उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस के अवसर पर संगठन से जुड़े करोड़ों कार्यकर्ताओं को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने संगठन की कार्यशैली, निस्वार्थ सेवा परंपरा और राष्ट्र के प्रति निष्ठा की सराहना करते हुए इसे समाज निर्माण की एक महत्वपूर्ण धुरी बताया। विजयदशमी के पावन पर्व पर स्थापित होने वाले इस संगठन के योगदान को याद करते हुए उन्होंने स्वयंसेवकों के समर्पण भाव को रेखांकित किया।
योगी आदित्यनाथ का संदेश और विचार
सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में योगी आदित्यनाथ ने संगठन को विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक मंच बताया। उन्होंने लिखा कि संगठन ने हमेशा राष्ट्र को आराध्य, समाज को परिवार और सेवा को साधना मानकर काम किया है। उन्होंने त्याग और समर्पण के भाव को उजागर करते हुए रेखांकित किया कि व्यक्ति निर्माण से लेकर समाज और राष्ट्र के उत्थान तक 'इदं राष्ट्राय इदं न मम' का दर्शन ही संगठन की मूल प्रेरणा रहा है। उनके अनुसार, स्वयंसेवकों का यह निरंतर प्रयास देश की एकता और सामाजिक ताने-बाने को सुदृढ़ करने में सहायक रहा है।
संगठन की भूमिका और सामाजिक कार्य
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी। स्थापना के बाद से संगठन ने शाखाओं के माध्यम से चरित्र निर्माण, अनुशासन और देशभक्ति की भावना जागृत करने का काम किया है। प्राकृतिक आपदाओं, महामारियों और संकट के समय संघ के सेवा प्रकल्पों ने देश के दूरदराज इलाकों में राहत पहुंचाने का कार्य किया है। वहीं, सामाजिक और वैचारिक हलकों में संघ के कार्यों और इसके सेवा प्रकल्पों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं, जहां समर्थक इसे राष्ट्र सेवा का अद्वितीय उदाहरण मानते हैं, वहीं कई विश्लेषक इसके सामाजिक अभियानों को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जोड़कर देखते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
योगी आदित्यनाथ के इस संदेश पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से मिलीजुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने संगठन के अनुशासित कार्यों की सराहना करते हुए विजयादशमी की बधाई दी, जबकि कुछ अन्य यूजर्स ने जमीनी स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही और संगठन के ऐतिहासिक योगदान को लेकर सवाल उठाए।





























