अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार, 23 सितंबर को अमेरिकी डॉलर में व्यापक मजबूती देखी गई, जहां प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर इंडेक्स ने अपनी बढ़त का दायरा बढ़ाया। सप्ताह के शुरुआती कारोबारी सत्रों में अमेरिकी मुद्रा ने विशेष रूप से कैनेडियन डॉलर के सामने सबसे तगड़ा प्रदर्शन दर्ज किया, जबकि अन्य प्रमुख करेंसियों के मुकाबले भी इसका रुख तेजी का रहा। वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कूटनीतिक समाधान की सुगबुगाहट के बीच, अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के सख्त बयानों ने निवेशकों को डॉलर की ओर आकर्षित किया है। बाजार सहभागियों की निगाहें अब जारी होने वाले फ्लैश पीएमआई आंकड़ों और शीर्ष वैश्विक नेताओं की होने वाली द्विपक्षीय बैठकों पर टिकी हैं।
फेडरल रिजर्व के सख्त तेवर और ब्याज दरों का परिदृश्य
अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं की ओर से आ रहे बयानों ने मुद्रा बाजार में तेजी की धारणा को सहारा दिया है। बोस्टन फेडरल रिजर्व की प्रेसिडेंट सुसान कॉलिंस ने हालिया नीतिगत समीक्षा के बाद एक कड़ा संदेश दिया, जहां उनके संबोधन के रुख को विश्लेषकों ने काफी आक्रामक माना। कॉलिंस ने पिछले सप्ताह ब्याज दरों में की गई वृद्धि का स्पष्ट समर्थन किया और आगाह किया कि मुद्रास्फीति अब भी केंद्रीय बैंक के तय लक्ष्य से काफी ऊपर रह सकती है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति दो प्रतिशत के स्तर से काफी ऊपर बनी रह सकती है। इसके साथ ही अमेरिकी श्रम बाजार की मजबूती का हवाला देते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि नीतिगत दरों को लंबे समय तक सख्त बनाए रखने की जरूरत महसूस हो रही है। जब फेडरल फंड्स रेट को महंगाई नियंत्रित करने के उद्देश्य से अधिक समय तक प्रतिबंधात्मक रखा जाता है, तो यह पारंपरिक रूप से अमेरिकी डॉलर के लिए एक सकारात्मक पृष्ठभूमि तैयार करता है।
अमेरिकी डॉलर के मूल्य को निर्धारित करने वाला सबसे प्रमुख कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति ही है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक को दो प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिनमें कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी महंगाई पर नियंत्रण पाना और अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना शामिल है। इन दोनों उद्देश्यों की पूर्ति के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों का समायोजन करना होता है। जब वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई दो प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य को लांघ जाती है, तब केंद्रीय बैंक दरों में बढ़ोतरी का रास्ता चुनता है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, यदि महंगाई दो प्रतिशत से नीचे फिसल जाए या बेरोजगारी दर चिंताजनक रूप से बढ़ जाए, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है, जिसका दबाव सीधे तौर पर डॉलर के मूल्यांकन पर देखा जाता है।
क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का असर
अत्यंत असाधारण या गंभीर आर्थिक संकट की स्थितियों में, केंद्रीय बैंक सिर्फ दरों में बदलाव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अतिरिक्त मुद्रा जारी करके क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का सहारा भी लेता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी ठप या संकटग्रस्त वित्तीय तंत्र में ऋण के प्रवाह को तेजी से बढ़ाया जाता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है, जिसका इस्तेमाल तब होता है जब बैंकों के बीच एक-दूसरे को कर्ज देने का भरोसा खत्म हो जाता है और ऋण बाजार पूरी तरह सूखने लगता है। साल 2008 के बड़े वित्तीय संकट के दौरान जब पारंपरिक दर कटौती से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके थे, तब फेडरल रिजर्व ने इसी रणनीति को मुख्य हथियार बनाया था। इस व्यवस्था में केंद्रीय बैंक नई मुद्रा सृजित करके वित्तीय संस्थानों से मुख्य रूप से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदता है। व्यापक पैमाने पर बॉन्ड खरीद और बाजार में नकदी की आपूर्ति बढ़ने से आम तौर पर डॉलर का मूल्य कमजोर पड़ता है।
इसके ठीक उलट प्रक्रिया को क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी कहा जाता है। क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के तहत फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने पोर्टफोलियो में परिपक्व होने वाले बॉन्ड की मूल राशि का नए बॉन्ड में पुनर्निवेश नहीं करता। तंत्र से नकदी की इस क्रमिक निकासी को पारंपरिक रूप से डॉलर के लिए एक मजबूत और सकारात्मक कारक माना जाता है।
ग्लोबल रिजर्व करेंसी के रूप में अमेरिकी डॉलर का दायरा
अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया भर के दर्जनों देशों में स्थानीय नकदी के समानांतर एक व्यावहारिक मुद्रा के रूप में स्वीकार की जाती है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में होने वाले कुल दैनिक कारोबार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी 88 प्रतिशत से अधिक है, जो औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर के दैनिक लेनदेन के बराबर बैठती है। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह लेते हुए दुनिया की सबसे प्रमुख आरक्षित मुद्रा का दर्जा हासिल किया था। अपने इतिहास के अधिकांश कालखंड में डॉलर सोने के भंडार से समर्थित था, लेकिन वर्ष 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के टूटने के साथ ही गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त हो गया और यह पूरी तरह से फिएट मुद्रा प्रणाली में तब्दील हो गया।
कच्चे तेल में गिरावट और पश्चिम एशिया का कूटनीतिक घटनाक्रम
ऊर्जा बाजार के मोर्चे पर, ब्रेंट क्रूड पर लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में कमजोर हुईं और सितंबर की शुरुआत के बाद पहली बार फिसलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गईं। वाणिज्यिक बैंक कोमर्जबैंक के विश्लेषकों ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए बताया कि पाइपलाइन को फिर से चालू करने की दिशा में हुई प्रगति और संयुक्त राज्य अमेरिका तथा ईरान के बीच सीधी बातचीत के चलते तेल की कीमतों में लगातार पांचवें दिन गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, बैंक के रणनीतिकारों ने आगाह किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी बंद पड़ा है और क्षेत्र का व्यापक विवाद अभी सुलझा नहीं है। उनका आकलन है कि हालिया बिकवाली आपूर्ति से जुड़ी तात्कालिक घबराहट में आई कमी को दर्शाती है, न कि भू-राजनीतिक जोखिमों के किसी स्थायी समाधान को।
सोने की कीमतों पर दबाव और चीन की भारी खरीदारी
ब्याज दरों में लंबे समय तक मजबूती की आशंका और डॉलर के नए उच्च स्तर छूने से कीमती धातुओं में सुस्ती का माहौल बना हुआ है। पिछले सत्र में 4,300 डॉलर के निचले दायरे से सुधरने के बाद बुधवार को एशियाई कारोबार में सोने की कीमतों को नए सिरे से बिकवाली का सामना करना पड़ा। बिना ब्याज वाली इस परिसंपत्ति पर 30 जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचे डॉलर का भारी असर पड़ रहा है। दूसरी ओर, भौतिक मांग के मोर्चे पर चीन का रुख काफी आक्रामक बना हुआ है। कोमर्जबैंक के विश्लेषकों ने चीन के सीमा शुल्क प्राधिकरण के आंकड़ों के हवाले से उल्लेख किया कि देश ने चालू वर्ष के शुरुआती आठ महीनों में 1,000 टन से अधिक सोने का आयात किया, जो पिछले पूरे वर्ष के कुल आयात के आंकड़े को पार कर चुका है।
चीन के आधिकारिक क्षेत्र यानी उसके केंद्रीय बैंक की ओर से भी सोने के भंडार में जोरदार इजाफा किया गया है। चीनी केंद्रीय बैंक ने जनवरी से अगस्त के बीच लगभग 80 टन सोना खरीदा। बैंक द्वारा की गई खरीदारी में हाल के महीनों के दौरान तेज उछाल आया और अगस्त में यह मात्रा लगभग तीन वर्षों के उच्चतम मासिक स्तर पर पहुंच गई। संस्थागत विश्लेषकों का स्पष्ट निष्कर्ष है कि इन ठोस आंकड़ों के आधार पर चीन चालू वर्ष में वैश्विक स्तर पर सोने की मांग को संचालित करने वाला सबसे बड़ा संचालक साबित हुआ है।
प्रमुख मुद्रा जोड़ों और क्रिप्टोकरेंसी का हाल
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अन्य जोड़ियों में भी महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर का युग्म, एयूडी/यूएसडी, एशियाई सत्र में नए दबाव में आकर 0.7100 के स्तर का परीक्षण करता दिखा। ऑस्ट्रेलिया के ताजा विनिर्माण पीएमआई आंकड़ों में संकुचन दर्ज किया गया, जबकि सेवा क्षेत्र लगातार दूसरे महीने धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। कमजोर घरेलू आंकड़ों और मजबूत डॉलर के दोहरे झटके के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट आई। इसके अलावा, ट्रेडर्स गुरुवार को होने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसके सामने अमेरिका-ईरान के बीच हुई अप्रत्यक्ष बातचीत के पूरा होने का बाजार पर कोई खास असर नहीं दिखा।
दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी, यूएसडी/जेपीवाई, यूरोपीय सत्र के मध्य में 157.50 के ऊपर चढ़ने के बाद एशियाई सत्र में भी 157.00 के मध्य दायरे के आसपास बनी रही। यह स्तर पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान द्वारा हाल ही में अपनी अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने के बावजूद येन को मजबूती नहीं मिल पाई। बैंक ऑफ जापान का यह निर्णय 7-2 के बहुमत से लिया गया था, जिसे बाजार में पहले से ही तय माना जा रहा था। केंद्रीय बैंक के अपेक्षाकृत नरम नजरिए और अमेरिकी फेड के सख्त रुख के कारण येन लगातार दबाव में है, हालांकि जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंका ने इस जोड़ी की आगे की बढ़त पर कुछ हद तक अंकुश लगाया है।
क्रिप्टोकरेंसी के मोर्चे पर, कार्डानो (एडीए) में मजबूती का रुख जारी रहा और यह इस सप्ताह 14 प्रतिशत से अधिक की तेजी के बाद 0.262 डॉलर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। इस तेजी को ओपन इंटरेस्ट में बढ़ोतरी, सकारात्मक फंडिंग दरों और बड़े निवेशकों यानी व्हेल्स द्वारा की जा रही सक्रिय खरीदारी से समर्थन मिल रहा है। डेरिवेटिव्स बाजार के संकेतक भी टोकन के लिए तकनीकी मजबूती का संकेत दे रहे हैं।
वाशिंगटन में ट्रंप और शी जिनपिंग की अहम बैठक
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के लिहाज से सबसे बड़ा घटनाक्रम वाशिंगटन में गुरुवार को प्रस्तावित शिखर सम्मेलन है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने होंगे। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बीते कई महीनों से व्यापारिक तनाव में राहत के संकेत मिले हैं। वित्तीय बाजार इस उच्चस्तरीय बैठक पर बेहद बारीकी से नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इस शिखर वार्ता के नतीजे यह तय करेंगे कि वाशिंगटन और बीजिंग अपने मौजूदा व्यापार समझौते को आगे बढ़ाते हैं या दोनों देश फिर से अनिश्चितता और तनाव के नए दौर में प्रवेश करेंगे।

















