अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाते हुए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जारी तेजी के दबाव को दरकिनार कर दिया है। सोमवार के कारोबारी सत्र में AUD/USD की जोड़ी 0.37 प्रतिशत की बढ़त लेकर 0.6972 के स्तर पर पहुंच गई। लगातार दूसरे कारोबारी दिन हरे निशान में कारोबार करते हुए इस जोड़ी ने 0.7000 के अहम तकनीकी और मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स ने दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं की बास्केट के मुकाबले मजबूती दिखाई, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मजबूत रुख के सामने ग्रीनबैक की रफ्तार फीकी साबित हुई। एशिया में मंगलवार की शुरुआती घंटी बजने से पहले भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.6970 के आसपास अपनी सकारात्मक बढ़त को बनाए रखने में कामयाब रहा है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था और महंगाई का मिला-जुला परिदृश्य
अमेरिकी बाजारों से सामने आए ताजा आंकड़ों ने आर्थिक गतिविधियों में कुछ सुस्ती के संकेत दिए हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के सेवा क्षेत्र की रफ्तार धीमी पड़ी है, लेकिन उत्पादन और कच्चे माल की बढ़ती लागत ने एक बार फिर महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस इनपुट लागत दबाव के कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हल्का उछाल दर्ज किया गया, जिसने सामान्य तौर पर अमेरिकी डॉलर को समर्थन दिया। हालांकि, बाजार का व्यापक रुख यह संकेत दे रहा है कि फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाएं काफी कमजोर पड़ चुकी हैं। इसके बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता के माहौल ने ग्रीनबैक को निचले स्तरों पर सहारा दिया हुआ है, जिससे अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले इसका प्रदर्शन मिला-जुला बना रहा।
आरबीए की सख्त नीति और ऑस्ट्रेलियाई आर्थिक कैलेंडर
ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को घरेलू मोर्चे से भी ठोस सहारा मिला है। बुलॉक ने संकेत दिया है कि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में तीन बढ़ोतरी का कदम मुद्रास्फीति को उसके निर्धारित लक्ष्य तक वापस लाने में मददगार साबित हो सकता है। केंद्रीय बैंक के इस आक्रामक नीतिगत रुख ने निवेशकों के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के प्रति भरोसा मजबूत किया है। आने वाले दिनों में ऑस्ट्रेलियाई आर्थिक कैलेंडर काफी व्यस्त रहने वाला है, जिस पर वैश्विक मुद्रा कारोबारियों की कड़ी नजर बनी हुई है।
घरेलू आंकड़ों की कड़ी में सबसे पहले अगस्त का एआईजी उद्योग सूचकांक (AIG Industry Index) जारी होने वाला है। इसके साथ ही वेस्टपैक (Westpac) का उपभोक्ता विश्वास सूचकांक भी घरेलू पटल पर अपनी रिपोर्ट पेश करेगा। इसके उपरांत, 7 अक्टूबर को अक्टूबर महीने की उपभोक्ता मुद्रास्फीति अपेक्षाएं (Consumer Inflation Expectations) सामने आएंगी। यदि ये आंकड़े महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने की पुष्टि करते हैं, तो केंद्रीय बैंक पर सख्त रुख बनाए रखने का दबाव और बढ़ जाएगा, जिसका सीधा लाभ ऑस्ट्रेलियाई करेंसी को मिल सकता है।
तकनीकी स्तर, प्रतिरोध और सपोर्ट का विश्लेषण
तकनीकी चार्ट पर AUD/USD के लिए आगे की राह कई महत्वपूर्ण स्तरों से तय होगी। तेजी की दिशा में, मुद्रा जोड़ी को तत्काल रुकावट 0.7086 से 0.7087 के घने दायरे में मिल सकती है, जो पहले का सपोर्ट स्तर था और अब प्रतिरोध में बदल चुका है। इसके ठीक ऊपर 0.7090 पर 50-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज (SMA) मौजूद है, जो एक मजबूत दीवार का काम करेगा। यदि यह स्तर पार होता है, तो 0.7111 और 0.7118 के आसपास अतिरिक्त ट्रेंड-लाइन बाधाएं सामने आएंगी, जबकि लंबी अवधि का क्षैतिज अवरोध 0.7198 के स्तर पर बना हुआ है।
गिरावट की स्थिति में, शुरुआती सपोर्ट हालिया निचले स्तर 0.6946 के करीब स्थित है। यदि बिकवाली का दबाव गहराता है, तो पुराना डाउनवर्ड ट्रेंड-लाइन ब्रेकआउट स्तर 0.6367 पर केंद्रित होगा, हालांकि यह गहरा स्तर तभी चर्चा में आएगा जब बाजार में मौजूदा मंदी का रुख बहुत ज्यादा हावी हो जाए। लाइव बाजार संकेतकों के अनुसार, 52-सप्ताह का दायरा 0.6422 से 0.7277 बना हुआ है, जबकि दैनिक पिवट 0.6973 पर टिका है, जिसके साथ प्रतिरोध R1 0.6976 और R2 0.6979 तथा समर्थन S1 0.6970 और S2 0.6967 पर नजर आ रहे हैं।
वैश्विक मुद्राओं और सर्राफा बाजार की स्थिति
वैश्विक मुद्रा तालिकाओं और हीट मैप के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि सोमवार के कारोबार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने यूरो के मुकाबले सबसे शानदार प्रदर्शन किया और सबसे मजबूत मुद्रा बनकर उभरा। अन्य प्रमुख जोड़ियों में, USD/JPY ने एशियाई सत्र में अपनी पिछली गिरावट की भरपाई करते हुए 158.00 का स्तर दोबारा हासिल कर लिया। हालांकि येन में किसी भी बड़ी गिरावट को बैंक ऑफ जापान (BoJ) की सख्त मौद्रिक अपेक्षाएं और जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप का जोखिम सीमित कर सकता है।
कमोडिटी बाजार में, सोने की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा गया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और डॉलर की मजबूती के बीच कीमती धातु ने देर सोमवार को कुछ स्थिरता हासिल की और 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर के करीब पहुंची। वहीं यूरोपीय मोर्चे पर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के समक्ष एक गंभीर दुविधा बनी हुई है। सामान्य परिस्थितियों में लक्ष्य से दोगुनी महंगाई पर ब्याज दरें बढ़ाना सीधा कदम होता, लेकिन बॉन्ड बाजार द्वारा पहले ही वित्तीय सख्ती किए जाने के कारण केंद्रीय बैंक के नीतिगत विकल्प बेहद जटिल हो गए हैं।















