यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो में अमेरिकी डॉलर के खिलाफ हल्की तेजी के संकेत मिल रहे हैं। हालिया उतार-चढ़ाव के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो एक निश्चित दायरे में कारोबार कर रहा है। निवेशक इस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जारी होने वाले महंगाई और विकास दर के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो विनिमय दरों की भविष्य की राह तय कर सकते हैं।
यूरो का 24 घंटे का तकनीकी ढांचा और मूल्य चाल
हाल के कारोबारी सत्रों में यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में सीमित हलचल देखी गई है। दो दिन पहले EUR/USD दर 1.1655 और 1.1687 के बीच बनी रही और अंततः 0.15% की हल्की गिरावट के साथ 1.1662 पर बंद हुई। इसके बाद बाजार विश्लेषकों का अनुमान था कि मूल्य 1.1650 और 1.1685 के बीच बना रहेगा। हालांकि, असल कारोबारी गतिविधियों के दौरान यूरो फिसलकर 1.1650 के निचले स्तर तक गया और फिर संभलकर 1.1679 के उच्च स्तर को छूते हुए 1.1674 पर बंद हुआ, जो 0.10% की बढ़त दर्शाता है।
वॉल स्ट्रीट पर मंगलवार के कारोबारी सत्र के समापन के बाद स्पॉट रेट 1.1670 के आसपास दर्ज किया गया। अमेरिकी डॉलर में आई मामूली नरमी ने यूरो को लगातार दो दिनों की गिरावट रोकने में मदद की है, जिससे 1.1700 का मुख्य स्तर फिर से फोकस में आ गया है। आगामी 24 घंटों के दृष्टिकोण से यूरो के लिए 1.1695 के स्तर को टेस्ट करने का मौका बन सकता है। हालांकि, 1.1710 पर मौजूद अगले रेजिस्टेंस स्तर को पार करना फिलहाल चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। नीचे की तरफ 1.1665 और 1.1655 पर महत्वपूर्ण सपोर्ट मौजूद है।
1 से 3 हफ्तों का दृष्टिकोण और 1.1725 का लक्ष्य
मध्यम अवधि यानी 1 से 3 हफ्तों के परिदृश्य को देखें तो यूरो पर तेजी का नजरिया बना हुआ है। 20 अगस्त को जब स्पॉट रेट 1.1675 पर था, तब 1.1725 के स्तर तक जाने की संभावना जताई गई थी। हालांकि यूरो ने दो बार 1.1710 के स्तर को छूने की कोशिश की है, लेकिन वह इस स्तर से आगे बड़ी बढ़त हासिल नहीं कर सका है।
इसके बावजूद यूरो का तेजी का रुझान तब तक कायम रहेगा जब तक यह 1.1640 के मजबूत सपोर्ट स्तर से ऊपर बना रहता है। इससे पहले सपोर्ट स्तर 1.1630 पर था। बुधवार को जारी होने वाले अमेरिका के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर पीसीई मूल्य सूचकांक और दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP के संशोधित आंकड़े बाजार के लिए अहम दिशा तय करेंगे।
ब्रिटिश पाउंड और सोने पर डॉलर का प्रभाव
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भी अमेरिकी डॉलर की गतिविधियों का असर साफ देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड मामूली दबाव में रहा और 1.3600 के मध्य स्तर से नीचे आ गया। इससे पाउंड की पिछले दिन की बढ़त का कुछ हिस्सा घट गया। हालांकि GBP/USD की दरें पिछले शुक्रवार को बनाए गए छह महीने के उच्चतम स्तर के बेहद करीब बनी हुई हैं।
कमोडिटी बाजार में सोने में नए सिरे से बिकवाली देखने को मिली है। दोतरफा उतार-चढ़ाव के बाद सोना $4,650 से नीचे फिसल गया है। अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती ने सोने पर दबाव डाला है। इसके अलावा शुक्रवार को जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेडरल रिजर्व अध्यक्ष केविन वॉर्श के संबोधन और पीसीई महंगाई आंकड़ों से ब्याज दरों के भविष्य के रुख पर नए संकेत मिल सकते हैं।
मीम कॉइन्स में मुनाफावसूली से गिरावट का खतरा
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी निवेशकों की मुनाफावसूली का असर दिख रहा है। पिछले सप्ताह दो अंकों की शानदार बढ़त हासिल करने के बाद डॉगकॉइन, शिबा इनु और पेपे जैसे प्रमुख मीम कॉइन्स में तेजी का मोमेंटम कमजोर पड़ा है।
बिकवाली के दबाव के चलते DOGE और PEPE में और गिरावट आने का जोखिम बना हुआ है। वहीं दूसरी तरफ SHIB अपने तकनीकी सपोर्ट स्तर को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।



















