दैनिक जीवन में पीढ़ियों से हमें यही सिखाया गया है कि घर में लाई जाने वाली हर खाद्य सामग्री, चाहे वे ताजी सब्जियां हों या फल, उन्हें हमेशा अच्छी तरह धोकर ही उपयोग में लाना चाहिए। हम में से अधिकांश लोग इस पारंपरिक आदत का लंबे समय से पालन करते आ रहे हैं। हालांकि, यदि आप अपनी मां या दादी के इसी नियम को कच्चे चिकन पर भी लागू कर रहे हैं, तो खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों की राय में यह तरीका पूरी तरह गलत साबित हो सकता है। बाजार से घर लाते ही यदि आप चिकन को नल के नीचे धोकर सीधे कड़ाही में डाल रहे हैं, तो यह लापरवाही आपकी सेहत के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
क्रॉस-कंटैमिनेशन का बढ़ता खतरा
क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट में डाइटीशियन बेथ सर्वोनी स्पष्ट करती हैं कि कच्चे चिकन को पानी से धोना किसी भी तरह से फायदेमंद नहीं है, बल्कि यह आपकी सेहत के लिए अत्यधिक नुकसानदायक हो सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि चिकन की सतह पर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया पानी की छींटों के साथ उड़कर रसोई के सिंक, किचन काउंटर, आसपास रखे बर्तनों और अन्य खाद्य पदार्थों तक आसानी से फैल जाते हैं। संक्षेप में कहें तो आपका यह कच्चा चिकन आपकी रसोई के भीतर क्रॉस-कंटैमिनेशन का मुख्य स्रोत साबित हो सकता है। जब आप अपनी रसोई के सिंक में खड़े होकर कच्चे चिकन को धोते हैं, तो पानी की सूक्ष्म बूंदें बैक्टीरिया को चाकू और अन्य सतहों तक पहुंचा देती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल साधारण पानी से धोने पर बैक्टीरिया मरते नहीं हैं, बल्कि उनका दायरा और अधिक बढ़ जाता है।
भारत में चिकन धोने की आम मानसिकता
भारत के अधिकांश घरों में भोजन बनाने से पहले मांस को धोने का कड़ा नियम माना जाता है। लोगों के मन में यह गहरी धारणा बैठी होती है कि बिना धोए कोई भी चीज साफ नहीं हो सकती। लेकिन वैज्ञानिक सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। चिकन को धोने से उसके कीटाणु समाप्त नहीं होते, बल्कि पानी के छींटों के माध्यम से वे पूरी रसोई में फैल जाते हैं और यहीं से क्रॉस-कंटैमिनेशन का गंभीर खतरा जन्म लेता है। क्रॉस-कंटैमिनेशन का सरल अर्थ यह है कि एक जगह मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया का दूसरी वस्तुओं तक पहुंच जाना। कल्पना कीजिए कि आपने कच्चा चिकन धोया और उसका पानी सिंक या काउंटर पर बिखर गया। बाद में उसी जगह आपने सलाद, फल या ऐसी कोई अन्य चीज रख दी जिसे दोबारा पकाया नहीं जाना है। ऐसी स्थिति में चिकन के कीटाणु उन खाद्य पदार्थों में स्थानांतरित होकर सीधे आपके पेट में पहुंच जाते हैं। फूड पॉइजनिंग के सबसे बड़े कारणों में से यह एक प्रमुख कारण माना जाता है।
साफ करने और सुरक्षित रखने का सही तरीका
चिकन को पूरी तरह सुरक्षित और खाने योग्य बनाने का एकमात्र कारगर तरीका यह है कि इसे सही तापमान यानी 165°F या लगभग 74°C तक अच्छी तरह पकाया जाए। इसी निश्चित तापमान पर साल्मोनेला और कैंपिलोबैक्टर जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। यही वे जिद्दी बैक्टीरिया हैं जो फूड पॉइजनिंग, गंभीर दस्त, उल्टी और पेट में तेज ऐंठन जैसी समस्याओं का कारण बनते हैं। कई लोग यह मानते हैं कि कच्चे चिकन को नमक के पानी में भिगोकर रखने से उसके सारे कीटाणु मर जाते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता। नमक के पानी में भिगोने से भले ही चिकन का स्वाद थोड़ा बदल जाए, लेकिन इससे उसके भीतर छिपे बैक्टीरिया का सफाया नहीं होता।
बिना धोए चिकन पकाने की सही विधि
ऐसी स्थिति में स्वाभाविक सवाल यह उठता है कि क्या दुकान से लाए गए कच्चे चिकन को बिना धोए सीधे पकाना चाहिए? इसका सटीक जवाब यह है कि यदि चिकन की सतह पर अत्यधिक नमी या खून दिखाई दे रहा है, तो उसे पानी से धोने के बजाय साफ पेपर टॉवल की मदद से हल्के हाथों से पोंछकर सुखाया जा सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया के तुरंत बाद अपने हाथों, इस्तेमाल किए गए बर्तनों और रसोई की सतहों की अच्छी तरह से सफाई करना बेहद आवश्यक है ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचा जा सके।
चिकन को सुरक्षित रखने के जरूरी सुझाव
कच्चे चिकन को पकाते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि उसे 74°C या 165°F के उच्च तापमान तक पूरी तरह पकाया जाना चाहिए। इसके अलावा, हमेशा कच्चे और पहले से पके हुए खाद्य पदार्थों को एक-दूसरे से अलग रखना चाहिए ताकि क्रॉस-कंटैमिनेशन की संभावना को पूरी तरह से रोका जा सके।



















