकती हैं।
मुद्रास्फीति का दबाव और आर्थिक संतुलन की कठिन चुनौती
केंद्रीय बैंक के आक्रामक रुख के पीछे सबसे प्रमुख वजह उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति का लगातार उच्च स्तर पर बने रहना है। हालिया आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून तिमाही में हेडलाइन कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 4.1% दर्ज की गई थी। यह आंकड़ा रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड के 3.9% के अपने अनुमान से काफी अधिक था, जिससे इस बात की पुष्टि हुई कि मूल्य वृद्धि दर केंद्रीय बैंक के निर्धारित 1% से 3% के लक्ष्य बैंड से ऊपर बनी हुई है, जिसका मध्य बिंदु 2% निर्धारित है।
जुलाई महीने में की गई ब्याज दर बढ़ोतरी के बाद, रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड ने अपने मोनेट्री पॉलिसी रिव्यू में स्पष्ट रूप से कहा था कि मुद्रास्फीति के लक्ष्य से ऊपर रहने और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती आने की संभावना को देखते हुए, मुद्रास्फीति को 2% के मध्य बिंदु पर वापस लाने के लिए मौद्रिक प्रोत्साहन में और कटौती की आवश्यकता होगी। इसके अतिरिक्त, जुलाई बैठक के मिनट्स से यह भी स्पष्ट हुआ था कि मौद्रिक नीति समिति इस बात पर सहमत थी कि आगामी बैठकों में OCR में और वृद्धि की संभावना है, लेकिन इसके सटीक समय को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
दूसरी ओर, घरेलू श्रम बाजार में दिख रही कमजोरी ने आर्थिक स्थिति को काफी जटिल बना दिया है। न्यूजीलैंड में बेरोजगारी दर बढ़कर 5.6% पर पहुंच गई है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती आ रही है, भले ही तीसरी तिमाही के लिए मुद्रास्फीति की उम्मीदों में थोड़ी नरमी के संकेत मिले हों। यह स्थिति मौद्रिक नीति समिति के समक्ष एक कठिन संतुलन की चुनौती खड़ी करती है, जिसे एक तरफ बढ़ती मुद्रास्फीति पर लगाम लगानी है तो दूसरी तरफ नाजुक आर्थिक सुधार को नुकसान से बचाना है।
आगे के नीतिगत संकेत और भविष्य में दर वृद्धि के परिदृश्य
चूंकि वित्तीय बाजार सितंबर की बैठक में 25 बेसिस प्वाइंट की दर वृद्धि की संभावना को पहले ही पूरी तरह से अपना चुके हैं, इसलिए मुख्य ब्याज दर में बदलाव के बजाय निवेशकों का पूरा ध्यान केंद्रीय बैंक के आगे के फॉरवर्ड गाइडेंस पर केंद्रित है। बाजार प्रतिभागी यह जानने के लिए विशेष रूप से उत्सुक हैं कि क्या गवर्नर एना ब्रेमन और उनकी टीम अक्टूबर में होने वाली आगामी बैठक में भी दर बढ़ाने के संकेत देती है या नहीं।
मोनेट्री पॉलिसी स्टेटमेंट में शामिल अद्यतन ऑफिशियल कैश रेट पाथ के पूर्वानुमान यह समझने में मदद करेंगे कि केंद्रीय बैंक का टर्मिनल रेट क्या होगा और सख्त मौद्रिक स्थिति कब तक बनी रहेगी। यदि केंद्रीय बैंक अपने अनुमानित दर पथ को ऊपर की ओर संशोधित करता है, तो इससे न्यूजीलैंड डॉलर में खरीदारी का नया दौर शुरू हो सकता है। इसके विपरीत, यदि केंद्रीय बैंक का रुख आर्थिक सुस्ती को लेकर सतर्क रहता है, तो निवेशक आगामी महीनों में और दर वृद्धि की उम्मीदों को कम कर सकते हैं।
NZD/USD मुद्रा जोड़ी का तकनीकी परिदृश्य
आगामी नीतिगत घोषणा ने न्यूजीलैंड डॉलर और विशेष रूप से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसकी प्रमुख विनिमय जोड़ी NZD/USD में काफी उतार-चढ़ाव पैदा कर दिया है। हालिया प्राइस एक्शन से पता चलता है कि इस करेंसी पेयर ने 0.5900 के करीब स्थित अपने 21-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) को तोड़ दिया है। इस गिरावट के बावजूद, यह जोड़ी कई महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज के ऊपर कारोबार करते हुए अल्पकालिक सकारात्मक संरचना बनाए हुए है। 0.5819 पर 50-दिवसीय SMA, 0.5845 पर 100-दिवसीय SMA और 0.5849 पर 200-दिवसीय SMA मिलकर 0.5823 से 0.5849 के बीच एक मजबूत सपोर्ट जोन का निर्माण करते हैं।
तकनीकी संकेतक बाजार में समेकन यानी कंसोलिडेशन की स्थिति दर्शा रहे हैं। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 50 के न्यूट्रल स्तर के आसपास बना हुआ है, जो हालिया बढ़त के बाद गति में ठहराव का संकेत देता है। इस बीच, लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार NZD/USD का विनिमय दर 0.5896 के आसपास बना हुआ है, जो पिछले बंद 0.5922 की तुलना में लगभग 0.45% नीचे है। इस जोड़ी का 52-सप्ताह का दायरा 0.5584 से 0.6093 के बीच रहा है। अतिरिक्त तकनीकी संकेतकों में 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 0.5909, 50-दिवसीय EMA 0.5867 और 200-दिवसीय EMA 0.5834 पर है, जहां गोल्डन क्रॉस पैटर्न दीर्घकालिक तेजी के रुझान की पुष्टि करता है।
गिरावट की स्थिति में, NZD/USD के लिए शुरुआती तकनीकी सहायता यानी सपोर्ट 100-दिवसीय और 200-दिवसीय SMA द्वारा 0.5845 से 0.5847 के बीच निर्मित मुख्य डिमांड ज़ोन में स्थित है, जबकि 0.5819 पर 50-दिवसीय SMA मध्यम अवधि के निचले स्तर को मजबूती प्रदान करता है। लाइव शार्ट-टर्म पिवट विश्लेषण के अनुसार तत्काल सपोर्ट स्तर 0.5895 (S1) और 0.5894 (S2) पर हैं। इसके विपरीत, यदि विनिमय दर में फिर से तेजी लौटती है, तो पहला मुख्य रेजिस्टेंस 12-सप्ताह के उच्चतम स्तर 0.5989 पर है, जबकि तात्कालिक रेजिस्टेंस स्तर 0.5896 (R1) और 0.5897 (R2) पर देखे गए हैं। 0.5989 से ऊपर जाने पर यह जोड़ी 0.6050 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर बढ़ सकती है।
रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड का जनादेश और मौद्रिक उपकरण
रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड देश के केंद्रीय बैंक के रूप में कार्य करता है, जिसका प्राथमिक वैधानिक दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना और अधिकतम टिकाऊ रोजगार को बढ़ावा देना है। बैंक की मोनेट्री पॉलिसी कमेटी साल में सात बार आर्थिक स्थितियों का आकलन करने और ऑफिशियल कैश रेट का स्तर तय करने के लिए बैठक करती है। OCR में बदलाव करके केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक ब्याज दरों को सीधे प्रभावित करता है, जिससे देश भर में परिवारों और व्यवसायों के लिए कर्ज की लागत बदल जाती है।
जब मुद्रास्फीति का दबाव लक्ष्य से अधिक हो जाता है, तो रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड मांग को नियंत्रित करने और आर्थिक गतिविधियों को धीमा करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करता है। उच्च बेंचमार्क ब्याज दरें आमतौर पर न्यूजीलैंड की परिसंपत्तियों के आकर्षण को बढ़ाती हैं, जिससे विदेशी पूंजी का प्रवाह होता है और बेहतर रिटर्न की उम्मीद में न्यूजीलैंड डॉलर मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब आर्थिक वृद्धि सुस्त होती है, तो केंद्रीय बैंक OCR घटाता है, जिससे मुद्रा पर दबाव पड़ता है। अंतरिम गवर्नर क्रिश्चियन हॉक्सबी और अन्य अधिकारियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस इन रणनीतिक निर्णयों पर स्पष्टता प्रदान करती है।
श्रम बाजार की स्थितियां भी नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। केंद्रीय बैंक अधिकतम टिकाऊ रोजगार को श्रम संसाधनों के उस उच्चतम उपयोग के रूप में परिभाषित करता है जिसे मुद्रास्फीति को बढ़ाए बिना लंबे समय तक बनाए रखा जा सके। यदि रोजगार इस स्तर से अधिक समय तक ऊपर रहता है, तो मजदूरी और खर्च बढ़ने से कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, जिससे दरों में बढ़ोतरी जरूरी हो जाती है। असाधारण संकट की स्थितियों में केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) का उपयोग कर सकता है, जिसके तहत नई मुद्रा छापकर वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदे जाते हैं ताकि तरलता बढ़ाई जा सके, जैसा कि कोविड-19 महामारी के दौरान किया गया था।
वैश्विक वित्तीय बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियां
रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड का यह फैसला वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल और बदलती पूंजी धाराओं के बीच आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर में मजबूती देखी गई है, जिसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका और ईरान के बीच संकट और हालिया अमेरिकी आर्थिक आंकड़े हैं।
अमेरिकी डॉलर की इस मजबूती के कारण वैश्विक स्तर पर प्रमुख मुद्रा जोड़ियों पर दबाव बना है। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (GBP/USD) गिरकर 1.3500 के निचले स्तर पर आ गई है, जो दो सप्ताह का निचला स्तर है। इसी तरह, यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) में भी गिरावट तेज हुई है और यह 1.1600 के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर से नीचे आ गई है।
कीमती धातुओं और बॉन्ड बाजारों में भी बड़ा समायोजन देखा गया है। सोने की कीमतें गिरकर $4,300 प्रति ट्रॉय औंस के करीब पहुंच गई हैं, क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में उछाल आया है। वैश्विक बॉन्ड बाजार में महीने की शुरुआत में बिकवाली का दबाव रहा, जिसमें ब्रिटेन के बॉन्ड सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। ब्रिटेन के 2-वर्षीय और 10-वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल में 10 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ऊर्जा बाजार में भी अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें स्थिर दिख रही हैं, लेकिन अमेरिका में डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार $100 प्रति बैरल से ऊपर निकलकर $102.00 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। रिफाइनिंग मार्जिन में यह उछाल परिवहन और रसद लागत में वृद्धि का संकेत देता है, जो वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव को और बढ़ा सकता है।


















