अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की तेज बढ़त ने कई प्रमुख मुद्राओं और कीमती धातुओं को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है। विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों के चलते अमेरिकी डॉलर यूरो के मुकाबले काफी मजबूत हुआ है। बाजार में यह धारणा लगातार जोर पकड़ रही है कि यूरो क्षेत्र में महंगाई और मौद्रिक नीतियां अमेरिका की तुलना में ऊर्जा कीमतों के उतार-चढ़ाव से कहीं ज्यादा सीधे तौर पर प्रभावित होती हैं। इस कारण दोनों क्षेत्रों के बीच अनुमानित ब्याज दर का अंतर डॉलर के पक्ष में झुक गया है, जिससे यूरो पर तत्काल दबाव देखने को मिला है।
विश्लेषकों का आकलन है कि यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) और फेडरल रिजर्व दोनों ही साल के अंत तक अपनी ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकते हैं। हालांकि, वित्तीय हलकों में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या दोनों केंद्रीय बैंक अपने इस सख्त रुख पर टिके रह पाएंगे। यदि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक नजदीकियों से ऊर्जा कीमतों में तेज गिरावट दर्ज होती है, तो मौद्रिक नीतियों का यह गणित बदल सकता है। जब तक ऊर्जा की कीमतों में गिरावट का रुख बना रहेगा, तब तक यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर (EUR/USD) निकट अवधि में नीचे की तरफ खिसक सकती है, भले ही यह गिरावट लंबी अवधि तक टिक पाएगी या नहीं, यह अभी तय होना बाकी है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर आर्थिक सुस्ती और मजबूत अमेरिकी मुद्रा का दोहरा असर
बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) की विनिमय दर में नई बिकवाली देखी गई, जिससे यह जोड़ी 0.7100 के स्तर का परीक्षण करने लगी। ऑस्ट्रेलिया के हालिया फ्लैश पीएमआई आंकड़ों ने विनिर्माण क्षेत्र में संकुचन की पुष्टि की है, जबकि सेवा क्षेत्र में लगातार दूसरे महीने धीमी गति से विस्तार दर्ज किया गया है। कमजोर घरेलू आर्थिक आंकड़ों के अलावा अमेरिकी डॉलर की चौतरफा मजबूती ने इस जोड़ी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
मुद्रा कारोबारी इस समय वॉशिंगटन में प्रस्तावित उच्चस्तरीय कूटनीतिक वार्ता पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच हुई अप्रत्यक्ष बातचीत को बाजार ने लगभग नजरअंदाज कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक संकेतकों में आई कमजोरी से निवेशकों का भरोसा डिगा है, जिससे निकट अवधि में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर नकारात्मक असर गहराने का अंदेशा बना हुआ है।
बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि के बीच जापानी येन में नरमी
दूसरी तरफ जापानी मुद्रा येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) बुधवार को एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर के आसपास बना रहा। यह स्तर पिछले शुक्रवार को छुए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) द्वारा अपनी अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर को 7-2 के बहुमत से 1.00% से बढ़ाकर 1.25% करने के फैसले के बावजूद येन को अपेक्षित सहारा नहीं मिल सका। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की यह कवायद हफ्तों से बाजार की उम्मीदों के अनुरूप ही रही, लेकिन इसके नरम रुख ने येन पर दबाव कायम रखा।
फेडरल रिजर्व के सख्त ब्याज दर परिदृश्य के समर्थन से अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिल रही है, जिससे यह विनिमय दर ऊंचे स्तरों पर टिकी हुई है। हालांकि जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंका ने डॉलर की बढ़त को सीमित दायरे में बांध रखा है। बाजार सहभागी अमेरिका और ईरान की अप्रत्यक्ष वार्ता के दौर के पूरा होने पर ज्यादा प्रतिक्रिया न देते हुए आगामी वैश्विक बैठकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
डॉलर के उछाल से सोने की चमक फीकी, कार्डानो में आई तेजी
कमोडिटी बाजार में सोने के भाव पिछले कारोबारी दिन सब-$4,300 के निचले स्तरों से सुधरने के बाद बुधवार को एशियाई सत्र में फिर से बिकवाली के दबाव में आ गए। फेडरल रिजर्व के आक्रामक मौद्रिक रुख के दम पर अमेरिकी डॉलर 30 जुलाई के बाद के नए शिखर पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर की इस लगातार रैली ने गैर-उपज वाली सर्राफा संपत्ति यानी सोने की अपील को कमजोर कर दिया है, जिससे निवेशक पीली धातु में मुनाफावसूली करते देखे जा रहे हैं।
पारंपरिक संपत्तियों से इतर क्रिप्टोकरेंसी बाजार में अलग रुख देखने को मिला। कार्डानो (ADA) इस हफ्ते 14% से अधिक की छलांग लगाने के बाद 0.262 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया। इस टोकन में तेजी को बढ़ते ओपन इंटरेस्ट (ओआई), सकारात्मक फंडिंग दरों और बड़े निवेशकों यानी व्हेल्स द्वारा की जा रही खरीदारी का सीधा समर्थन मिला है। डेरिवेटिव संकेतकों में सुधार के साथ यदि लिवाली का यह प्रवाह जारी रहता है, तो कार्डानो आने वाले सत्रों में और ऊंचे स्तरों की ओर अग्रसर हो सकता है।
वॉशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण शिखर वार्ता
वैश्विक कूटनीति और व्यापारिक मोर्चे पर गुरुवार को वॉशिंगटन में एक बेहद अहम शिखर सम्मेलन होने जा रहा है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने होंगे। दुनिया भर के वित्तीय बाजार इस उच्चस्तरीय बैठक पर टकटकी लगाए बैठे हैं।
अमेरिका और चीन के बीच बीते कई महीनों से व्यापारिक तनाव में कमी देखने को मिली है। ऐसे में यह मुलाकात इस बात की दिशा तय करेगी कि दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियां अपनी इस व्यापारिक शांति और तालमेल को आगे बढ़ाएंगी या फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के एक नए दौर में प्रवेश करेगी। बाजार रणनीतिकारों का मानना है कि इस बैठक का परिणाम केवल शेयर और बॉन्ड बाजारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह कच्चे तेल, मुद्राओं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी गहरा असर डालेगा।

















