वैश्विक कमोडिटी बाजारों में शुक्रवार को पीली धातु में जोरदार वापसी देखने को मिली। अमेरिकी उपभोक्ताओं के कमजोर भरोसे और मध्य पूर्व के समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षित निवेश की मांग अचानक बढ़ गई। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना निचले स्तरों से 1.40% तक चढ़ गया। दिन के शुरुआती कारोबार में 4,130 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर तक लुढ़कने के बाद XAU/USD ने मजबूत रिकवरी दर्ज की और यह 4,194 डॉलर पर पहुंच गया, जहां खरीदार इसे लगातार 4,200 डॉलर के स्तर के पार ले जाने की कोशिश करते दिखे। सत्र के दौरान हाजिर भाव 4,207 डॉलर के उच्चतम स्तर तक पहुंचे, जिसके बाद यह 4,200 डॉलर के मनोवैज्ञानिक दायरे के ठीक नीचे कारोबार करता रहा। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, क्लोजिंग बेल के आसपास सोना 4,221 डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव 4,157 डॉलर से 1.55% की बढ़त दिखाता है, जबकि इसका 52 हफ्तों का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच बना हुआ है।
अमेरिकी कंज्यूमर सेंटिमेंट में गिरावट और महंगाई की आशंका
कीमती धातुओं में आई इस तेजी के पीछे अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े निराशाजनक आंकड़े मुख्य वजह रहे। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन कंज्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स अक्टूबर में गिरकर 46.3 पर आ गया। यह आंकड़ा पिछले महीने के 48.1 से काफी कम है और विश्लेषकों के 47.6 के अनुमान से भी काफी कमजोर रहा। उपभोक्ताओं के कमजोर मनोबल ने दर्शाया है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में परिवारों का भरोसा कमजोर हो रहा है। इसके साथ ही अमेरिकी नागरिकों की महंगाई को लेकर उम्मीदें भी बढ़ी हैं। 1 साल के क्षितिज पर मुद्रास्फीति की उम्मीद 4.6% से बढ़कर 4.7% हो गई, जबकि 5 साल के दायरे में यह 3.4% से बढ़कर 3.5% दर्ज की गई। महंगाई के इस दबाव और सुस्त पड़ती मांग ने निवेशकों को सोने की तरफ आकर्षित किया, क्योंकि सोना हमेशा से मुद्रा अवमूल्यन और बढ़ती कीमतों के खिलाफ एक ठोस हेज माना जाता रहा है।
फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की स्थिति
केंद्रीय बैंक की नीतियों के मोर्चे पर निवेशकों का ध्यान हाल ही में जारी एफओएमसी बैठक के मिनट्स पर बना हुआ है। बुधवार को जारी ब्योरे से यह साफ हुआ कि नीति निर्माताओं के बीच ब्याज दर बढ़ोतरी को लेकर पूरा समर्थन था, लेकिन बोर्ड के सदस्यों के बीच सोच को लेकर स्पष्ट विभाजन सामने आया। कुछ अधिकारियों ने इस कदम को केवल एहतियाती माना, जबकि अन्य सदस्यों की राय थी कि यह मौद्रिक सख्ती के एक नए चक्र की शुरुआत है। हालांकि मनी मार्केट के आंकड़ों ने निकट भविष्य में ब्याज दर बढ़ने की आशंकाओं को खारिज किया है। प्राइम टर्मिनल के डेटा के मुताबिक, अक्टूबर में ब्याज दरों के 3.75% से 4% के मौजूदा दायरे में स्थिर रहने की संभावना 81% आंकी गई है। वहीं दिसंबर की बैठक में फेड फंड्स रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना भी 81% बनी हुई है।
सोने पर ब्याज दरों का गहरा असर पड़ता है क्योंकि यह बिना यील्ड वाली संपत्ति है। ब्याज दरों में स्थिरता या कटौती की उम्मीदें इसे सहारा देती हैं, जबकि उधारी लागत बढ़ने पर सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। शुक्रवार को अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी नोट की यील्ड 1.3 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 5.248% पर पहुंच गई, जिसने डॉलर में बड़ी गिरावट को सीमित रखा। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के प्रदर्शन को मापता है, 0.18% की तेजी के साथ 102.30 पर कारोबार कर रहा था। डॉलर और सरकारी बॉन्ड यील्ड की मजबूती ने सोने की बढ़त को पूरी तरह अनियंत्रित नहीं होने दिया।
होर्मुज और लाल सागर में तनाव: भू-राजनीतिक संकट से बढ़ा सहारा
वित्तीय आंकड़ों से परे, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और सैन्य तनाव भी सुरक्षित निवेश की मांग को हवा दे रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध किसी त्वरित समाधान से काफी दूर नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर हमला नहीं करेंगे। इस राजनीतिक बयान के बावजूद दोनों देशों के बीच जमीनी तनाव कम नहीं हुआ है और होर्मुज जलडमरूमध्य में टकराव की घटनाएं जारी रहीं। इसके अलावा लाल सागर क्षेत्र में हूतियों ने बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं, जिसका मकसद मालवाहक जहाजों की आवाजाही को बाधित करना है। वैश्विक व्यापार के प्रमुख समुद्री गलियारों में अस्थिरता के कारण निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से पूंजी निकालकर पारंपरिक सुरक्षित ठिकानों में लगा रहे हैं।
बाजार में सक्रिय ट्रेडर्स के लिए आने वाला हफ्ता बेहद अहम होने वाला है। निवेशकों का मुख्य फोकस भू-राजनीतिक घटनाक्रमों, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और अमेरिकी डॉलर की चाल पर बना रहेगा। इसके साथ ही बाजार को अगले हफ्ते आने वाले उपभोक्ता और उत्पादक स्तर के महंगाई आंकड़ों, खुदरा बिक्री के आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों और रोजगार आंकड़ों का भी आकलन करना होगा।
तकनीकी स्तर और चार्ट का मिजाज
तकनीकी चार्ट पर सोने के हालिया गिरावट के रुझान को चुनौती मिलती दिख रही है। 4,130 डॉलर के दैनिक निचले स्तर पर मजबूत खरीदारी देखी गई, जिसने हाजिर कीमतों को 4,207 डॉलर तक पहुंचा दिया। तकनीकी मोमेंटम में हल्का तेजी का रुख बना है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) में सुधार हुआ है, हालांकि यह अब भी 50 के न्यूट्रल स्तर से नीचे बना हुआ है। लाइव आंकड़ों के अनुसार 14-दिवसीय आरएसआई 44 के स्तर पर है। एमएसीडी (MACD) -63.98 पर सिग्नल लाइन -57.94 के मुकाबले कमजोरी का संकेत दे रहा है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय ईएमए 4,256 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,315 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,439 डॉलर पर स्थित है, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 4,377 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 4,548 डॉलर पर है।
चार्ट विश्लेषकों का मानना है कि यदि XAU/USD शुक्रवार के सत्र और पूरे सप्ताह का कारोबार 4,200 डॉलर के ऊपर बंद करने में सफल रहता है, तो यह एक मजबूत रिकवरी का रास्ता तैयार कर सकता है। ऊपर की ओर पहला बड़ा प्रतिरोध 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) पर 4,260 डॉलर के आसपास है। इसे पार करने के बाद अगला लक्ष्य 50-दिवसीय एसएमए 4,335 डॉलर और फिर 4,500 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर होगा। इन स्तरों को पार करने के बाद 200-दिवसीय एसएमए 4,529 डॉलर पर मुख्य प्रतिरोध बनकर उभरेगा। वर्तमान में पिवट स्तर 4,204 डॉलर पर है, जिसके ऊपर रेजिस्टेंस R1 4,251 डॉलर और R2 4,281 डॉलर पर है, जबकि नीचे की तरफ पहला सपोर्ट S1 4,174 डॉलर और दूसरा सपोर्ट S2 4,126 डॉलर पर मौजूद है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 4,074 डॉलर से 4,462 डॉलर के दायरे में है और 14-दिवसीय एटीआर (ATR) 88.93 अंक पर दैनिक उतार-चढ़ाव का दायरा दर्शाता है।
केंद्रीय बैंकों की भूमिका और वैश्विक मुद्राओं का रुख
मानव इतिहास में सोना हमेशा से मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में केंद्र में रहा है। आज के दौर में भी गहनों और चमक-दमक के अलावा यह दुनिया का सबसे भरोसेमंद सुरक्षित निवेश बना हुआ है। किसी भी संप्रभु सरकार या केंद्रीय बैंक की देनदारी न होने के कारण यह मुद्रास्फीति और गिरती कागजी मुद्राओं के खिलाफ सबसे सुरक्षित ढाल है। विश्व भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े खरीदार और धारक हैं। संकट के दौर में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को सहारा देने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए वे सोना जमा करते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में रिकॉर्ड 1,136 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा, जिसकी कुल कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह इतिहास में किसी एक वर्ष की सबसे बड़ी खरीदारी रही। विशेष रूप से चीन, भारत और तुर्किये जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक तेजी से अपने सोने के भंडार में इजाफा कर रहे हैं।
मुद्रा बाजार के अन्य मोर्चों पर भी उतार-चढ़ाव बना रहा। एशियाई सत्र में AUD/USD ने साप्ताहिक निचले स्तर से वापसी करते हुए 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने की कोशिश की। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रात में आई सुस्ती ने डॉलर को 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे रखा, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला। साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सख्त नीतिगत उम्मीदों ने भी इसे सहारा दिया। दूसरी ओर, USD/JPY 158.00 के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। जापान के घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने जापानी येन पर दबाव बनाया। हालांकि ट्रेजरी यील्ड में नरमी और फेडरल रिजर्व के रुख के बीच डॉलर की कमजोरी ने इस जोड़ी में किसी भी तेज गिरावट को थामे रखा। सोने के लिए मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड अल्पकालिक स्तर पर चुनौती बनी हुई है, लेकिन बुनियादी आर्थिक और भू-राजनीतिक कारक इसकी मांग को मजबूती दे रहे हैं।






















