अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मजबूती के बीच यूरो पर लगातार दबाव बना हुआ है। शॉर्ट टर्म बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ते अंतर और यूरोपीय संघ की सप्लाई से जुड़ी चिंताओं ने साझा यूरोपीय मुद्रा को कमजोर स्थिति में बनाए रखा है। हालांकि लगातार गिरावट के बाद अब यह करेंसी ऐसे स्तरों के करीब पहुंच रही है, जहां संभावित वैल्यू बायर्स का प्रवेश देखने को मिल सकता है। यूरोपीय सत्र के दौरान करेंसी के 1.1325 से 1.1350 के दायरे में तकनीकी सपोर्ट तलाशने की संभावना जताई जा रही है।
बॉन्ड स्प्रेड और ऊर्जा चिंताओं का असर
यूरो में कमजोरी का एक बड़ा कारण अमेरिका और यूरोप के बीच फ्रंट एंड यील्ड स्प्रेड का लगातार चौड़ा होना है। इसके अलावा, यूरोपीय संघ में डीजल के संभावित अमेरिकी निर्यात प्रतिबंध के असर को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं। हालांकि अमेरिका ने कल इस बात से इनकार किया था कि वह किसी 90 दिवसीय प्रतिबंध को लागू करने जा रहा है, फिर भी ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बाजार में सतर्कता देखी जा रही है। इन मिले-जुले संकेतों ने ट्रेडर्स को यूरो पर आक्रामक दांव लगाने से रोके रखा है।
जर्मनी के आईएफओ सर्वे से मिले मिले-जुले संकेत
यूरोपीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर, जर्मनी का आईएफओ सर्वे सितंबर महीने में उम्मीद से थोड़ा बेहतर दर्ज किया गया है। सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स सुधरकर 89.9 पर पहुंच गया, जबकि उम्मीदों से जुड़ा एक्सपेक्टेशंस इंडेक्स बढ़कर 90.4 दर्ज हुआ। यह सुधार यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत का संकेत माना जा रहा है।
साल 2024 के बाद से आईएफओ सेंटीमेंट डेटा और जर्मनी की जीडीपी विकास दर के बीच असामान्य रूप से अंतर देखा गया है। दोनों के बीच यह अंतराल अभी भी बना हुआ है, लेकिन सितंबर में सुधरा हुआ सेंटीमेंट अर्थव्यवस्था में विकास की मजबूत होती रफ्तार के साथ कुछ बेहतर तालमेल दिखाता है। इसके बावजूद व्यापक कारोबारी माहौल में सतर्कता हावी है।
सपोर्ट जोन के करीब यूरो की चाल
सितंबर महीने में लगातार हुई बिकवाली के बाद तकनीकी रूप से यूरो पर मंदी का रुख बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि इसमें अभी थोड़ी और कमजोरी आ सकती है, हालांकि हालिया गिरावट अब जरूरत से ज्यादा खिंचती दिख रही है। हाजिर स्तर साल के मध्य में देखे गए निचले स्तरों के पास पहुंच रहे हैं, जिससे सस्ते भाव पर खरीदारी करने वाले निवेशकों का रुझान बढ़ सकता है। बाजार के लिए 1.1325 से 1.1350 का क्षेत्र मजबूत सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और रोजगार आंकड़े
एशियाई कारोबारी सत्र में गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में भी कमजोरी दर्ज की गई और एयूडी/यूएसडी गिरकर 0.7000 के स्तर की ओर फिसलता नजर आया। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त महीने के रोजगार आंकड़ों के मुताबिक बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई, जबकि बाजार को इसके 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान था। हालांकि रोजगार बदलाव के आंकड़े बेहतर रहे और अर्थव्यवस्था में 39.5 हजार नए रोजगार जुड़े, जो अनुमान से अधिक थे। इन सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले ट्रेडर्स काफी सतर्क बने हुए हैं।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान का बड़ा फैसला
यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में अपने तीन हफ्ते के उच्चतम स्तर से फिसलकर 158.00 के करीब आ गया। जापान में सरकारी बॉन्ड यील्ड में आए उछाल और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को सहारा दिया है। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में अतिरिक्त बढ़ोतरी की आक्रामक उम्मीदों और ऊंचे ट्रेजरी यील्ड के दम पर अमेरिकी डॉलर अपने दो महीने के उच्च स्तर पर टिका हुआ है।
इस बीच बैंक ऑफ जापान ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है, जिसे नीति निर्धारकों ने 7-2 के बहुमत से मंजूरी दी। बाजार काफी समय से इस बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा था, इसलिए इस कदम ने व्यापक उम्मीदों के अनुरूप ही प्रदर्शन किया।
सोने की कीमतों पर दबाव जारी
बुधवार की गिरावट को आगे बढ़ाते हुए सोने की कीमतों में भी नरमी का रुख जारी रहा। कारोबार के दौरान हाजिर सोना संक्षिप्त अवधि के लिए गिरकर 4,250 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे चला गया, जिसके बाद इसमें बेहद सुस्त सुधार की कोशिश देखी गई। मजबूत अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त और फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में अतिरिक्त बढ़ोतरी की अटकलों ने गुरुवार के उत्तरी अमेरिकी सत्र के उत्तरार्ध में इस कीमती धातु पर भारी दबाव बनाए रखा।



















