अंतर्राष्ट्रीय सर्राफा बाजार में सोने की चमक फीकी पड़ती दिखाई दे रही है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमतें गिरकर लगभग चार हफ्ते के निचले स्तर तक पहुंच गईं और यह 4,300 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे कारोबार करती देखी गईं। बाजार में मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति में सख्ती के संकेतों ने पीली धातु पर गहरा दबाव बनाया है। इसके साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ती मुद्रास्फीति और वैश्विक बॉन्ड बाजार में जारी बिकवाली ने गैर-प्रतिफल वाली इस संपत्ति से निवेशकों का ध्यान भटका दिया है।
लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमत में 1.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 4,348 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर हुई है, जबकि इसका पिछला बंद भाव 4,431 डॉलर था। पिछले 52 हफ्तों के दौरान सोने ने 3,486 डॉलर से लेकर 5,586 डॉलर के दायरे में कारोबार किया है। वर्तमान में बाजार की ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.30 गुना बनी हुई है, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है।
मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य संघर्ष और ऊर्जा बाजार पर असर
मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव अचानक काफी बढ़ गया है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मच गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमान द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सशस्त्र बलों ने ईरान में स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास स्थित कसम द्वीप और दक्षिणी ईरान के विभिन्न हिस्सों में भीषण धमाकों की खबरें आई हैं।
सैन्य गतिविधियों की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी दर्ज की गई और पिछले छह कारोबारी दिनों में यह पांचवीं बार सकारात्मक दायरे में बंद हुआ है। क्रूड ऑयल की कीमतें 24 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। ऊर्जा बाजार में शांत दिख रही स्थिति के बीच डीजल की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बनाया है। अमेरिका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई के बीच का अंतर पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया और 102.00 डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गया।
फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और बॉन्ड यील्ड में तेजी
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से यह आशंका बढ़ गई है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति की लहर दोबारा लौट सकती है। इस स्थिति में अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों को अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। जैक्सन होल सिंपोजियम में फेड चेयर केविन वॉश द्वारा दिए गए बयानों ने सितंबर महीने में होने वाली बैठक के दौरान ब्याज दरें बढ़ाए जाने की उम्मीदों को और मजबूत कर दिया है।
इसी बीच, राजकोषीय घाटे को लेकर बढ़ती चिंताओं ने वैश्विक बॉन्ड बाजारों में बिकवाली का दौर शुरू कर दिया है। बेंचमार्क 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर जनवरी 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। बॉन्ड यील्ड में इस तरह की बढ़ोतरी से सोने जैसी संपत्ति holding लागत बढ़ जाती है, क्योंकि इस पर कोई ब्याज या नियमित आय नहीं मिलती। यही वजह है कि संस्थागत निवेशक सोने से अपनी पूंजी निकालकर ऊंची यील्ड देने वाले अमेरिकी डॉलर और सरकारी ऋण पत्रों में लगा रहे हैं।
तकनीकी संकेत और सोने के लिए महत्वपूर्ण समर्थन स्तर
तकनीकी चार्ट पर सोने के घटते रुख की पुष्टि हो रही है। हाल ही में जुलाई के निचले स्तर से हुई रिकवरी का 50 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर नीचे की ओर टूटना विक्रेताओं के मजबूत होने का संकेत देता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस सूचकांक शून्य रेखा से काफी नीचे और नकारात्मक बना हुआ है। लाइव डेटा के अनुसार, MACD मान 79.29 है, जो इसके सिग्नल लाइन 97.66 से नीचे है और हिस्टोग्राम -18.37 पर मंदी का स्पष्ट रुख दिखा रहा है।
रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 44 के करीब बना हुआ है (लाइव RSI 47 पर है), जो खरीदारी की गति कमजोर होने की ओर इशारा करता है। वहीं स्टोकैस्टिक सूचकांक की फास्ट लाइन 9 और सिग्नल लाइन 29 पर आ गई है। सोने के लिए 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 4,276 डॉलर के आसपास एक महत्वपूर्ण समर्थन रेखा है। यदि कीमतें इस स्तर से नीचे बंद होती हैं, तो गिरावट और तेज हो सकती है। मौजूदा तकनीकी सेटअप में पिवट प्वाइंट 4,360 डॉलर पर है, जबकि पहला समर्थन स्तर S1 4,317 डॉलर और दूसरा समर्थन S2 4,287 डॉलर पर स्थित है। ऊपर की तरफ पहला प्रतिरोध R1 4,390 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध R2 4,433 डॉलर पर देखा जा रहा है।
अमेरिकी डॉलर की बढ़त से प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में गिरावट
सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग तेजी से बढ़ी है, जिसका सीधा असर अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की विनिमय दरों पर पड़ा है। करेंसी हीट मैप के अनुसार, अमेरिकी डॉलर ने न्यू ज़ीलैंड डॉलर के मुकाबले सबसे ज्यादा मजबूती हासिल की है।
यूरो और ब्रिटिश पाउंड दोनों ही अमेरिकी डॉलर के सामने पस्त नजर आ रहे हैं। EUR/USD जोड़ी में दैनिक गिरावट तेज हो गई है और यह अपने महत्वपूर्ण समर्थन स्तर 1.1600 के नीचे चली गई है। दूसरी तरफ GBP/USD में मंदी का रुख बना हुआ है और यह गिरकर 1.3500 के निचले स्तर तक आ गया है, जो इसका दो हफ्ते का निचला स्तर है। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों में मिली-जुली स्थिति के बावजूद जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के कारण ग्रीनबैक हर जगह बढ़त बनाए हुए है।
शुक्रवार को आने वाली अमेरिकी NFP रिपोर्ट पर टिकीं नजरें
बाजार के सभी प्रतिभागियों का ध्यान अब शुक्रवार को जारी होने वाली अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट पर केंद्रित हो गया है। रोजगार के ये आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति और श्रम बाजार की मजबूती का आकलन करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि NFP आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो फेडरल रिजर्व के लिए सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाना और आसान हो जाएगा, जिससे सोने पर मंदी का दबाव और गहरा सकता है। निवेशक फिलहाल कोई भी बड़ा दांव लगाने से पहले इस रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।



















