वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय सतर्कता का माहौल बना हुआ है, क्योंकि निवेशक यूरोपियन सेंट्रल बैंक की मौद्रिक नीति और संयुक्त राज्य अमेरिका से आने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर अपनी नजरें टिकाए हुए हैं। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपियन सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन क्षेत्र के लिए केंद्रीय बैंक के रूप में कार्य करता है। इस संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी मौद्रिक नीति का संचालन करना और पूरे क्षेत्र में कीमतों की स्थिरता बनाए रखना है। इस मुख्य उद्देश्य को पूरा करने के लिए बैंक मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर को लगभग 2% के आसपास बनाए रखने का लक्ष्य रखता है। ब्याज दरों में वृद्धि या कटौती करना बैंक का सबसे प्रमुख हथियार है, जहां ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर यूरो को मजबूती प्रदान करती हैं, जबकि दरें घटने पर मुद्रा पर दबाव देखने को मिलता है।
केंद्रीय बैंक की नीतियों का निर्धारण उसकी गवर्निंग काउंसिल द्वारा किया जाता है, जिसकी बैठक वर्ष में आठ बार आयोजित की जाती है। इस निर्णय लेने वाली संस्था में यूरोज़ोन के सभी राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और छह स्थायी कार्यकारी सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें यूरोपियन सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड भी शामिल हैं। इन महत्वपूर्ण बैठकों के दौरान गवर्निंग काउंसिल आर्थिक आंकड़ों और मुद्रास्फीति के रुझानों की समीक्षा करती है ताकि यूरोज़ोन अर्थव्यवस्था के लिए उचित ब्याज दरों का फैसला लिया जा सके।
क्वांटिटेटिव ईज़िंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की प्रक्रिया
जब असामान्य आर्थिक परिस्थितियों में केवल ब्याज दरों में बदलाव करना कीमतों की स्थिरता बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं होता, तब यूरोपियन सेंट्रल बैंक क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) जैसे अपरंपरागत नीतिगत उपायों का सहारा लेता है। क्वांटिटेटिव ईज़िंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत केंद्रीय बैंक नई यूरो मुद्रा जारी करता है और उससे बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदता है। इस प्रक्रिया से वित्तीय प्रणाली में तरलता यानी नकदी बढ़ जाती है, जिससे ऋण लेना आसान और सस्ता हो जाता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर बॉन्ड खरीदारी की इस नीति के कारण आमतौर पर यूरो की विनिमय दर में गिरावट देखने को मिलती है और मुद्रा कमजोर होती है।
इतिहास पर नजर डालें तो केंद्रीय बैंक ने गंभीर आर्थिक संकटों के समय क्वांटिटेटिव ईज़िंग का इस्तेमाल किया है। वर्ष 2009-11 के महान वित्तीय संकट के दौरान, 2015 में जब महंगाई दर लगातार निचले स्तर पर बनी हुई थी, और हाल ही में कोविड महामारी के समय बैंक ने इस नीति को लागू किया था। इसके विपरीत, जब अर्थव्यवस्था में सुधार होने लगता है और महंगाई बढ़ने लगती है, तब बैंक क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) की शुरुआत करता है। क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के तहत बैंक नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड्स के मूलधन का पुनर्निवेश भी रोक देता है। बाजार से नकदी वापस खींचने की यह प्रक्रिया यूरो के लिए सकारात्मक यानी बुलिश मानी जाती है।
विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख करेंसी जोड़ों का हाल
विदेशी मुद्रा बाजार में आगामी आर्थिक आंकड़ों को लेकर हलचल तेज हो गई है और प्रमुख करेंसी जोड़े सीमित दायरे में कारोबार कर रहे हैं। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर (GBP/USD) की जोड़ी बुधवार के यूरोपीय कारोबारी सत्र में 1.3650 के स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करती दिखी। इससे पिछले कारोबारी दिन दर्ज की गई बढ़त का कुछ हिस्सा घट गया है, हालांकि यह जोड़ी बीते शुक्रवार को छूए गए अपने छह महीने के उच्च स्तर के करीब बनी हुई है। मुद्रा कारोबारी अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मूल्य सूचकांक के आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दूसरी ओर, यूरो और अमेरिकी डॉलर (EUR/USD) की जोड़ी बुधवार के यूरोपीय सत्र में 1.1650 के स्तर की ओर गिरती हुई नजर आई। निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और मध्य पूर्व में जारी अनिश्चितता के बीच अमेरिकी डॉलर में हल्का सुधार देखा गया है। बाजार प्रतिभागी अमेरिका के आगामी पीसीई महंगाई आंकड़ों और दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के संशोधित आंकड़ों पर बारीक नजर रखे हुए हैं, जिससे मुद्रा बाजार को नया रुख मिल सकता है।
कमोडिटी बाजार और क्रिप्टोकरेंसी प्रदर्शन का ब्योरा
कमोडिटी बाजार में भी डॉलर की मजबूती और केंद्रीय बैंकों के रुख का असर देखा जा रहा है। यूरोपीय सत्र की शुरुआत से पहले सोने की कीमतें $4,650 प्रति औंस के स्तर से नीचे मामूली गिरावट के साथ कारोबार करती दिखीं। हालांकि सोने में बहुत ज्यादा बिकवाली का दबाव नहीं था और यह पिछले दिन के दायरे में ही बनी रही। अमेरिकी पीसीई महंगाई दर के आंकड़ों से पहले डॉलर में आई मजबूती ने सोने की कीमतों पर दबाव डाला है। इसके अलावा, निवेशक शुक्रवार को जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉश के भाषण का इंतजार कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी ब्याज दरों के भावी मार्ग पर संकेत मिल सकते हैं।
डिजिटल एसेट बाजार की बात करें तो डॉगकॉइन (DOGE), शिबा इनु (SHIB) और पेपे (PEPE) जैसे प्रमुख मीम कॉइन्स में पिछले हफ्ते की दोहरे अंकों की बढ़त के बाद अब तेजी का रुझान सुस्त पड़ता दिख रहा है। मुनाफावसूली के कारण इन टोकन्स पर नीचे की ओर दबाव बना हुआ है। जहां DOGE और PEPE में आगे और गिरावट का जोखिम बना हुआ है, वहीं SHIB अपने मजबूत सपोर्ट लेवल पर टिका हुआ है और निवेशक समग्र क्रिप्टोकरेंसी बाजार में नए संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।



















