अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में एशियाई सत्र के दौरान लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कमजोरी का रुख देखा गया है और यह 98.70 के आसपास कारोबार कर रहा है। बाजार की निगाहें आगामी अमेरिकी मुद्रास्फीति और उत्पादक मूल्य सूचकांक की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जो केंद्रीय बैंक के आगामी नीतिगत फैसलों की दिशा तय करेंगी। मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद व्यापारियों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को काफी बढ़ा दिया है।
तकनीकी संकेतकों का हाल
दैनिक चार्ट पर डॉलर इंडेक्स स्पॉट 98.70 के स्तर पर बना हुआ है और यह अपनी नौ-दिवसीय तथा 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से नीचे है, जिससे निकट अवधि में मंदी का रुख बना हुआ है। छोटी अवधि का मूविंग एवरेज लंबी अवधि के औसत से नीचे चल रहा है, जबकि 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स लगभग 38 के आसपास मंदी के दायरे में बना हुआ है। इसके अलावा, मूविंग एवरेज कन्वर्जेन्स डाइवर्जेंस और अन्य संकेतक भी बिकवाली के दबाव का संकेत दे रहे हैं।
मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंक की भूमिका
अमेरिकी डॉलर दुनिया की सबसे ज्यादा कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जो वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित करती है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ही यह प्रमुख वैश्विक रिजर्व मुद्रा रही है। डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति है, जिसका उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना और पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना है। जब महंगाई केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाती है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है।
परिणाम और अन्य मुद्रा जोड़
व्यापक आर्थिक परिदृश्य में अन्य प्रमुख मुद्राएं भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं। ऑस्ट्रेलियन डॉलर और जापानी येन जैसे जोड़े भी केंद्रीय बैंक की अपेक्षाओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच सीमित दायरे में कारोबार कर रहे हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक आधिकारिक मुद्रास्फीति के आंकड़े सामने नहीं आते, तब तक विदेशी मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा।



















