चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना यानी PBoC ने अपनी विनिमय दर नीति का बचाव करते हुए एक नया दस्तावेज जारी किया है। इस आधिकारिक दस्तावेज में उन दावों को सीधे तौर पर खारिज किया गया है जिनमें कहा जा रहा था कि चीनी युआन यानी CNY का मौजूदा स्तर देश के भारी ट्रेड सरप्लस की मुख्य वजह है। केंद्रीय बैंक की ओर से स्पष्ट किया गया है कि चीन के निर्यात में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी और असल वजह वहां के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की आंतरिक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त है, न कि कोई करेंसी हेरफेर।
व्यापार वार्ता और केंद्रीय बैंक का कड़ा रुख
यह आधिकारिक दस्तावेज ठीक ऐसे समय पर सामने आया है जब व्यापार आयुक्त मारोस सेफकोविक और चीनी वाणिज्य मंत्री वांग वेंटाओ के बीच उच्च स्तरीय वार्ता चल रही है। इन महत्वपूर्ण वार्ताओं के साथ ही केंद्रीय बैंक का यह स्पष्टीकरण जारी होना यह संकेत देता है कि चीन अपनी विनिमय दर नीतियों पर पीछे हटने या किसी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है। वैश्विक व्यापार मंचों पर युआन के मूल्यांकन को लेकर बहस छिड़ी हुई है और यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या चीनी मुद्रा वास्तविक मूल्य से कम आंकी गई है।
बाजार विश्लेषक हैल्पेनी के आकलन के अनुसार युआन के कम आंके जाने की संभावना काफी हद तक सही प्रतीत होती है, हालांकि इसके वास्तविक पैमाने पर अर्थशास्त्रियों के बीच मतभेद हैं। यह माना जाता है कि मुद्रा के कम मूल्य से निर्यात को सहारा मिलता है, लेकिन चीन के भारी निर्यात विस्तार को केवल विनिमय दर के चश्मे से देखना अधूरा विश्लेषण होगा। औद्योगिक दक्षता और विनिर्माण क्षमता ही चीन की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है।
आरईईआर सूचकांक और आईएमएफ का आकलन
मुद्रा के ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव पर नजर डालें तो बीआईएस यानी बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के आरईईआर डेटा से पता चलता है कि वर्ष 2005 से 2015 के अंत तक रॅन्मिन्बी यानी आरएमबी में लगभग 60 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की गई थी। हालांकि 2022 के उच्चतम स्तर से सूचकांक में पिछले साल के निचले स्तर तक 20 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट आई, जिसके बाद आज के स्तर तक 6.5 प्रतिशत का बदलाव देखने को मिला।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ का अनुमान है कि चीनी युआन में 12 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच अंडरवैल्यूएशन है। यह दायरा व्यापक बाजार सहमति के अनुरूप है। बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच चीन अपनी मुद्रा को नई मजबूती की ओर बढ़ाने के संकेत भी दे रहा है। डॉलर की चौतरफा मजबूती के बावजूद यूएसडी/सीएनवाई के हालिया पीबीओसी फिक्सिंग से यह स्पष्ट होता है कि केंद्रीय बैंक युआन को मजबूत रास्ते पर बनाए रखने का इच्छुक है। वहीं दूसरी ओर ईयूआर/सीएनवाई जनवरी के उच्चतम स्तर से 10 प्रतिशत नीचे आ चुका है और निकट अवधि में इसमें और गिरावट की गुंजाइश देखी जा रही है।
वैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक हलचल
चीनी मुद्रा के अलावा अंतरराष्ट्रीय करेंसी और कमोडिटी बाजारों में भी अहम बदलाव देखे जा रहे हैं। शुक्रवार को एशियाई कारोबार में एयूडी/यूएसडी ने साप्ताहिक निचले स्तर से वापसी करते हुए बढ़त बनाई और 0.7000 के स्तर की ओर रुख किया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में रात भर आई नरमी ने अमेरिकी डॉलर को 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे बनाए रखा, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को गति मिली। साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए की सख्त मौद्रिक नीति संबंधी अपेक्षाओं ने भी इस जोड़ी को सहारा दिया।
जापानी बाजार की बात करें तो यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के आसपास अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। शुक्रवार के आंकड़ों में सामने आया कि जापान में घरेलू खर्च लगातार नौवें महीने गिरा है, जिससे जापानी येन पर दबाव बना। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में गिरावट ने सख्त फेडरल रिजर्व और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के प्रभाव को संतुलित किया, जिससे इस जोड़ी की गिरावट पर रोक लगी। इस बीच सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव दिखा। साप्ताहिक ऊंचाई पर पहुंचने के शुरुआती प्रयास के बाद सोने की चाल कुछ धीमी पड़ी और शुक्रवार को यह 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के निशान से नीचे आ गया। अमेरिकी डॉलर की तेज बढ़त और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में लगातार वृद्धि ने पीली धातु पर दबाव बनाए रखा है।

















