सिंगापुर की मौद्रिक नीति में आने वाले हफ्तों के दौरान एक और नपा-तुला बदलाव देखने को मिल सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के माहौल के बीच सिंगापुर का केंद्रीय बैंक अपनी मुद्रा नीति को धीरे-धीरे कड़ा करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के विश्लेषक एडवर्ड ली के ताजा आकलन के अनुसार, मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर यानी एमएएस अक्टूबर के नीतिगत चक्र में बेहद मामूली स्तर की मौद्रिक सख्ती लागू करने का निर्णय ले सकता है। इस संभावित कदम का प्राथमिक उद्देश्य अर्थव्यवस्था में बनी तेज वृद्धि और मूल्य स्तर पर बढ़ते दबावों को नियंत्रित करना माना जा रहा है।
नीतिगत बैंड और विनिमय दर ढलान में बदलाव की रूपरेखा
विश्लेषण के मुताबिक सिंगापुर मौद्रिक प्राधिकरण अपनी नीतिगत मुद्रा टोकरी की ढलान यानी एसजीडी नीर स्लोप में पच्चीस आधार अंकों की वृद्धि कर सकता है। इस समायोजन के बाद यह ढलान मौजूदा 1.25 प्रतिशत से बढ़कर 1.5 प्रतिशत पर पहुंच जाने की संभावना है। हालांकि, विनिमय दर नीति से जुड़े अन्य दो प्रमुख घटकों यानी नीतिगत बैंड के केंद्र बिंदु और उसके दोनों छोरों की चौड़ाई में किसी भी प्रकार के फेरबदल की संभावना नहीं जताई गई है। उन्हें पूरी तरह से अपरिवर्तित रखा जाएगा, जिससे मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से बचा जा सके।
एडवर्ड ली ने अपने आकलन में स्पष्ट किया है कि मुद्रास्फीति के दबाव लगातार मजबूत बने हुए हैं और कीमतों में ऊपर की ओर जोखिम अभी भी बना हुआ है। इसके अलावा देश की आर्थिक वृद्धि के आंकड़े ठोस बने हुए हैं, जो केंद्रीय बैंक को अपनी पूर्ववर्ती मौद्रिक ढील को वापस लेने का ठोस आधार प्रदान करते हैं। विश्लेषक के अनुसार वर्ष 2025 की पहली छमाही यानी एच1-2025 के दौरान जो एहतियाती मौद्रिक ढील दी गई थी, उसमें से पच्चीस आधार अंकों की राहत को वापस लिया जाना अभी बाकी है। अक्टूबर का कदम उसी दिशा में एक संतुलित प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
नीतिगत समीक्षा का जोखिम और अनिश्चितता का स्तर
अक्टूबर की इस मौद्रिक समीक्षा को काफी करीबी मुकाबला यानी क्लोज कॉल माना जा रहा है। विश्लेषक का मानना है कि केंद्रीय बैंक के सामने मुख्य विकल्प सख्ती करने या फिर वर्तमान नीति को यथावत बनाए रखने का होगा। यदि केंद्रीय बैंक दरों में बदलाव नहीं करने का फैसला लेता है, तो ठहराव ही इस पूरे अनुमान के लिए सबसे बड़ा जोखिम साबित होगा। मौजूदा परिस्थितियों में अनिश्चितता का स्तर काफी ऊंचा बना हुआ है, इसलिए प्राधिकरण की किसी भी प्रतिक्रिया के बेहद नपे-तुले होने की अपेक्षा की जा रही है। मुद्रास्फीति का रुख ही अंततः नीति निर्माताओं को सख्ती जारी रखने के लिए सबसे बड़ा तर्क उपलब्ध करा रहा है।
एशियाई मुद्रा और कमोडिटी बाजार का व्यापक परिदृश्य
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार के व्यापक फलक पर अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों में भी स्पष्ट हलचल दर्ज की जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी एयूडी/यूएसडी मंगलवार को एशियाई बाजार की शुरुआत से ठीक पहले 0.6970 के आसपास खरीद के मजबूत समर्थन के साथ कारोबार कर रही है। शुक्रवार को आई तेजी के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए इस जोड़ी ने 0.7000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर फिर से रुख किया है, जबकि ग्रीनबैक में लगातार मजबूत बढ़त का दौर जारी है। आगे चलकर घरेलू कैलेंडर पर वेस्टपैक के उपभोक्ता विश्वास सूचकांक के आंकड़े जारी होने वाले हैं, जिन पर निवेशकों की गहरी नजर बनी रहेगी।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की विनिमय दर यानी यूएसडी/जेपीवाई ने सोमवार के एशियाई कारोबारी सत्र में अपनी पिछली गिरावट को पीछे छोड़ते हुए दोबारा 158.00 का स्तर हासिल कर लिया है। यह मुद्रा जोड़ी पिछले एक सप्ताह से एक सीमित दायरे में कारोबार कर रही है। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें भले ही कमजोर पड़ रही हों, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण अमेरिकी डॉलर को लगातार सहारा मिल रहा है। हालांकि, जापानी येन की संभावित रिकवरी, बैंक ऑफ जापान की आक्रामक नीतिगत अपेक्षाओं और बाजार में संभावित आधिकारिक हस्तक्षेप के जोखिमों के चलते इस मुद्रा जोड़ी की और ज्यादा बढ़त सीमित रहने की संभावना है।
सोने की कीमतें और यूरोपीय केंद्रीय बैंक की दोहरी चुनौती
कमोडिटी बाजार की बात करें तो सोने की कीमतों में सोमवार देर शाम कुछ स्थिरता लौटती दिखी और यह बहुमूल्य धातु 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर के बेहद करीब पहुंच गई। अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड प्रतिफल में आई तेजी के चलते सोने के भाव में उतार-चढ़ाव का रुख बना रहा है। विभिन्न अवधि वाले ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी ने निवेशकों के रुझान को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।
इसी बीच वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों के समक्ष चुनौतियां लगातार जटिल होती जा रही हैं। सामान्य आर्थिक हालात में जब मुद्रास्फीति अपने तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से बढ़ रही हो, तो यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के पास ब्याज दरें बढ़ाने का सीधा और स्पष्ट विकल्प होता है। मगर वर्तमान स्थितियां सामान्य नहीं हैं। इस बार बॉन्ड बाजार पहले ही ईसीबी के हिस्से की मौद्रिक सख्ती का एक बड़ा हिस्सा खुद ही पूरा कर चुका है। बॉन्ड प्रतिफल में हुए इस स्वतः बदलाव के कारण यूरोपीय केंद्रीय बैंक एक बेहद पेचीदा और कठिन दुविधा का सामना कर रहा है, जहां पारंपरिक दर वृद्धि के फैसले लेना अब उतना आसान नहीं रह गया है।















