अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आए उछाल ने सर्राफा बाजार के रुझान को प्रभावित किया है। दो साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 4.75 प्रतिशत के करीब पहुंच गई, जबकि दस साल की बेंचमार्क यील्ड वापस 5 प्रतिशत के आसपास आ गई है। इस तेज उछाल के चलते गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर मिलने वाले रिटर्न के अवसर लागत समीकरण ने पीली धातु पर दबाव डाला है। इसके बावजूद भू-राजनीतिक तनाव और अन्य वैश्विक घटनाक्रम सोने को सीमित सहारा भी दे रहे हैं।
सोने के लिए अहम तकनीकी स्तर और समर्थन दायरा
तकनीकी चार्ट पर सोना हाल ही में 4262 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा था। विश्लेषकों का मानना है कि यदि 4250 डॉलर का तात्कालिक सपोर्ट स्तर निर्णायक रूप से टूटता है, तो कीमतों पर अंतरिम मंदी का दबाव बढ़ सकता है। इस स्तर के नीचे जाने पर अगला बड़ा सपोर्ट 4000 डॉलर और फिर 3940 डॉलर पर मौजूद है, जो साल 2026 का निचला स्तर भी रहा है। दूसरी ओर, तेजी के रुख में 4333 डॉलर पर 100 दिन का मूविंग एवरेज (100 DMA) और 4431 डॉलर पर 21 दिन का मूविंग एवरेज (21 DMA) मजबूत प्रतिरोध के तौर पर काम कर रहे हैं। हालांकि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) में गिरावट की गति अब धीमी पड़ने के संकेत दे रही है, लेकिन गति अभी भी हल्की मंदी की ओर झुकी हुई है।
ताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोना 4,425 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 4,400 डॉलर से 0.57 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 3,664 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच बना हुआ है। दैनिक चार्ट पर 14-दिवसीय RSI 50 के न्यूट्रल स्तर पर है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 53 और सिग्नल लाइन 37 पर स्थित है। तकनीकी स्तरों के लिहाज से दैनिक पिवट बिंदु 4,412 डॉलर है, जहां पहला प्रतिरोध 4,452 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध 4,480 डॉलर पर है। नीचे की तरफ पहला सपोर्ट 4,385 डॉलर और दूसरा सपोर्ट 4,345 डॉलर पर है, जबकि 20-दिवसीय सपोर्ट लगभग 4,273 डॉलर के करीब आंका गया है।
डॉलर का दबाव और मध्य पूर्व के तनाव का असर
यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने दोबारा 4,300 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर कदम रखा था, हालांकि यह पिछले सत्र में छूए गए छह हफ्तों के निचले स्तर से ज्यादा दूर नहीं था। डॉलर में जुलाई के अंत के बाद के उच्चतम स्तर को छूने के बाद आई मामूली नरमी ने सोने को उबरने में मदद की। हालांकि फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण के कारण यह तेजी सीमित बनी हुई है। दूसरी तरफ, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को पूरी तरह कमजोर नहीं होने दिया है। वैश्विक निवेशक एक ओर ब्याज दरों के ऊंचे स्तर बने रहने के जोखिम को तौल रहे हैं, तो दूसरी तरफ भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौर में हेजिंग के लिए सोने को पोर्टफोलियो में बनाए रख रहे हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की हलचल
मुद्रा बाजार में भी व्यापक हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई सत्र में गुरुवार को डॉलर की तेजी थमने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में खरीदारी लौटी और AUD/USD ने 0.7100 का स्तर फिर से हासिल कर लिया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ताओं की आशा ने बाजार की जोखिम लेने की क्षमता को मजबूत किया, जिसका फायदा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मिला।
वहीं USD/JPY की जोड़ी में 156.00 के नीचे संक्षिप्त गिरावट के बाद सुधार देखा गया। बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य करने और ब्याज दरें सख्त करने के संकेतों ने जापानी येन को समर्थन दिया है। पिछले एक दशक से भी अधिक समय से जापान की बेहद कम ब्याज दरों ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया का सबसे सस्ता फंडिंग स्रोत बन गया था। अब जब बैंक ऑफ जापान नीतिगत दरों में बदलाव की तैयारी में है, तो वर्षों से चला आ रहा यह परिदृश्य नए दौर में प्रवेश कर रहा है। जब दुनिया की लगभग सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं ब्याज दरें बढ़ा चुकी हैं, जापान लंबे समय तक अपवाद बना रहा था, लेकिन अब इस मोर्चे पर भी बदलाव तय माना जा रहा है।



















