अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को जानकारी दी कि उनकी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत हुई है, जिसमें रूस द्वारा अमेरिका और वैश्विक बाजार को लाखों टन डीजल ईंधन भेजने पर सहमति बनी है। ट्रंप के अनुसार, इस समझौते के तहत रूस तुरंत 300,000 टन से अधिक डीजल ईंधन की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर के दौरान 500,000 टन और उसके तुरंत बाद 1,000,000 टन डीजल उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, रूसी डीजल रिफाइनरियों की स्थिति के आधार पर थोड़े ही समय में कुल 3,000,000 टन डीजल ईंधन की अतिरिक्त खेप भेजने की भी तैयारी है।
ट्रंप ने इस बातचीत को बेहद सफल बताते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण और रूसी ऊर्जा को लेकर इस बड़े ऐलान के बाद अमेरिकियों और पूरी दुनिया के लिए डीजल की कीमतों में तेजी से रिकॉर्ड गिरावट आएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी नागरिकों, विशेष रूप से किसानों, पशुपालकों और ट्रक चालकों के लिए ईंधन की कीमतें कम करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। अपने बयान में उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा। इस घोषणा के सामने आते ही वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिसंपत्तियों पर इसका सीधा असर देखने को मिला।
कच्चे तेल और अमेरिकी डॉलर सूचकांक की ताजा स्थिति
इस घोषणा के तुरंत बाद अमेरिकी कच्चे तेल के मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। दिन के उच्च स्तर 91.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास से फिसलकर कच्चा तेल 89.95 डॉलर तक आ गया, जिसके बाद यह 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर स्थिर हुआ। तेल की कीमतों में नरमी से ऊर्जा आयातकों और परिवहन क्षेत्र को अल्पकालिक राहत के संकेत मिले हैं।
वहीं दूसरी तरफ, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के प्रदर्शन को मापने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) 102.26 के स्तर से मामूली रूप से गिरकर 102.20 पर आया, लेकिन दिन के कारोबार में यह 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ सकारात्मक दायरे में बना रहा। मुद्रा बाजार के जानकार ऊर्जा आपूर्ति के इन आंकड़ों और बॉन्ड यील्ड की चाल पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
बाजार धारणा: रिस्क-ऑन बनाम रिस्क-ऑफ का गणित
वित्तीय बाजारों में निवेशकों के रुख को समझने के लिए आमतौर पर दो तकनीकी शब्दों, रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ का इस्तेमाल किया जाता है। यह वर्गीकरण बताता है कि किसी खास समयावधि में निवेशक कितना जोखिम उठाने को तैयार हैं। रिस्क-ऑन के माहौल में निवेशक भविष्य को लेकर आशावादी होते हैं और अधिक रिटर्न पाने के लिए जोखिम भरी संपत्तियों में पैसा लगाने से नहीं हिचकिचाते। इसके विपरीत, रिस्क-ऑफ की स्थिति में निवेशक सतर्क हो जाते हैं, सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं और कम जोखिम वाली संपत्तियों की ओर रुख करते हैं, भले ही वहां रिटर्न सीमित क्यों न हो।
सामान्य तौर पर जब बाजार में रिस्क-ऑन का दौर चलता है, तब शेयर बाजारों में तेजी आती है और सोने को छोड़कर अधिकांश कमोडिटी की कीमतों में मजबूती दर्ज की जाती है, क्योंकि आर्थिक विकास की बेहतर संभावनाओं से मांग बढ़ती है। भारी कमोडिटी निर्यातक देशों की मुद्राएं मजबूत होती हैं और क्रिप्टोकरेंसी में उछाल देखने को मिलता है। इसके उलट रिस्क-ऑफ के माहौल में सरकारी बॉन्ड में तेजी आती है, सोना चमकने लगता है और जापानी येन, स्विस फ्रैंक तथा अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित समझी जाने वाली मुद्राओं में मांग बढ़ जाती है।
कमोडिटी और सेफ-हेवन मुद्राओं का व्यवहार
रिस्क-ऑन बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कनाडाई डॉलर (CAD), न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) के साथ-साथ रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) जैसी मुद्राओं में मजबूती का रुख रहता है। इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं कच्चे माल और कमोडिटी निर्यात पर बहुत अधिक निर्भर हैं, और आर्थिक गतिविधियों में तेजी की उम्मीद से कमोडिटी की कीमतों में उछाल आता है, जिससे इन मुद्राओं को बल मिलता है।
दूसरी ओर, अनिश्चितता और रिस्क-ऑफ के समय अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF) को मजबूती मिलती है। अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी है और संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी ऋण खरीदते हैं, क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के डिफॉल्ट होने की आशंका नगण्य मानी जाती है। जापानी येन में बढ़त इसलिए दिखती है क्योंकि जापानी सरकारी बॉन्ड का बड़ा हिस्सा घरेलू निवेशकों के पास है जो संकट में भी उन्हें आसानी से नहीं बेचते। वहीं स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग कानून निवेशकों को पूंजी की अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिससे स्विस फ्रैंक में निवेश बढ़ता है।
मुद्रा जोड़ों और सोने की चाल
एशियाई कारोबारी सत्र में शुक्रवार को AUD/USD जोड़ी ने अपने पिछले निचले स्तर से सुधार दर्ज किया और 0.7000 के स्तर की ओर बढ़ने का प्रयास किया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी ने डॉलर को 18 महीने के उच्चतम स्तर से नीचे रखा, जिससे इस जोड़ी को सहारा मिला। साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) को लेकर सख्त रुख की उम्मीदों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन दिया।
USD/JPY जोड़ी 158.00 के करीब अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रही। जापान में लगातार नौवें महीने घरेलू खर्च में गिरावट के आंकड़ों ने जापानी येन पर दबाव बनाया। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और फेडरल रिजर्व के रुख तथा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच इस जोड़ी की गिरावट सीमित रही।
सोने की बात करें तो शुरुआती तेजी के बाद यह साप्ताहिक उच्च स्तर से थोड़ा नीचे आ गया और शुक्रवार को 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आंकड़े से नीचे कारोबार करता दिखा। अमेरिकी डॉलर में मजबूती की गति और ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के कारण पीली धातु की आगे की बढ़त पर दबाव बना हुआ है।


















