देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार अत्यधिक उमंग, अपार श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर भव्य मंदिरों से लेकर घरों तक आकर्षक सजावट की जाती है और बालक रूप में विराजित लड्डू गोपाल की झांकियां सजाई जाती हैं। श्रद्धालु देर रात तक कान्हा के जन्म के उस शुभ क्षण की प्रतीक्षा करते हैं। उत्सव के इस माहौल में दही-हांडी की गूंज, भजनों की स्वर लहरियां और मधुर संगीत विशेष ऊर्जा भरते हैं। हिंदी सिनेमा ने भी भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी की शरारतों और राधा-कृष्ण के निष्काम प्रेम को अनेक यादगार धुनों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया है। यही कारण है कि दशकों बीत जाने के बाद भी ये फिल्मी नगमे जन्माष्टमी की हर संगीत सूची की पहली पसंद बने हुए हैं।
शास्त्रीय प्रभाव और पर्दे पर नटखट कान्हा की झलक
फिल्म लगान का वर्ष 2001 में आया रचना संगीत राधा कैसे ना जले जन्माष्टमी के भजनों में अग्रगण्य स्थान रखता है। इस गीत में अभिनेता आमिर खान ने कृष्ण के रूप में और अभिनेत्री ग्रेसी सिंह ने राधा के चरित्र को जीवंत किया है। गोपियों संग कृष्ण की लीला देखकर राधा के हृदय में उत्पन्न सहज ईर्ष्या और नटखट शिकायतों को यह रचना खूबसूरती से बयां करती है। इस कालजयी प्रस्तुति को पार्श्व गायिका आशा भोसले और उदित नारायण ने स्वर दिए हैं, जबकि इसका संगीत ए.आर. रहमान ने तैयार किया और रचना के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं।
इसी क्रम में 1972 की चर्चित फिल्म अमर प्रेम का प्रसिद्ध गीत बड़ा नटखट है रे कृष्ण भक्ति के सबसे कोमल पहलुओं को प्रस्तुत करता है। आनंद बख्शी के लिखे इन भावुक बोलों को आर.डी. बर्मन के सुरीले संगीत ने अमर बना दिया। स्वर कोकिला लता मंगेशकर की दिव्य आवाज में ढला यह गीत यशोदा मैया के वात्सल्य और बालक कृष्ण की निष्पाप शरारतों का अनूठा चित्रण करता है, जिसे सुनते ही मां और पुत्र का विहंगम दृश्य मन में उभर आता है।
वर्ष 2015 की भव्य फिल्म बाजीराव मस्तानी का गीत मोहे रंग दो लाल शास्त्रीय नृत्य और संगीत की अनूठी मिसाल है। निर्देशक संजय लीला भंसाली की इस रचना में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण कृष्ण की भक्ति में लीन होकर भावपूर्ण नृत्य करती दिखती हैं। पंडित बिरजू महाराज के शास्त्रीय मार्गदर्शन और श्रेया घोषाल के साथ उनके मधुर गायन ने इस रचना को एक दिव्य ऊँचाई प्रदान की है।
पारिवारिक मिठास और किसना की भव्य गाथा
सूरज बड़जात्या के निर्देशन में वर्ष 1999 में बनी पारिवारिक फिल्म हम साथ-साथ हैं का गीत मैया यशोदा जन्माष्टमी के सांस्कृतिक आयोजनों की धड़कन है। इस गीत में अभिनेत्री करिश्मा कपूर, तब्बू और सोनाली बेंद्रे कान्हा की नटखट हरकतों की शिकायत मैया से करती नजर आती हैं। अलका याग्निक, अनुराधा पौडवाल और कविता कृष्णमूर्ति के सुरीले संगम से तैयार इस रचना पर आज भी स्कूल के कार्यक्रमों और मोहल्लों की झांकियों में बच्चे और महिलाएं उत्साहपूर्वक नृत्य करते हैं।
वर्ष 2005 में प्रदर्शित फिल्म किसना: द वॉरियर पोएट का मुख्य गीत वो किसना है भक्ति और भव्यता का शानदार सम्मिश्रण प्रस्तुत करता है। अभिनेता विवेक ओबेरॉय पर फिल्माए गए इस गीत में श्रीकृष्ण के मनमोहक स्वरूप, अपार शक्ति और दिव्य आकर्षण का वर्णन किया गया है। सुखविंदर सिंह, इस्माइल दरबार और आयशा दरबार की सशक्त आवाजों में रचे गए इस गीत के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं, जो श्रोताओं को भक्ति रस के साथ-साथ उत्सव के उल्लास से सराबोर कर देते हैं।
दही-हांडी का उत्साह और आधुनिक पीढ़ी की पसंद
जन्माष्टमी के दिन मटकी फोड़ने और दही-हांडी की परंपरा का अपना अलग ही रोमांच होता है। अक्षय कुमार और परेश रावल की फिल्म ओह माय गॉड! का लोकप्रिय गीत गो गो गोविंदा इसी ऊर्जा और मटकी फोड़ प्रतियोगिता के माहौल को पर्दे पर दर्शाता है। प्रभुदेवा और सोनाक्षी सिन्हा के धमाकेदार नृत्य और श्रेया घोषाल तथा अमन त्रिखा की बुलंद आवाज ने इस गीत को जन्माष्टमी के सार्वजनिक आयोजनों का मुख्य आकर्षण बना दिया है।
नई पीढ़ी के बीच वर्ष 2019 की फिल्म ड्रीम गर्ल का गाना राधे राधे काफी लोकप्रिय है। आयुष्मान खुराना और नुसरत भरूचा पर फिल्माया गया यह गीत राधा-कृष्ण के पावन प्रेम और एक-दूसरे के बिना उनके अधूरेपन को आज के आधुनिक परिप्रेक्ष्य में पेश करता है। मीत ब्रदर्स के संगीत निर्देशन में अमित गुप्ता की आवाज से सजा यह गीत जन्माष्टमी के आधुनिक पंडालों और युवा वर्ग के उत्सवों में जबरदस्त उत्साह भरता है।



















